What Is Bharatiya Nyaya Sanhita : साल 1860 की भारतीय दंड संहिता यानी IPC पिछले 150 साल से ज्यादा समय से भारत में आपराधिक कानून की आधारशिला रही है। अंग्रेजों के जमाने में तैयार की गई इस संहिता में समय के साथ कई संशोधन हुए, लेकिन अभी भी इसका मूल ढांचा और फिलॉसफी इसमें बरकरार है। जैसे-जैसे भारत ने तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक विकास की यात्रा तय की है, आईपीसी की लिमिटेशंस उसी रफ्तार से स्पष्ट हुई हैं। इसीलिए केंद्र सरकार भारतीय न्याय संहिता लेकर आई है। इसके तहत नए नियम 1 जुलाई से लागू हो जाएंगे। केंद्र सरकार के अनुसार समय के साथ व्यवस्था में भी सुधार होना चाहिए। इसीलिए आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता को लाया जा रहा है।
भारतीय न्याय संहिता में 356 धाराएं शामिल की गई हैं। जबकि आईपीसी में 511 धाराएं हैं। आईपीसी की कई धाराओं को हटा दिया गया है तो कई में संशोधन किए गए हैं। इसके अलावा कई नई धाराओं को भी जोड़ा गया है। इसमें सबसे अहम बदलावों में से एक है सजा के तौर पर समाज सेवा यानी कम्युनिटी सर्विस को जोड़ा जाना। यह कदम उठाए जाने के पीछे का कारण छोटे-मोटे अपराधों में लोगों को जेल न भेजने के लिए और जेल में कैदियों की संख्या कम करने की कोशिश बताया जा रहा है। इसके अलावा इससे लोगों में समाज को लेकर सकारात्मक भावना जन्म लेगी। इसीलिए समाज सेवा को सजा के तौर पर शामिल किया गया है। आगे जानिए किन अपराधों में दोषी के पास समाज सेवा कर राहत पाने का ऑप्शन होगा।
इन अपराधों में कम्युनिटी सर्विस की सजा
बता दें कि नई भारतीय न्याय संहिता की धारा 4(एफ) में सजा के तौर पर कम्युनिटी सर्विस का उल्लेख किया गया है। इसके तहत छोटे-मोटे अपराधों में दोषी पाए जाने वाले लोगों को जेल भेजने के स्थान पर समाज सेवा करने की सजा सुनाए जाने का विकल्प होगा। समाज सेवा की सजा आत्महत्या की कोशिश, सरकारी काम में बाधा डालना, नशे में बवाल करना और मानहानि जैसे अपराधों में दोषियों को समाज सेवा करने का आदेश जारी किया जा सकता है। इनमें एनजीओ के लिए काम, साफ-सफाई, कचरा उठाना जैसे काम शामिल होंगे। छोटी-मोटी चोरी में भी ऐसा ही होगा। अगर कोई व्यक्ति पहली बार चोरी करता पकड़ा जाता है और चोरी 5000 रुपये से कम की है तो उसे भी समाज सेवा करने की सजा सुनाई जा सकती है।
यदि जुर्माना नहीं भरा तो करनी होगी सेवा
नई व्यवस्था के अनुसार अगर किसी अपराध में जुर्माना या कम्युनिटी सर्विस की सजा का प्रावधान है तो जुर्माना अदा न करने पर समाज सेवा करनी होगी। उदाहरण के तौर पर अगर जुर्माना 5000 रुपये का है तो 2 महीने कम्युनिटी सर्विस करनी होगी। अगर जुर्माना 10,000 रुपये का है तो यह अवधि 4 महीने हो जाएगी। कुछ मामलों में एक साल की समाज सेवा का प्रावधान भी है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता में नकली नोट रखने को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया है। हालांकि, नकली नोट चलाने की कोशिश करते पकड़े जाने पर सजा और सख्त कर दी गई है। इसकी धारा 180 के अनुसार अगर कोई नकली नोट चलाने की कोशिश करता है तो दोषी पाए जाने पर 7 साल कारावास या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं।
संबंधित खबरें
कौन हैं एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित? जिन्हें बनाया गया भारतीय वायुसेना का चीफ
1 hr ago'चुनाव आयोग से मिलकर रहेंगे', आकाशवाणी भवन के पास धरने पर डटे राहुल गांधी
1 hr agoIMD Update: पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मौसम, दिल्ली-NCR में गिरेगा तापमान
1 hr agoहोर्मुज में कमर्शियल जहाज पर हुए हमले में 11 भारतीय घायल, MEA ने की निंदा
2 hrs agoउपचुनाव 2026: 4 राज्यों की 6 सीटों पर वोटिंग जारी, हुमायूं कबीर हिरासत में
3 hrs agoMSME कंपनियों के लिए 10 हजार करोड़ का फंड, कैबिनेट की बैठक में दो अहम फैसले
4 hrs ago'ज्ञानेश हमसे क्यों नहीं मिल रहे?' राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर उठाया सवाल
5 hrs agoCEC ज्ञानेश कुमार हो सकते हैं गिरफ्तार? केरलम केस में कितनी हो सकती सजा
7 hrs ago'CEC के इस्तीफे से कम में समझौता नहीं', सांसद राजीव शुक्ला का बड़ा बयान
7 hrs agoCEC के खिलाफ विपक्ष का मार्च, हिरासत में लिए गए राहुल-प्रियंका सहित कई नेता
8 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines