भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से चली आ रही तल्खी के बीच अब दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत की यात्रा पर आ रहे हैं. वह नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इस दौरे को लेकर चीन के सरकारी मीडिया में भारत के रुख और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक पहल की चर्चा भी देखने को मिल रही है.
चीनी मीडिया क्या दिखा रहा?
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में शी जिनपिंग की भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर पेश किया है. रिपोर्ट में भारतीय और चीनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि यह दौरा भारत-चीन संबंधों में स्थिरता लाने और आपसी संवाद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
भारत-चीन के संबंधों में सुधार
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भी चीनी राष्ट्रपति के दौरे को महज ब्रिक्स सम्मेलन तक सीमित नहीं माना जा रहा है. इसे दोनों एशियाई शक्तियों के बीच रिश्तों को पटरी पर लाने की बड़ी कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है. भारतीय थिंक टैंक से जुड़े मोहम्मद साकिब ने कहा कि शी जिनपिंग की मौजूदगी से ब्रिक्स सम्मेलन का महत्व और बढ़ गया है. वहीं, सिंघुआ यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ छ्यान फंग ने माना कि भारत इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के अवसर के तौर पर देख रहा है. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना भी जताई जा रही है.
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भारत-चीन के बीच बनी थी 8 सूत्री सहमति
चीनी विशेषज्ञों ने हाल में हुई सीमा वार्ता को भी सकारात्मक बताया है. अगस्त में हुई 25वें दौर की बातचीत में आठ सूत्री सहमति बनी थी. चीन की ओर से इसे सीमा से जुड़े मतभेदों के बीच आगे बढ़ने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है. इसी अवधि में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 151 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिससे चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना.
ग्लोबल टाइम्स में यह तर्क भी सामने आया कि भारत अपनी विदेश नीति को बदलते वैश्विक समीकरणों के हिसाब से नए सिरे से संतुलित कर रहा है. विशेषज्ञों ने भारत-चीन के पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं. ऐसे में शी जिनपिंग का दौरा सिर्फ ब्रिक्स सम्मेलन नहीं, बल्कि रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत भी माना जा रहा है.
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