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क्या ब्रिटेन के कहने पर जम्मू-कश्मीर से हटाई गई धारा 370? ब्रिटिश सांसद ने किया बड़ा दावा

जयपुर में कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में आयोजित हाई-टी कार्यक्रम में ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमेन ने जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा दावा किया है. ब्रिटिश सांसद ने कहा कि 1992 में ही उन्होंने धारा 370 हटाने की मांग की थी.

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Credit: Social Media

5 अगस्त 2019, ये वो तारीख है जब जम्मू-कश्मीर की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही थी. इसी दिन मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाए जाने का ऐलान किया था. आज इस बात को 6 साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है. इसी बीच ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमेन ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को लेकर बड़ा दावा किया है. राजस्थान के जयपुर में कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में आयोजित हाई-टी कार्यक्रम में बॉब ब्लैकमेन ने कहा कि उन्होंने धारा 370 हटाने की मांग तब नहीं थी कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपने घोषणापत्र में शामिल किया और लागू किया, बल्कि उन्होंने ये मांग 1992 में ही कर दी थी. उन्होंने कहा कि जब कश्मीरी पंडितों को जम्मू और कश्मीर से जबरन निकाला गया था, उसी वक्त एक विशाल सभा आयोजित की थी और लोगों से कहा था कि ये अन्याय है कि लोगों को सिर्फ उनके धर्म और बैकग्राउंड के कारण उनके पैतृक घरों से जबरन निकाला जा रहा है. बॉब ने कहा कि उन्होंने ना सिर्फ आतंकवाद की निंदा की है, बल्कि पाकिस्तान द्वारा जम्मू और कश्मीर की रियासत के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जे पर ऐतराज जताया है. ब्रिटिश सांसद का दावा है कि उन्होंने शुरू से ही कहा है कि जम्मू और कश्मीर की पूरी रियासत को भारत के ताज के तौर पर फिर से एकजुट किया जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान, 200 से ज्यादा J&K सरकारी कर्मचारी रडार पर

जम्मू-कश्मीर में क्या बदलाव आए?

5 अगस्त 2019 को धारा 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया गया और उसे पूरी तरह भारतीय संविधान के ढांचे में शामिल किया गया. तभी से जम्मू-कश्मीर में शासन, बुनियादी ढांचे और जनता की भागीदारी में खास बदलाव आया है. राजनीतिक बहस के बावजूद सरकार का ध्यान जनकल्याण, लोकतंत्र को मजबूत करने और आर्थिक विकास पर है. सबसे स्पष्ट परिवर्तनों में से एक लोकतंत्र में भागीदारी बढ़ी है. धारा 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर में विकास की रफ्तार तेज हुई. जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनावों में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने वोटिंग में हिस्सा लिया. 2020 में जिला विकास परिषद (DDC) चुनाव पहला अहम कदम था. परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2024 में विधानसभा चुनाव भी हुए. आतंकवादी घटनाओं में भी गिरावट आई.

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विकास की ओर बढ़ रहा है जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में साल 2025 में IIT जम्मू की शुरुआत हुई. साथ ही 2026 के आखिर में AIIMS अवंतीपोरा की भी शुरुआत होने जा रही है. ये दोनों ही जम्मू-कश्मीर में हो रहे विकास के गवाह हैं. घाटी के रिमोट इलाकों में रहने वाले बच्चों ने UPSC क्रेक किया और जॉब फेयर ने स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा दिया, जिनमें महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में 80 हजार करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट हुआ है, जिससे रोजगार और बिजनेस को बढ़ावा मिला.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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