बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ आंध्र प्रदेश और यनम के तटों पर पहुंच गया है. समुद्र तट से टकराने के बाद इसके असर से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं और कहीं-कहीं हवा के झोंके 150KMPH की स्पीड तक पहुंच गए हैं. भारत के INSAT-3DS वेदर सैटेलाइट ने साइक्लोन की तस्वीरें कैप्चर की हैं. वेदर सैटेलाइट ने इमेजरी में 28 अक्टूबर की सुबह भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर आए बड़े साइक्लोन सिस्टम को कैप्चर किया, जिसमें फैले हुए बादलों के बैंड और घने बीच के बादलों का मास दिखा, जो साउथ इंडिया के समुद्र तटों से टकरा रहे थे.
इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के मुताबिक, साइक्लोन IST के अनुसार सुबह 2 बजे से सुबह 8 बजे के बीच तट को पार कर गया, जिसका सेंटर लैटिट्यूड 16.45°N और लॉन्गिट्यूड 81.9°E के पास अंदर की ओर था. लैंडफॉल की जगह नरसापुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर पूर्व-उत्तर-पूर्व, यनम से 40 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम और काकीनाडा से 60 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में थी. आज सुबह करीब साढ़े 3 बजे तूफान ने आंध्र प्रदेश में विशाखापटनम में लैंडफॉल किया और 31 अक्टूबर तक इस तूफान का असर पूर उत्तर भारत समेत दिल्ली तक देखने को मिल सकता है.
इनसैट-3DS ने तूफान के विशाल बादल कैप्चर किए
INSAT-3DS थर्मल इंफ्रारेड इमेज सुबह 9:30 बजे से 9:57 बजे IST के बीच कैप्चर की गईं, जिसमें साइक्लोन का बड़ा क्लाउड शील्ड पूर्वी और दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों और बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ दिख रहा है. इमेज में चमकीले सफेद बादलों के झुंड ऊंचे, ठंडे बादलों के ऊपरी हिस्सों को दिखाते हैं, जो अक्सर गहरे कन्वेक्शन और तेज आंधी-तूफान से जुड़े होते हैं. तूफान के चारों ओर बादलों की घुमावदार पट्टियां उस सर्कुलेशन को दिखाती हैं, जो नमी वाली हवा को अपने सेंटर की ओर खींचता है.
थर्मल इंफ्रारेड इमेजरी से मौसम वैज्ञानिक सूरज की रोशनी न होने पर बादलों के ऊपर के तापमान पर नजर रख सकते हैं. ठंडे बादलों की चोटियां वायुमंडल में ऊपर उठने वाले गरज के साथ आने वाले तूफान का संकेत दे सकती हैं, हालांकि सिर्फ इमेज से साइक्लोन की सतह पर हवा की रफ्तार का पता नहीं चल सकता या उसकी सही तेजी की पुष्टि नहीं हो सकती. सैटेलाइट व्यू यह भी दिखाता है कि तूफान का असर उसके सेंट्रल सर्कुलेशन से कहीं आगे तक फैला हुआ है. रेनबैंड लैंडफॉल पॉइंट से दूर तेज बारिश कर सकते हैं, जिससे प्रभावित जिलों में पानी भरने, अचानक बाढ़ और रुकावटों का खतरा बढ़ जाता है.
चक्रवात का लैंडफॉल प्रोसेस पूरा, लेकिन बरकरार है खतरा
IMD के नए ऑब्जर्वेशन से पता चलता है कि लैंडफॉल प्रोसेस पूरा हो गया है, लेकिन साइक्लोन का खतरा तुरंत खत्म नहीं होगा. जैसे-जैसे यह सिस्टम अंदर की ओर बढ़ेगा, फ्रिक्शन और इसके गर्म-समुद्री एनर्जी सोर्स के खत्म होने से इसकी हवाएं धीरे-धीरे कमजोर हो जाएंगी. हालांकि आंध्र प्रदेश और आस-पास के इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है, जिससे कुछ जगहों पर बाढ़ आ सकती है और नुकसान हो सकता है. तेज हवाएं पेड़ भी गिरा सकती हैं, बिजली की लाइनों को नुकसान पहुंचा सकती हैं और ट्रांसपोर्ट में रुकावट डाल सकती हैं.
अगला जरूरी फैक्टर साइक्लोन का अंदरूनी रास्ता और उसके बचे हुए क्लाउड बैंड से होने वाली बारिश की मात्रा होगी. एक शक्तिशाली साइक्लोन के तट को पार करने के बाद भी इसका कमजोर होता सर्कुलेशन किनारे से दूर रहने वाले समुदायों के लिए गंभीर खतरा बना रह सकता है.