5 घंटे इंतजार, 10 मिनट सुनवाई… आशुतोष रांका और सौरव दास को थी रिहाई की उम्मीद; पर नहीं मिली राहत

ashutosh ranka

Saurav Das | Ashutosh Ranka | Abhijeet Dipke

सौरव दास और आशुतोष रांका 14 अक्टूबर से जेल में हैं. (Credit-ANI)

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास 6 दिन से जेल में हैं और उनकी रिहाई के बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता. 13 अक्टूबर को दोनों को जंतर-मंतर का बंद गेट फांदने के आरोप में हिरासत में लिया गया था और फिर प्रिवेंटिव अरेस्ट करके मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. 14 अक्टूबर को उन्हें 5 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. जिसकी अवधि बीते दिन रविवार को पूरी हुई और मंदिर मार्ग थाने में दोनों की रिहाई की उम्मीद लेकर CJP नेता पहुंचे, लेकिन वे 5 घंटे तक इंतजार करते रहे और फिर 10 मिनट सुनवाई है, लेकिन आशुतोष रांका और सौरव दास को राहत नहीं मिली. इसलिए उन्हें अब भी जेल में रहना पड़ रहा है और CJP नेता रिहाई के लिए थाने के चक्कर काट रहे हैं.

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डेढ़ बजे थाने आए और 5 बजे की सुनवाई

आशुतोष और सौरव के मामले की सुनवाई कर रहे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने धमकियों और मानसिक उत्पीड़न का हवाला देते हुए दोनों को रिहा करने में रुचि नहीं दिखाई. CJP का कहना है कि मजिस्ट्रेट दोपहर 1:30 से 2 बजे के बीच पुलिस स्टेशन पहुंच गए, लेकिन सुनवाई उन्होंने शाम 5 बजे की. 15 अक्टूबर से बेल बांड और आवश्यक औपचारिकताओं को लेकर आपत्तियां जताई जा रही हैं, जबकि सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई थीं. लेकिन जमानती को कमजोर करार दिय गया. वहीं दिल्ली पुलिस ने हवाला दिया कि अभिजीत दीपके एक और विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं, ऐसे में हंगामा होने के मद्देनजर आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा नहीं किया जा सकता, लेकिन CJP ने पलटवार भी किया.

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11 अक्टूबर के बेल बॉन्ड का उल्लंघन हुआ

CJP प्रवक्ता ने कहा कि वे न किसी प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं और न ही सोशल मीडिया पर कोई जानकारी दी है. सौरव और आशुतोष को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर के बंद गेट फांदकर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. 14 अक्टूबर को SEM ने कहा कि उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए 11 अक्टूबर को दिए गए जमानत बांड का उल्लंघन किया है तो उन्हें 5 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. लेकिन बीते दिन ठोस जमानती न होने का हवाला देकर सुनवाई को 19 अक्टूबर के लिए टाल दिया गया. इस बीच SEM पुलिस अधिकारी महेश कुमार मीना को दोनों को न्यायिक हिरासत में रखने को लेकर धमकियां मिलीं, जिसके चलते उनका मानसिक उत्पीड़न हुआ और वे खतरा महसूस कर रहे हैं.

जानबूझकर रिहाई न देने का CJP का आरोप

CJP का आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी बार-बार अलग-अलग आधारों पर जमानत के आवेदन खारिज कर रहे हैं. फिक्स्ड डिपॉजिट पर बैंक की मुहर लगी होने के बावजूद वे इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं. उन्होंने बॉन्ड को यह कहकर खारिज कर दिया कि व्यक्ति का पता दिल्ली का नहीं है. एक बार जांच अधिकारी के ट्रैफिक में फंसने का बहाना बनाया तो दूसरी बार SHO थाने में लेट पहुंचे. पुलिस अधिकारी जानबूझकर हिरासत को लंबा खींचने का प्रयास कर रहे हैं. क्योंकि उनके पास उन्हें सलाखों के पीछे रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है. वहीं दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर रिहाई में देरी करने से इनकार किया और कहा कि वे फर्जी जमानत बांड दे रहे हैं और हम उन्हें स्वीकार नहीं कर सकते. हमें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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