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कॉम्बैट फॉर्मेशन, भैरव कमांडों, EU कूणनीति… गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार ये चीजें शामिल

दिल्ली में गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। कर्तव्य पथ पर पूरी दुनिया भारत की सेना की ताकत देख रही है। इस बार कई खास चीजों को शामिल किया गया है। इससे भारत की ताकत और रणनीति दोनों में इजाफा हुआ है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

पूरा देश आज देशभक्ति के रंग में सराबोर है। दिल्ली से लेकर हर राज्य में 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। पूरे देश की नजरें दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हैं। कर्तव्य पथ पर सेना ने शक्ति प्रदर्शन किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूरी दुनिया भारत की ताकत का नजारा कर्तव्य पर देख रही है। हर बार की तरह इस साल भी गणतंत्र दिवस पर शानदार परेड निकाली जा रही है। हालांकि इस बार कई नई चीजें देखने को मिल रही हैं। इसमें भारत की शक्ति के साथ ही देश की विदेश कूटनीति का भी खूब प्रदर्शन हो रहा है।

सेना के भैरव कमांडो और कॉम्बैट फॉर्मेशन में सेना की टुकड़ी कर्तव्य पथ पर अपना शक्ति प्रदर्शन कर रही है। पहला मौका है जब सेना की टुकड़ी कॉम्बैट रेडी फॉर्मेशन में परेड में हिस्सा ले रही है। अभी तक सेना केवल साधारण मार्च की करती थी। इस बार कॉम्बैट फॉर्मेशन में भारतीय सेना कर्तव्य पथ पर परेड कर रही हैं। बता दें कि इस फॉर्मेशन में जवान युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने वाले गियर और नई छलावरण वाली वर्दी में आधुनिक हथियारों के साथ नजर आएंगे।

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इसके अलावा कर्तव्य पथ पर पहली बार भैरव लाइट कमांडो उतरे हैं। इस बार की परेड में सेना की नई स्पेशल यूनिट ‘भैरव लाइट कमांडो’ ने भाग लिया है। बता दें कि यह यूनिट शहरी इलाकों और कठिन भौगोलिक स्थितियों में सर्जिकल स्ट्राइक के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है। इस टुकड़ी का रहस्यमयी लुक और आधुनिक गियर इस परेड का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहे है। बता दें कि भैरव बटालियन ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनाई गई। यह तेज, हाई-इम्पैक्ट ऑपरेशंस के लिए स्पेशल यूनिट है।

परेड में सेना की ताकत के अलावा भारत की विदेश नीति का भी लोहा माना जा रहा है। इस बार गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब से टैरिफ वार शुरू किया है, तब से अंतरराष्ट्रीय पटल पर उधल पुथल मची है। ट्रंप ने दुनियाभर में चल रहे युद्धों को भी रुकवाने की काफी कोशिश की।

हालांकि वह अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं। ट्रंप ने रूस से तेल न खरीदने के लिए यूरोपीय देशों पर काफी दबाव डाला था। इसके लिए ट्रंप ने यूरोपीय संघ पर भी दबाव बनाया था। इसको देखते हुए अब यूरोपीय संघ की ब्रांच के दो ताकतवर नेता भारत में अतिथि बनकर आए हैं। इससे दुनिया में भारत की विदेश नीति की स्पष्ट झलक देखने को मिली है।

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