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BJP ने खेला ‘पद्म मास्टरस्ट्रोक’! केरल और विपक्षी विचारधारा के दिग्गजों को Padma Award देने के पीछे क्या है मैसेज?

Padma Awards 2026

पद्म पुरस्कारों के वितरण में राज्यों को प्रमुखता देकर सरकार ने चुनावी दांव खेला है.

Padma Awards Political Analysis: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मोदी सरकार ने इस साल के पद्म पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है, लेकिन इस बार सम्मान सूची सिर्फ उपलब्धियों की कहानी नहीं कहती, बल्कि इसमें चुनावी राजनीति की छाया भी साफ़ झलकती है. पद्म पुरस्कारों में इस बार चुनावी राज्यों की ‘बहार’ दिखाई देती है, जिसमें तमिलनाडु सबसे आगे रहा है.

कुल 131 पद्म पुरस्कारों में सबसे अधिक सम्मान तमिलनाडु की हस्तियों को मिले हैं. अप्रैल में विधानसभा चुनावों का सामना कर रहे तमिलनाडु की 13 हस्तियों को पद्म सम्मान दिया गया है, जो कुल पुरस्कारों का करीब 10 प्रतिशत है. पश्चिम बंगाल और केरल भी इस सूची में पीछे नहीं हैं. इन तीन राज्यों को मिलाकर लगभग एक चौथाई पद्म पुरस्कार बांटे गए हैं, जबकि तीनों ही राज्य चुनावी या राजनीतिक रूप से केंद्र के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.

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इस वर्ष पांच हस्तियों को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है. इनमें फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के अलावा चार हस्तियां तमिलनाडु और केरल से हैं. खास बात यह है कि इनमें से तीन पद्म विभूषण अकेले केरल की हस्तियों को दिए गए हैं, जबकि तमिलनाडु के प्रसिद्ध वायलिन वादक एन. राजम को भी यह सम्मान मिला है.

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केरल के कई बार मुख्यमंत्री रहे वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता वी.एस. अच्युतानंदन को पद्म विभूषण दिया गया है. वहीं, मौजूदा मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के करीबी माने जाने वाले वेल्लापल्ली नतेशन को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है. वेल्लापल्ली नतेशन पर मुस्लिम समुदाय को लेकर लगातार भड़काऊ बयान देने के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में उनका चयन भी सवालों के घेरे में है. केरल से पी. नारायण और के.टी. थॉमस को भी पद्म विभूषण दिया गया है.

पद्म भूषण पाने वालों में झारखंड के वरिष्ठ आदिवासी नेता और राज्य के निर्माताओं में शामिल शिबू सोरेन का नाम भी है, जिन्हें मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया. हाल के महीनों में झारखंड की राजनीति में जेएमएम और भाजपा की संभावित नजदीकियों को लेकर चर्चाएं तेज़ थीं. यहां तक कहा गया था कि सरकार शिबू सोरेन को भारत रत्न दे सकती है, लेकिन अंततः उन्हें पद्म भूषण तक ही सीमित रखा गया. गौरतलब है कि केंद्र सरकार इससे पहले शरद पवार और मुलायम सिंह यादव जैसे कई विपक्षी नेताओं को पद्म विभूषण से सम्मानित कर चुकी है.

इसके अलावा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, प्रसिद्ध गायिका अलका याग्निक को पद्म भूषण देने की घोषणा की गई है. खेल जगत से पूर्व क्रिकेट कप्तान रोहित शर्मा, पैरा एथलीट प्रवीण कुमार, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सविता पूनिया को पद्मश्री दिया जाएगा.

इस साल के पद्म पुरस्कार विजेताओं में 19 महिलाएं शामिल हैं. वहीं छह विदेशी, प्रवासी भारतीय या भारतीय मूल के लोग भी सूची में हैं. कुल 16 हस्तियों को मरणोपरांत सम्मान दिया जा रहा है.

सवाल यह है कि क्या यह चयन पूरी तरह योग्यता के आधार पर है या फिर चुनावी गणित का असर भी इसमें शामिल है? जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, वहां से अपेक्षाकृत अधिक सम्मानित हस्तियों का चुना जाना इस बहस को और तेज़ करता है कि पद्म पुरस्कार अब सिर्फ राष्ट्रीय सम्मान भर रह गए हैं या धीरे-धीरे राजनीतिक संदेश देने का भी एक ज़रिया बनते जा रहे हैं.


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