8 देशों के बीच चले युद्ध, यानी अजरबैजान-आर्मीनिया, रूस- यूक्रेन,-इजरायल -हमास, भारत - पाकिस्तान जिसे ऑपरेशन सिंदूर के नाम से युद्ध को जाना गया, अब इसके बाद खाड़ी देशों का युद्ध जिसने पूरी दुनिया को हिला करके रख दिया है. क्योंकि इन लड़ाइयों ने युद्ध की नीति ही नहीं रणनीति को भी बदल कर रख दिया है, भविस्य के युद्ध को देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय लगातार अपनी तीनो सेना की ताकत में इजाफा करने में जुटा हुआ है और इसी क्रम में भारत की रक्षा अधिग्रहण समिति यानी DAC ने आर्मी के लिए 300 धनुष आर्टिलरी गन की खरीद को मंजूरी दे दी है.

यह गन 155 मिमी/45-कैलिबर) की बनाई जाएगी. आपको बता दें कि आत्म निर्भर भारत के तहत यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आर्डर माना जा रहा है. इसकी तकनीक को साझा करते हुए रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह पूरी तरह से बोफोर्स तकनीक पर आधारित होगी. और इसके सेना में आने के साथ ही 15 नई तोपखाना रेजिमेंट को तैयार किया जाएगा,जिसकी तैनाती इंटेर नॅशनल बॉर्डर पर की जाएगी.

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धनुष की खासियत


धनुष (155 मिमी, 45-कैलिबर) होवित्जर. यह इसकी मारक छमता के आगे दुश्मन टिक भी नही सकता है. किसी मौसम,किसी भी रास्ते यानी पथरीला, पहाड़ी, या भी वह इलाका जहाँ पर भारी जलजमाव है यह कार्यवाही करने की ताकत रखता है.

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आखिर क्यों जरूरत है इस आर्टिलरी गन की?


15 नई आर्टिलरी रेजिमेंट का गठन और सीमा पर मारक क्षमता को मजबूत करना. यह 1980 के दशक की बोफोर्स तकनीक पर आधारित है. डिफेन्स में अपनी आत्मनिर्भर को दिखाने के साथ ही विदेशों में इसकी मांग को बढ़ाना है.