भारत में चुनाव कराना और मतदाताओं की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की है. भारत के सविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को संसद, विधानसभा और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के चुनावों की देखरेख और नियंत्रण करने की जिम्मेदारी दी गई है. इसी अनुच्छेद में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एवं अन्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और उनके पद से हटाने के प्रावधान भी दिए गए हैं.
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कैसे होती है?
वर्तमान की व्यवस्था मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की तहत है. इस अधिनियम के मुताबिक CEC और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है. लेकिन, इसके लिए एक चयन समिति की सिफारिश जरूरी होती है. इस चयन समिति में तीन सदस्य होते हैं-प्रधानमंत्री जो इस समिति के अध्यक्ष होते हैं, लोकसभा में नेता विपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री सदस्य होता है. इससे पहले केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री की अध्यक्षता वाली खोज समिति पांच नामों का एक पैनल तैयार करती है, जिसे चयन समिति के सामने रखा जाता है. उसके बाद एक या जीतने पद खाली हों उतने लोगों को चयन समिति द्वारा चुना जाता है, जिसके बाद राष्ट्रपति हस्ताक्षर करके नियुक्ति की जाती है.
कौन बन सकता है CEC और चुनाव आयुक्त और कितने दिन का होता कार्यकाल?
2023 के अधिनियम के मुताबिक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है जो भारत सरकार में सचिव के बराबर का पद संभाल रहा हो या संभाल चुका हो. साथ ही उसमें ईमानदारी होनी चाहिए और चुनावों के संभालने और कराने की समझ और अनुभव होना चाहिए.
CEC और चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 साल या 65 साल की उम्र तक, जो भी पहले हो उतना होता है. उन्हें फिर दोबारा नियुक्त नहीं किया जा सकता. अगर कूई चुनाव आयुक्त से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) बनता है, तो दोनों पदों का कुल कार्यकाल छह साल से ज्यादा नहीं हो सकता.
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्त को कैसे हटाया जाता है?
CEC को पद से हटाने के लिए संविधान में खास सुरक्षा दी गई है. अनुच्छेद 324(5) के मुताबिक CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश को हटाया जाता है. यानि कि सामान्य सरकारी आदेश से CEC को नहीं हटाया जा सकता.
चुनाव आयुक्त हो हटाने की प्रक्रिया अलग है. चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी है. अगर, मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त खुद पद छोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें राष्ट्रपति को लिखित में इस्तीफा देना होता है.
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त के पास कितनी पावर होती है?
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त मिलकर चुनाव आयोग को चलाते हैं. संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव कराने और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी है. वेतन, भत्ते और निर्णय के पावर बराबर होती है. मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग के अध्यक्ष होते हैं, लेकिन फैसले सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले नहीं लेते, फैसला बहुमत के आधार पर लिया जाता है.