धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मंदिर-सह-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रहे विवाद में MP हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की, जिसमें हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों को धार स्थित भोजशाला मंदिर-सह-कमल मौला मस्जिद परिसर का व्यक्तिगत निरीक्षण करने की अनुमति दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें दो न्यायाधीशों को व्यक्तिगत रूप से परिसर का निरीक्षण करने की अनुमति दी गई थी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़ी सभी आपत्तियों पर अब हाई कोर्ट ही सुनवाई करेगा.

सर्वे की वीडियोग्राफी पर उठा सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने एएसआई (ASI) द्वारा किए गए सर्वे की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने मांग की कि सर्वे के दौरान तैयार की गई पूरी वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरें सुप्रीम कोर्ट और संबंधित पक्षों को सौंपी जानी चाहिए. खुर्शीद का तर्क था कि बिना इन साक्ष्यों के गहन विश्लेषण के, सर्वे की रिपोर्ट पर प्रभावी ढंग से आपत्ति दर्ज करना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि साक्ष्यों की पारदर्शिता के बिना सर्वे की विश्वसनीयता संदिग्ध हो सकती है.

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सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने फिलहाल सर्वे रिपोर्ट या वीडियो की समीक्षा करने से साफ मना कर दिया है. जस्टिस की पीठ ने निर्देश दिया कि सर्वे सामग्री या प्रक्रिया से जुड़ी जितनी भी शिकायतें हैं, उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष ही उठाया जाना चाहिए. कोर्ट का मानना है कि मामला अभी हाई कोर्ट के विचाराधीन है, इसलिए वहीं पर आपत्तियां दर्ज करना उचित होगा.

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धार्मिक स्वरूप से छेड़छाड़ पर रोक जारी

राहत की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपना पिछला अंतरिम आदेश जारी रखा है. अदालत ने एक बार फिर दोहराया कि परिसर में ऐसा कोई भी उत्खनन नहीं किया जाएगा जिससे मूल ढांचे को नुकसान पहुंचे. बिना सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के परिसर के धार्मिक चरित्र में कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा. इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई होनी है.