भारत की पहली बुलेट ट्रेन (B28) का इंतजार साल 2027 में खत्म हो जाएगा. देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर दौड़ेगी, जिसके कोच बेंगलुरु में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) मिलकर बना रही है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैक्ट्री जाकर निर्माण कार्य का जायजा लिया और वीडियो जारी करके देशवासियों को बुलेट ट्रेन की झलक दिखाई. बुलेट ट्रेन की इंटीग्रेटेड कार बॉडी बन चुकी है, जिस पर फाइनल स्टेज के ‘स्क्वीज टेस्ट’ चल रहे हैं. बुलेट ट्रेन का ट्रायल अगस्त 2027 तक हो सकता है और 2027 में ही पहली बुलेट ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जा सकती है.
बुलेट ट्रेन के लिए रेलवे ट्रैक कैसा होगा?
बता दें कि बुलेट ट्रेन के लिए अलग से ट्रैक बनाए जाएंगे, यानी बुलेट ट्रेन के ट्रैक नॉर्मल रेलवे ट्रैक से अलग होंगे. भारतीय रेलवे ट्रैक बैलास्ट टेक्नोलॉजी से बने हैं, जिसमें पटरियों के बीच और नीचे नुकीले पत्थर बिखेरे जाते हैं, जो 100 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन का वजन झेलते हैं और ट्रेन की स्थिरता बनाए रखकर इसे डिरेल होने से रोकते हैं. लेकिन बुलेट ट्रेन के ट्रैक बैलास्टलैस होंगे, यानी इसके ट्रैक पर पत्थर नहीं होंगे, क्योंकि जब बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी तो पटरी और ट्रेन के निचले हिस्से के बीच हवा का दबाव बनेगा तो पत्थर बंदूक की गोली की तरह उड़कर ट्रेन के निचले हिस्से में इलेक्टॉनिक इंस्ट्रूमेंट्स से टकराकर उन्हें डैमेज कर सकते हैं, जिससे ट्रेन के डिरेल होने और हादसा होने का खतरा होगा.
क्या बुलेट ट्रेन के ट्रैक में भी मोड़ होंगे?
बुलेट ट्रेन के ट्रैक की चौड़ाई सामान्य रेलवे ट्रैक से अलग होगी. ट्रैक में मोड़ भी बहुत कम होंगे, लेकिन जहां जरूरत होगी वहां पुल और सुरंग बनाई जाएंगी. बुलेट ट्रेन के लिए सिग्नलिंग सिस्टम अलग होगा, जिसके लिए कैब सिग्नलिंग और ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल सिग्नल लगाए जा सकते हैं. बुलेट ट्रेन का ट्रैक पूरी तरह से दोनों तरफ से ऊंची दीवारों से कवर सिंगल ट्रैक कॉरिडोर होगा. बुलेट ट्रेन को इलेक्ट्रिसिटी देने के लिए हाई वोल्टेज ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन सिस्टम लगेगा. बुलेट ट्रेन के ट्रैक के आसपास हवा के दबाव को ध्यान में रखा जाएगा. कुल मिलाकर बुलेट ट्रेन का ट्रैक बहुत स्पेशल, यूनिक, मजबूत और स्पीड के अनुसार होगा, क्योंकि बुलेट ट्रेन गोली की स्पीड से दौड़ेगी तो इसे हादसे से शिकार होने से भी बचाना होगा, नहीं तो यह प्रोजेक्ट फेल हो जाएगा.
बुलेट ट्रेन ट्रैक किस तकनीक से बनेगा?
भारत में बुलेट ट्रेन का ट्रैक जापान की विश्व प्रसिद्ध शिनकानसेन बुलेट ट्रेन टेक्नोलॉजी जे-स्लैब ट्रैक की तरह बनाया जाएगा. जे-स्लैब ट्रैक बैलास्टलैस ट्रैक होगा, जो 4 परतों से मिलकर बनेगा. इसमें रेलवे ट्रैक पर पत्थर नहीं बिखेरे जाएंगे और न ही लकड़ी या कंक्रीट के स्लीपर्स नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि कंक्रीट के स्लैब बनाए जाएंगे. इस सिस्टम के तहत ट्रैक पर सबसे नीचे RC ट्रैक बेड होगा और उसके ऊपर सीमेंट डामर मोर्टार यानी सीमेंट एस्फाल्ट मोर्टार (CAM) की परत बिछाई जाएगी. इसके ऊपर कंक्रीट के भारी भरकम स्लैब रखे जाएंगे, जिन्हें इलास्टिक फास्टनिंग डिवाइस (क्लैंप) से कस दिया जाएगा. यह तकनीक पटरियों को हिलने नहीं देगी, जिससे 320 की स्पीड वाली ट्रेन स्थिर रहेगी. बार-बार टैंपिंग यानी सही करने की की जरूरत नहीं पड़ेगी और रखरखाव का खर्च कम होगा. यात्रियों को झटके नहीं लगेंगे और पटरियों की उम्र भी लंबी होगी.
बुलेट ट्रेन के स्पेशल फीचर्स क्या होंगे?
बता दें कि पहली बुलेट ट्रेन की डिजाइन स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा और ऑपरेशन स्पीड 249 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी. भविष्य में इस स्पीड को 280 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड तक लाया जा सकता है. बुलेट ट्रेन में 8 कोच होंगे, जिसमें 4 मोटर कार और 4 ट्रेलर कार होंगी. बुलेट ट्रेन की लंबाई 202 मीटर होगी और इसमें एक बार में 557 लोग यात्रा कर सकेंगे. बुलेट ट्रेन में 7 स्टैंडर्ड क्लास कोच, 1 एक्जीक्यूटिव क्लास कोच, दिव्यांगों के लिए 2 रिजर्व सीटें, मूविंग सीटें, लैपटॉप-मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, वाई-फाई, LED लाइट्स, बायो-डाइजेस्टर टॉयलेट और हिंदी-अंग्रेजी समेत कई स्थानीय भाषाओं के डिस्प्ले भी इंस्टॉल होंगे. बुलेट ट्रेन में जापान की टेक्नोलॉजी अर्थक्वेक वॉर्निंग सिस्टम लगाया जाएगा, जो भूकंप आने पर बिजली सप्लाई बंद कर देगा, जिससे इमरजेंसी ब्रेक लगेंगे और ट्रेन जहां होगी, वहीं रुक जाएगी.
भारत में कितने बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनेंगे?
बता दें कि भारत में 8 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाए जाने हैं, जिनमें से एक निर्माणाधीन है और 7 प्रस्तावित हैं, जिनमें से कुछ मंजूर हो चुके हैं और कुछ को मंजूरी मिलनी बाकी है. बुलेट ट्रेन का पहला कॉरिडोर मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर होगा, जिसकी लंबाई 508 किलोमीटर होगी. वहीं 7 अन्य प्रस्तावित कॉरिडोर मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी होगा. केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर को दिल्ली-वाराणसी-गुवाहाटी बुलेट ट्रेन के नॉर्दर्न कॉरिडोर को मंजूरी दी है.