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बिहार सीमांचल पर केंद्र का फोकस, तीन दिन में रणनीति तय करेंगे गृह मंत्री अमित शाह

Credit: Social Media
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गृह मंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय बिहार दौरा बेहद अहम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे का मुख्य फोकस बिहार के सीमांचल इलाके-किशनगंज, पूर्णिया और अररिया में घुसपैठ और डेमोग्राफिक बदलाव पर रणनीति तैयार करना है. सूत्रों का कहना है कि घुसपैठ का मुद्दा सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पश्चिम बंगाल की चुनावी गणित को भी साधने की कोशिश की जा रही है. खास बात ये है कि बिहार का किशनगंज जिला पश्चिम बंगाल से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर है और बांग्लादेश सीमा से भी सटा हुआ है, जिससे ये इलाका सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बन जाता है.

बैठक में क्या होगा खास?

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बिहार के सीमावर्ती जिलों में डेमोग्राफिक बदलाव को रोकने के लिए केंद्र सरकार बड़ी और समन्वित रणनीति पर काम कर रही है. गृह मंत्री अमित शाह 25 से 27 फरवरी तक अपने बिहार दौरे के दौरान जनसांख्यिकीय परिवर्तन, घुसपैठ और अवैध धार्मिक निर्माण जैसे अहम मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे. आज किशनगंज में गृह मंत्री ने लैंड पोर्ट अथॉरिटी की समीक्षा बैठक की है. कल यानी गुरुवार को अररिया में ‘वाइब्रेंट-विलेज दो’ के तहत गृह मंत्री समीक्षा बैठक करेंगे. अमित शाह की अररिया, किशनगंज में होने वाली समीक्षा बैठक बिहार में इस तरह की पहली उच्चस्तरीय बैठक होगी, जिसमें सीमावर्ती जिलों किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा और सुपौल के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक शामिल होंगे. बैठक में कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय को लेकर व्यापक रणनीति पर चर्चा होगी.

सीमावर्ती इलाकों पर फोकस क्यों?

सरकार डेमोग्राफिक बदलाव को एक बड़ी चुनौती मान रही है. सूत्रों के मुताबिक, सीमावर्ती इलाकों में लगातार तीन दिन तक गृह मंत्री का प्रवास इस बात का साफ संकेत है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है. बैठक के एजेंडे में अवैध धार्मिक निर्माण पर कार्रवाई और घुसपैठियों की पहचान प्रमुख मुद्दे होंगे. सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारियों के साथ भी बेहतर समन्वय को लेकर चर्चा की जाएगी. घुसपैठ और सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव को लेकर केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है. नेपाल और बांग्लादेश सीमा से जुड़े इन इलाकों में स्थिति को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार एक बड़े प्रशासनिक एक्शन प्लान पर काम कर रही है.

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क्या है प्लान?

कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. ये कदम सीमावर्ती क्षेत्रों पर केंद्र के बढ़ते फोकस को दर्शाता है, जो लंबे समय से राजनीतिक और सुरक्षा चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सीमा पार से घुसपैठ रोकने के लिए ठोस ब्लूप्रिंट पर भी मंथन होगा. साथ ही जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जाएगा. बताया जा रहा है कि चुनावी लिहाज से संवेदनशील इलाकों में डेमोग्राफिक बदलाव का मुद्दा पहले ही जोर-शोर से उठ चुका है. सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन डेका भी शामिल होंगे.

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