प्रस्तावित CAPF Regulation Bill को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठ रहा है कि क्या विशेष प्रकृति वाले सीमा सुरक्षा बलों पर एक सामान्य प्रशासनिक ढांचा थोपना उचित है? भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) जैसी फोर्स 3,488 किमी लंबी भारत-चीन सीमा पर तैनात है, जहां तैनाती उच्च हिमालयी, दुर्गम और सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में होती है. ऐसे वातावरण में नेतृत्व के लिए पर्वतीय युद्ध (माउंटेन वॉरफेयर), स्कीइंग, उच्च-ऊंचाई में ऑपरेशन और विशेष हथियारों के उपयोग जैसी अनिवार्य विशेषज्ञता आवश्यक होती है. यहां मूल प्रश्न उठता है कि क्या ऐसे जटिल और चुनौतीपूर्ण वातावरण में नेतृत्व के लिए वही अधिकारी उपयुक्त होंगे, जिनकी पृष्ठभूमि मुख्यतः सिविल पुलिसिंग की रही है? कितने अधिकारी इन विशिष्ट कोर्सों और प्रशिक्षणों से गुजरे होते हैं?

क्यों है खास?

इसी प्रकार, BSF का दायित्व भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा करना है, जो व्यावहारिक रूप से सैन्य-प्रकृति का कार्य है. ऐसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक फील्ड अनुभव और जमीनी समझ अत्यंत आवश्यक होती है, जिसे विकसित होने में वर्षों लगते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ITBP, BSF और SSB जैसे बल ‘फ्रंटियर फोर्स’ हैं-जहां ऑपरेशन, प्रशिक्षण और नेतृत्व पूरी तरह भू-भाग, मौसम और सामरिक परिस्थितियों से संचालित होता है. यहां “वन-साइज़-फिट्स-ऑल” प्रशासनिक मॉडल लागू करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता. एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन बलों के कैडर अधिकारी अपने पूरे करियर में कठिन सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्य करते हुए गहरी संस्थागत समझ और ऑपरेशनल निरंतरता विकसित करते हैं. इसके विपरीत, बाहरी नियुक्तियां प्रायः वरिष्ठ स्तर पर होती हैं, जिससे जमीनी अनुभव और नेतृत्व के बीच अंतर उत्पन्न हो सकता है.

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फिटनेस बेहद जरूरी

इसके साथ ही, इन बलों में सख्त शारीरिक और मेडिकल फिटनेस (शेप वन मानक) केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि ऑपरेशनल आवश्यकता है. ऐसे में यह भी आवश्यक है कि नेतृत्व के सभी स्तरों पर समान मानक लागू हों. सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी उठता है कि यदि विशेष परिस्थितियों के नाम पर बाहरी नेतृत्व आवश्यक माना जाता है, तो यही सिद्धांत सेना जैसे अन्य विशिष्ट बलों पर क्यों लागू नहीं होता, जहां नेतृत्व पूरी तरह अपने कैडर से ही आता है? इन सभी बिंदुओं के मद्देनज़र यह मांग उठ रही है कि प्रस्तावित विधेयक पर व्यापक और गहन विचार-विमर्श किया जाए, ताकि सीमा सुरक्षा बलों की विशिष्ट प्रकृति, विशेषज्ञता और ऑपरेशनल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लिया जा सके.

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