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‘पद्म रणनीति’ से झारखंड साधने की तैयारी? पूर्व सीएम शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान, सरकार का ऐलान

हर साल की तरह इस साल भी पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया गया। इसमें कई दिगग्ज हस्तियों के नाम शामिल रहे। झारखंड के पूर्व सीएम और केेंद्र सरकार की विरोधी पार्टी के शिबू सोरेन को भी पद्म पुरस्कार देने का ऐलान किया गया है। इसके पीछे केंद्र सरकार की क्या रणनीति हो सकती है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया गया। इसमें कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं। कई नाम तो गुमनाम नायकों को और कई नाम जानी मानी हस्तियों के। दोनों ही नाम हैरान करने वाले हैं। जानी मानी हस्ती में एक नाम झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन शामिल है। केंद्र सरकार ने इन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है।

चौंकाने वाला फैसला इसलिए माना जा रहा है कि शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी के संस्थापक थे। झारखंड में वर्तमान में इसी पार्टी की सरकार है। शिबू सोरेन का कुछ समय पहले ही निधन हुआ था। इनके बेटे हेमंत सोरेन वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हैं। केंद्र सरकार ने शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान देने का फैसला किया है।

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पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने गत 4 अगस्त को दिल्ली में अंतिम सांस ली थी। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। झारखंड में शिबू के अंतिम संस्कार में पीएम मोदी भी शामिल हुए थे। तभी के झारखंड मुक्ति मोर्चा और बीजेपी के बीच सामान्य संबंध देखे जा रहे थे।

हालांकि आपराधिक मामले में पिछले साल सीएम हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा था। इसी बीच बीजेपी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच तीखा विवाद देखने को मिल रहा था। सोरेन ने कई बार बीजेपी पर एजेंसियों के गलत प्रयोग का आरोप भी लगाया था लेकिन शिबू सोरेन की मृत्यू के बाद दोनों पार्टियों के संबंधों में कड़वाहट काफी हद तक कम हो गई थी।

गत बिहार विधान सभा चुनाव में पहले हेमंत सोरेन ने महागठबधंन के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। बाद में सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चुनाव मैदान से खुद को बाहर कर लिया था। इसके पीछे मुक्ति मोर्चा ने केवल झारखंड पर ध्यान देने की वजह बताई थी।

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शिबू सोरेन को पद्म पुरस्कार देने से चर्चा शुरू हो गई है कि क्या बीजेपी ने झारखंड में अपनी पैठ जमाने की तैयारी शुरू कर दी है। झारखंड में 2029 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा देश में उसी साल आम चुनाव होने हैं। विधान सभा को छोड़कर बीजेपी आम चुनाव के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा से सहयोग मांग सकती है। झारखंड में कुल 20 लोक सभा सीटें हैं। लोगों में चर्चा है कि बीजेपी ने इस सीटों के लिए तैयारी शुरू कर दी है।


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