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Medicine Price Control: आम जनता को महंगी दवाओं से बड़ी राहत! ओवरप्राइसिंग पर केंद्र का बड़ा एक्शन

Medicine Price Control: केंद्र सरकार ने ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) 2013 में बड़ा बदलाव किया है. अब महंगी दवाओं से जनता को राहत मिलेगी और ज्यादा दाम वसूलने वाले मेडिकल स्टोर्स व कंपनियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही सरकार ने नियमों को और पारदर्शी बना दिया है.

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Medicine Price Control: आने वाले दिनों में आम जनता को महंगी दवाओं से बड़ी राहत मिलने वाली है. केंद्र सरकार ने ड्रग्स ऑर्डर (DPCO), 2013 में बेहद महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जिससे मरीजों को सस्ती दवाएं मिलना आसान हो जाएगा. नए नियमों के अनुसार, अगर कोई भी मेडिकल स्टोर या कंपनी सरकार द्वारा तय की गई कीमत से एक रुपया भी ज्यादा वसूलती है, तो उस पर सरकार की तरफ से सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.

बदलाव से जनता को क्या होगा फायदा?

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब सरकार एक ही दवा के अलग-अलग पैक साइज, पैकेजिंग, डोज या दवा के रूप के आधार पर अलग-अलग अधिकतम (रिटेल) कीमत तय कर सकेगी. इससे बाजार में अलग-अलग पैक में आने वाली दवाओं की कीमतों की मनमानी पर लगाम लगेगी और उनकी सही कीमत तय करना आसान होगा. इसके साथ ही नियमों को सख्त करते हुए सरकार ने साफ किया है कि यदि किसी कंपनी ने तय दाम से ज्यादा पैसे वसूले, तो उसे ज्यादा ली गई रकम ब्याज सहित वापस जमा करनी होगी और भारी जुर्माना भी भुगतना पड़ेगा.

कंपनियों के लिए नई गाइडलाइंस

  • दाम घटने की जानकारी तुरंत देनी होगी: अगर किसी दवा की कीमत कम होती है, तो कंपनियों को 2 हफ्ते के भीतर सभी डीलरों और मेडिकल स्टोरों को नई प्राइस लिस्ट भेजनी होगी. साथ ही कम से कम दो राष्ट्रीय अखबारों और अपनी वेबसाइट पर इसका विज्ञापन देना होगा.
  • नई दवा लॉन्च करना आसान: अगर किसी नई दवा की खुदरा कीमत पहले ही तय हो चुकी है, तो अगले 12 महीनों के भीतर वही दवा लाने वाली दूसरी कंपनी को दोबारा दाम तय कराने के लिए आवेदन नहीं करना होगा. कंपनी को सिर्फ लॉन्चिंग के एक महीने के भीतर सरकार को सूचित करना होगा.
  • 7 साल तक रखना होगा रिकॉर्ड: हर दवा निर्माता को अपनी बिक्री, उत्पादन और अन्य जरूरी दस्तावेजों का रिकॉर्ड कम से कम 7 वित्तीय वर्षों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि सरकार कभी भी इसकी जांच कर सके.

दवाओं की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार का नया आदेश क्या है?

केंद्र सरकार और नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) में एक बड़ा और ऐतिहासिक संशोधन किया है. नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई भी फार्मास्युटिकल कंपनी या मेडिकल स्टोर (फार्मेसी) सरकार द्वारा तय की गई अधिकतम खुदरा कीमत से ₹1 भी अधिक वसूलते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि आवश्यक दवाओं की श्रेणियों में किसी भी प्रकार की ओवरप्राइसिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों से अतिरिक्त वसूली गई राशि को भारी जुर्माने के साथ वापस लिया जाएगा.

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₹1 की भी ओवरप्राइसिंग पर 15% ब्याज के साथ वसूली

नए आदेश की सबसे बड़ी इनसाइट इसका ‘कम्प्लायंस और रिकवरी’क्लॉज है. अब तक दवा कंपनियां कीमतों में फेरबदल के मामलों में लंबी कानूनी लड़ाईयों का सहारा लेकर बच निकलती थीं, लेकिन इस बार केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने बंद कमरे की बैठक के बाद एक नया लूप तैयार किया है. इसके तहत अगर किसी बैच में ओवरप्राइसिंग पाई जाती है, तो NPPA बिना किसी अदालती देरी के उस कंपनी से 15% प्रतिवर्ष के चक्रवृद्धि ब्याज के साथ पूरी अतिरिक्त राशि वसूल करेगा. यह राशि सीधे ‘राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष’ में जमा की जाएगी. इसके अलावा, बार-बार उल्लंघन करने वाली कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस को 3 महीने के लिए सस्पेंड करने का भी प्रावधान किया गया है.

NPPA का नया मॉनिटरिंग सिस्टम

स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में स्वास्थ्य देखभाल के खर्च को कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. यह नियम आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (NLEM) के तहत आने वाली सभी दवाओं पर प्रभावी रूप से लागू होगा. निगम ने इसे ट्रैक करने के लिए एक एडवांस्ड ‘फार्मा सही दाम 2.0’ डिजिटल डेटाबेस लॉन्च किया है. इसके जरिए देश के किसी भी कोने में बिकने वाली दवाओं के क्यूआर कोड (QR Code) और बैच नंबर को सीधे ट्रैक किया जा सकेगा. अगर रिटेलर एमआरपी (MRP) से छेड़छाड़ करता है, तो सिस्टम सॉफ्टवेयर के जरिए इसकी तुरंत पहचान हो जाएगी.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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