मार्च-रैली या विरोध प्रदर्शन के लिए पुलिस की मंजूरी लेने के क्या हैं नियम? जानें अधिकार और शर्तें

दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी को विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि विरोध प्रदर्शन करने के लिए पुलिस की अनुमति कैसे ली जा सकती है? क्या पुलिस अनुमति देने से इनकार कर सकती है? अगर पुलिस इनकार कर दे तो आयोजन क्या कदम उठा सकते हैं?

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अभिजीत दीपके के नेतृत्व में कॉकरोच जनता पार्टी को विरोध प्रदर्शन करना था. (Credit- ANI)

दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस विरोध प्रदर्शन के लिए परमिशन नहीं दी थी, इसलिए दिल्ली पुलिस ने आज शहर का इस तरह घेराव किया और ऐसे एक्शन लिए कि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक जाने ही नहीं दिया. वहीं प्रदर्शन को लीड करने के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंचे अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में ले लिया. प्रदर्शन को समर्थन देने वाले ध्रुव राठी, नेहा बोरा, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी को भी हिरासत में लेकर डिटेन सेंटर में भेज दिया गया.

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विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं मिली थी अनुमति

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने आज CJP प्रोटेस्ट को शुरू होने से पहले ही रोक दिया, क्योंकि प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस ने परमिशन नहीं दी थी. क्योंकि CJP ने मंजूरी के लिए दिल्ली पुलिस को 7 अक्टूबर को आवेदन दिया था, जबकि नियम के अनुसार प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए आवेदन 10 दिन पहले करना होता है और आवेदन पत्र में कुछ जानकारियां देनी होती हैं. क्योंकि BNSS की धारा 163 और दिल्ली पुलिस अधिनियम 1978 पुलिस को प्रदर्शन पर रोक लगाने का अधिकार देता है, इसलिए दिल्ली पुलिस ने आज CJP को विरोध प्रदर्शन करने से रोका. बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन किया जाए तो पुलिस को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार भी है.

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विरोध प्रदर्शन की अनुमति लेने के नियम क्या हैं?

बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत देशवासियों को खुलकर बोलने और अपने विचार व्यक्त करने की आजादी है. अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत देशवासियों को हथियारों के बिना शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठे होने का अधिकार भी है. अनुच्छेद 21 के तहत जीवन की एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करने का अधिकार भी है, जिसके लिए शिकायतों को व्यक्त करने का अधिकार भी उन्हें मिला हुआ है, लेकिन विरोध प्रदर्शन करने या रैली निकालने से पहले संबंधित पार्टी या शख्स को पुलिस या स्थानीय प्रशासन की अनुमति लेनी होगी. दिल्ली या स्थानीय प्रशासन का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जरूरी होगा. लेकिन CJP ने इस नियम का पालन नहीं किया.

नियम के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में रैली निकालने या विरोध प्रदर्शन करने के लिए करीब 10 दिन पहले पुलिस उपायुक्त (DCP) को लिखित सूचना देनी होगी और एक आवेदन पत्र मंजूरी के लिए लिखना होगा. वहीं आवेदन पत्र में कुछ जानकारियां भी देनी होंगी, जैसे रैली या विरोध प्रदर्शन का मकसद क्या है? रैली या विरोध प्रदर्शन किस दिन किस तारीख को होगा? किस समय शुरू होने और किस समय खत्म होगा? रैली, मार्च या विरोध प्रदर्शन के कौन-सी जगह या कौन-सा रूट निर्धारित है? रैली, मार्च या प्रदर्शन करने वाले कौन हैं? उनके नाम, पते और कॉन्टैक्ट नंबर देने होंगे. कितने लोग मार्च, रैली या प्रदर्शन में शामिल होंगे क्या तैयारियां हैं?

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क्या हैं पुलिस और प्रशासन के अधिकार और शर्तें?

भारतीय संविधान के अनुसार, लोगों को खुलकर बोलने, विचार व्यक्त करने या शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार पर अंकुश भी लगा है. क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 19(2) और 19(3) के तहत देश की एकता, अखंडता और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन अधिकारों पर प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं. जी हां, किसी रैली, मार्च या प्रदर्शन के लिए अनुमति देते समय पुलिस को इसकी शर्तें तय करने का अधिकार है, जो ट्रैफिक और लोगों की सिक्योरिटी को ध्यान में रखकर की जाती हैं. अगर विरोध प्रदर्शन, मार्च या रैली ऐसे क्षेत्र में होना है, जहां पहले से धारा 163 लागू है तो पुलिस वहां रैली, मार्च या प्रदर्शन करेन अुनमति कतई नहीं देगी.

नियम के अनुसार, अगर मार्च, रैली या विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा-दंगे होने या कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो तो पुलिस परमिशन को बीच में ही रद्द भी कर सकती है. वहीं शांतिपूर्ण मार्च, रैली या विरोध प्रदर्शन पर पुलिस मनमाने तरीके से रोक तो नहीं लगा सकती, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके इसे नियंत्रित कर सकती है. इसके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत मजिस्ट्रेट को इमरजेंसी में निषेधात्मक आदेश जारी करने का अधिकार है, जिसके बाद मार्च, रैली या प्रदर्शनों पर रोक लग जाएगी. दिल्ली पुलिस अधिनियम 1978 भी मार्च, रैली या विरोध प्रदर्शन के रूट, समय और शर्तों को तय करने का अधिकार देता है.

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प्रदर्शन करने के लिए पुलिस मंजूरी न दे तो क्या करें?

बता दें कि अगर पुलिस मार्च, रैली या विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति (NOC) न दे तो आयोजक कानूनी और संवैधानिक रूप से कई कदम उठा सकते हैं. जैसे पुलिस के परमिशन देने से इनकार करने की वजहों की समीक्षा करके फिर से आवेदन कर सकते हैं. मार्च, रैली या प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करना पुलिस की मनमानी लगे तो हाई कोर्ट में याचिका दायर करके चुनौती दे सकते हैं. रैली, मार्च या प्रदर्शन के समय और स्थान में परिवर्तन करके नए तरीके से आवेदन कर सकते हैं. शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की लिखित गारंटी देकर नए सिरे से आवेदन कर सकते हैं. मार्च, रैली या प्रदर्शन की जगह डिजिटल कैंपेन, प्रेस कॉन्फ्रेंस या ज्ञापन सौंपने का रास्ता भी अपना सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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