देश में मानसून की वापसी के साथ साल का पहला चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ दस्तक दे रहा है, जिसे लेकर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अलर्ट भी जारी किया है. IMD के अनुसार, चक्रवाती तूफान की चपेट में 3 राज्य आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा आ सकते हैं, जहां तूफानी हवाओं के साथ भारी बारिश होने की चेतावनी है. IMD की डायरेक्टर मनोरमा मोहंती ने के अनुसार, उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर समुद्र तल से 7.6 किलोमीटर ऊपर तक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है. जिसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम को निम्न दबाव का क्षेत्र बनना शुरू हुआ, जो पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा और 21 सितंबर को पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी में और 22 सितंबर को पश्चिमी-मध्य बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन में बदल जाएगा, जो चक्रवाती तूफान बनकर समुद्र तट से टकराएगा.
पश्चिम बंगाल में तूफान का असर सबसे ज्यादा रहेगा
IMD के अनुसार, आज सोमवार रात तक तीनों राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जो शुक्रवार तक जारी रह सकता है. इन 5 दिन में तीनों राज्यों में गरज चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा पहुंचने के आसार हैं. दक्षिण 24 परगना, पूर्वी और पश्चिम मिदनापुर, पश्चिम वर्धमान, बीरभूम, मुर्शीदाबाद, पुरुलिया और झारग्राम में सबसे ज्यादा भारी बारिश हो सकती है. उत्तर बंगाल में कम बारिश होने की संभावना है. मालदा, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर में हल्की से मध्यम बारिश का येलो अलर्ट रहेगा. बुधवार गुरुवार को जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग में भारी बारिश होने के आसार हैं. इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह है. मछुआरों, लोगों और पर्यटकों से अपील है कि वे समुद्र तटों से दूर रहें और दूसरों को भी समुद्र तटों से दूर रहने को कहें, क्योंकि तूफान से बचाव ही एकमात्र उपाय है.
25 से 28 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में भारी बारिश
IMD के अनुसार, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि अगर निम्न दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान में बदला तो कितना असर होगा, लेकिन चक्रवाती तूफानी तीनों राज्यों के समुद्र तटों से टकराएगा. वैसे भी मौसम बदल रहा है और दक्षिण पश्चिम मानसून भी वापसी कर रहा है. पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में वापसी कर रहा है और 25 से 28 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में भारी बारिश होने की संभावना है. बता दें कि इस साल प्रशांत महासागर में एल नीनो एक्टिव है और दिसंबर तक इसके और मजबूत होने के आसार हैं, जिसके असर से सर्दियां भी गर्मियों की तरह सामान्य से ज्यादा पड़ सकती हैं और उतनी ही बारिश हो सकती है. क्योंकि गर्मियों में उसम ने जितना लोगों को तपाया है, उतनी ही बारिश ने तबाही मचाई है और सर्दियों में भी वेदर का पैटर्न ऐसा ही रहने के आसार हैं.