'कोई भी कहीं भी सेफ नहीं', CDS सुब्रमणि बताया- क्यों बदल रहे मैदान-ए-जंग के हालात?

Chief of Defence Staff On Modern Warfare: आज के जमाने में जंग का नेचर पूरी तरह बदल चुका है, इसलिए हमें भी वक्त के साथ हर हाल में बदलना होगा. सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बताया कि अब सिर्फ फ्रंटलाइन में ही वॉर नहीं होते, बल्कि पूरा देश पर इसका असर हो सकता है.

CDS NS Raja Subramani PIB

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि (Photo-PTI)

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CDS Raja Subramani: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कहा है कि वॉर का नेचर तेजी से बदल रहा है, और अब फ्रंटलाइन और पीछे के इलाकों के बीच का पारंपरिक फर्क कम होता जा रहा है. ‘नेटवर्क-18’ से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मॉडर्न कॉन्फ्लिक्ट उन इलाकों को भी अफेक्ट कर सकते हैं जो जंग के मैदान से बहुत दूर हैं.

जंग के मैदान का दायरा बढ़ा

जनरल राजा सुब्रमणि ने कहा, ‘अब आगे के इलाके और पीछे के इलाके के बीच कोई फर्क नहीं रह गया है. अब युद्ध का मैदान मोर्चे से हटकर पीछे के इलाकों और गहराई वाले इलाके तक फैल गया है. कोई भी कहीं भी सेफ नहीं है.’ उन्होंने आगे कहा कि किसी खतरे की पहचान करने और उस पर रिएक्ट करने के बीच का समय कम होता जा रहा है, जिससे तेजी से फैसले लेना और भी जरूरी हो गया है.

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पूरा देश कॉन्फ्लिक्ट में पड़ सकता है

CDS ने कहा कि आज के युद्ध अब सिर्फ मोर्चे पर लड़ने वाले सैनिकों तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष की मिसाल देते हुए बताया कि कैसे सैन्य टकराव के देशों और उनकी आबादी पर काफी ज्यादा असर पड़ सकता हैं. सुब्रमणि के मुताबिक, भविष्य की सुरक्षा चुनौतियां जमीन, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबरस्पेस और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर जैसे कई डोमेन में फैली होंगी. उन्होंने कहा, ‘हम एक बार में सिर्फ एक तरह के संघर्ष की तैयारी करने का विकल्प नहीं चुन सकते.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य के युद्ध के मैदान एक ही समय में, आपस में जुड़े हुए और कई क्षेत्रों में फैले हुए हो सकते हैं.

बदलावों के लिए ढलना जरूरी

सुब्रमणि ने ये भी चेतावनी दी कि जंग का नेचर मौजूदा मिलिट्री सिस्टम और प्रोसीजर्स के ढलने की स्पीड से कहीं ज्यादा तेजी से बदल रहा है. तेजी से हो रहे भू-राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, ‘युद्ध का स्वरूप हमारे ढलने की क्षमता से कहीं ज्यादा तेजी से बदल रहा है. हमें बहुत तेजी से बदलना होगा.’

‘BUILT’ फ्रेमवर्क क्या है?

CDS ने फ्यूचर के वॉर को समझने के लिए BUILT फ्रेमवर्क के बारे में बताया. ये Battlefield (मैदान-ए-जंग), Economics of war (जंग की अर्थव्यवस्था), Integration of technology and data (टेक्नोलॉजी और डेटा का एकीकरण), Learning (सीखना), और Delivery at scale (बड़े पैमाने पर डिलीवरी) में हो रहे बदलावों पर फोकस करता है. उन्होंने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी ने एडवांस क्षमताओं तक पहुंच बढ़ा दी है, जिससे गैर-सरकारी समूह ज्यादा असरदार ढंग से असममित तरीकों का इस्तेमाल कर पा रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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