Bangladesh Violence: (अमर देव पासवान, आसनसोल) पश्चिम बंगाल में आसनसोल का चुरुलिया इलाका मशहूर है। इस इलाके में बांग्लादेश के राष्ट्रीय व विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम का जन्म स्थान है। पिछले कई महीनों से बांग्लादेश में फैली अशांति और हिंदू पुजारी चिन्मया कृष्णा दास की गिरफ्तारी के विरोध में अब विश्व विख्यात कवि काजी नजरुल इस्लाम का परिवार भी उतर गया है। न्यूज24 से बातचीत में नजरुल की नातिन सोनाली काजी ने कहा कि वे बांग्लादेश में बिगड़े हालातों की कड़ी निंदा करती हैं। दिल से वहां हो रही हिंसा के प्रति अपना दुख जाहिर करती हैं। इस तरह की घटना की कल्पना भी उन्होंने नहीं की थी।
सोनाली ने कहा कि राजनीति समाज के उत्थान और आम जनता की उन्नति और भलाई के लिए होनी चाहिए। जो सरकार जनता के लिए नहीं सोच रही, उसे सत्ता में रहने का हक नहीं है। भारत सरकार से भी उन्होंने कदम उठाने की मांग की। सोनाली ने कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ रिश्ते सुधारने चाहिए। अगर नजरुल जीवित होते तो वे बांग्लादेश में बिगड़े हालातों को कभी बर्दाश्त नहीं करते। अपने कंठों से निकले गीतों से हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों को समझाने का काम करते। कुछ लोग बांग्लादेश की हवा में बह रहे अमन और चैन को बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।
कोलकाता के लिए क्या बोलीं?
सोनाली ने कहा कि जो लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे बन चुके हैं। उनको सोचना चाहिए कि कवि नजरुल बांग्लादेश की मिट्टी में ही दफन हैं। उनकी आत्मा बांग्लादेश में बिगड़े हालातों को देख दुखी हो रही होगी। धर्म और राजनीति के नाम पर शांति की जगह हर तरफ अशांति फैलाना ठीक नहीं है। नजरुल ने बांग्लादेश को सोनार बांग्ला बनने का सपना देखा था। उन्होंने बांग्लादेश के एक रिटायर्ड मेजर को पागल करार दिया। सोनाली ने कहा कि जो लोग खुद के देश को अशांत कर चुके हैं, वे हमारे देश को अशांत करने के सपने देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे पहले अपना देश संभालें। अपने देश को शांत करें और रही बात कोलकाता को अशांत करने की तो ये सब भूल जाएं। यह शहर हमारा है, यहां बंगाली वास करते हैं।