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90% घटे कैंसर की दवाइयों के रेट, 7000 में मिलेगा 80000 का इंजेक्शन, जानें कब से लागू होंगी नई कीमतें?

कैंसर के मरीजों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है, क्योंकि कैंसर की 500 से ज्यादा दवाओं के रेट घटा दिए गए हैं. अलग-अलग दवाओं के रेट अलग-अलग स्तर पर घटाए गए हैं और 50 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक की कटौती दामों में की गई है.

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कैंसर की दवाओं के रेट घटाकर केंद्र सरकार ने लोगों को बड़ी राहत दी है. (Credit- AI)

भारत में कैंसर की 543 दवाओं के रेट घटाकर लोगों को बड़ी राहत दी गई है. राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 397 दवाओं के रेट 73% घटाए हैं. इनमें से 217 दवाओं के रेट अब आधे से भी कम हो गए हैं. 97 दवाओं के रेट में 70% से ज्यादा और 50 दवाओं के रेट में 80% से ज्यादा की गिरावट आई है. 5 दवाओं के रेट 90% से ज्यादा कम हो गए हैं. दवाओं के नए रेट 9 नवंबर 2026 से लागू होंगे और रेट लिस्ट को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा. रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल विभाग के आदेश पर नई रेट लिस्ट जारी की गई है.

नोटिफिकेशन के अनुसार, सैमटेपा (थियोटेपा 100 मिलीग्राम इंजेक्शन, 1 वायल) का रेट सबसे ज्यादा कम हुआ है. इस इंजेक्शन का रेट पहले 80071.86 रुपये था, जो अब 7150.33 रुपये हो गया है. पैलबोसिक्लिब की पैलबोप्रो दवा का रेट भी घटा है. इस दवाई का 21 कैप्सूल के पैक का रेट 40421 से कम होकर 2720 रुपये हो गया है. 146 दवाओं के रेट नहीं बदले हैं, जिनमें पेटेंट वाली दवाएं भी शामिल हैं. लेकिन केंद्र सरकार ने 137 एंटी कैंसर मेडिसिन (साल्ट) के ट्रेड मार्जिन को MRP के 30% तक सीमित करने का आदेश दिया था. उसके बाद ही नई रेट लिस्ट जारी की गई है.

दवाओं की उपलब्धता पर असर न पड़े ये देखना होगा
सबसे जरूरी है कि मार्जिन लॉजिकल ढंग से लागू हो. दवाओं पर इतना मुनाफा न हो कि मरीजों को महंगी खरीदनी पड़ें, लेकिन इतना कम भी न हो कि कंपनियां उनकी आपूर्ति बंद कर दें. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में 13 हजार का इंजेक्शन 1 लाख से ज्यादा में मिलने पर सवाल उठ चुका है. यह बताता है कि सप्लाई चेन में मार्जिन की सख्त जांच जरूरी है. जबकि, पेटेंट दवाओं को लेकर व्यावहारिक मुश्किल है. ये नई तकनीक और पेटेंट अधिकारों के तहत आती हैं. इनके दाम घटाने पर कंपनियां भारत में आपूर्ति कम या बंद कर सकती हैं.

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सरकार की ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (टीएमआर) नीति में गंभीर खामियां
इस कटौती से साफ है कि जेनेरिक दवा कंपनियां मरीजों से भारी मार्जिन वसूल रही थीं. लेकिन सरकार की ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (टीएमआर) नीति में गंभीर खामियां और विरोधाभास हैं.

पेटेंट वाले के दाम क्यों नहीं घटे: टीएमआर फॉर्मूले में प्राइस टू स्टॉकिस्ट पर 42.8% तक मार्जिन की छूट है. दवाएं बेहद महंगी होने के कारण यह मार्जिन रकम के लिहाज से बहुत बड़ा हो जाता है. कैंसर दवाओं की सप्लाई चेन में एक-दो बिचौलिये होते हैं या दवाएं सीधे अस्पतालों को बेची जाती हैं. ऐसे में चंद लोगों को भारी मुनाफा मिल सकता है. पेटेंट दवाओं पर टीएमआर का असर न पड़ने की यह भी एक वजह हो सकती है.

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मरीजों को राहत देने का मौका गंवाया: मरीज सहायता कार्यक्रमों के तहत मुफ्त दी जाने वाली दवाओं को टीएमआर की गणना से बाहर रखा गया है. इन्हें शामिल करने पर पेटेंट दवाओं की कीमतों में कुछ कमी आ सकती थी.

बिचौलियों को भारी मार्जिन: डीपीसीओ के तहत निर्धारित दवाओं पर लागू 16% मार्जिन की सीमा कैंसर की दवाओं पर भी लागू होतीं, तो मरीजों को ज्यादा राहत मिल सकती थी. 2019 में मार्जिन कैप वाली दवाओं के दामों में अब बड़ी कटौती बताती है कि कंपनियां पहले भी ज्यादा मार्जिन ले रही थीं.

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एनपीपीए पर सवाल: एनपीपीए के पास सप्लाई चेन में कीमतों का ठोस डेटा नहीं है. कंपनियों को बिना स्वतंत्र जांच कीमतें लागू करने और उनकी जानकारी भी खुद देने की छूट दे दी गई है.

    कुछ महंगी दवाओं के काम कम नहीं हुए
    कैंसर की दवाओं की कीमतों में कटौती के बावजूद इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ बेहद महंगी दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इनमें इम्यूनोथेरेपी की दवा कीट्रूडा भी शामिल है. कीट्रूडा का इस्तेमाल 21 से ज्यादा तरह के कैंसर के इलाज में होता है. अभी भी इसकी कीमत 2,16,500 रुपए ही बनी हुई है. ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रिबोसाइक्लिब की कीमत भी 24,435 रुपए पर ही स्थिर है. टैग्रिसो , टेसेंट्रिक, डार्जालेक्स और इम्फिंजी जैसी दवाओं के कीमत में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है.

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    Know More: Editorial Guidelines

    लेख समाप्त

    लेखक के बारे में

    Khushbu Goyal

    खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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