IIT कानपुर के पूर्व निदेशक इंद्रनील मन्ना ने याद किया छात्र की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन का अनुभव, बताया कैसे तत्कालीन छात्र नेता आशुतोष रांका ने प्रशासन पर बनाया था दबाव. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका का छात्र आंदोलनों से जुड़ाव नया नहीं है. IIT कानपुर में पढ़ाई के दौरान भी वह छात्र राजनीति में सक्रिय थे. अब संस्थान के पूर्व निदेशक प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना ने करीब 2016-17 की एक घटना को याद किया है, जब एक छात्र की मौत के बाद परिसर में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था. मन्ना ने बताया कि उस समय रांका के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन ने संस्थान के प्रशासन पर काफी दबाव बनाया था. यह मामला ऐसे समय में फिर चर्चा में आया है, जब IIT बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन हुए हैं. साहिल की मौत से जुड़े घटनाक्रम और परीक्षा में कथित नकल के आरोपों की जांच को लेकर भी सवाल उठे हैं. IIT दिल्ली में एक अन्य छात्र की मौत ने भी उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की शिकायतों और उनकी देखभाल की व्यवस्था पर बहस तेज की है.
क्या था IIT कानपुर का पूरा मामला?
पूर्व निदेशक इंद्रनील मन्ना के मुताबिक, यह घटना उस समय की है, जब एक छात्र क्रिकेट मैदान से लौटने के बाद पीठ में दर्द की शिकायत लेकर संस्थान के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था. मन्ना के बताए घटनाक्रम के अनुसार, छात्र को दर्द की दवा देकर हॉस्टल वापस भेज दिया गया. बाद में उसकी तबीयत बिगड़ गई और स्वास्थ्य केंद्र लौटते समय उसकी मौत हो गई. मन्ना ने बताया कि घटना के समय वह दिल्ली में थे. उन्हें सूचना मिली कि करीब 2,000 छात्र संस्थान में विरोध कर रहे हैं. उनके मुताबिक, प्रदर्शन उस रात के अलावा अगले दिन और उसके बाद भी जारी रहा. उस समय IIT कानपुर के स्टूडेंट्स जिमखाना के अध्यक्ष आशुतोष रांका बड़ी संख्या में छात्रों के साथ निदेशक के कार्यालय पहुंचे थे. मन्ना ने कहा कि रांका ने उन्हें लगातार तीन दिन और तीन रात तक मुश्किल स्थिति में रखा.
जांच के बाद क्या हुआ?
मन्ना के अनुसार, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने घटना की जांच के लिए AIIMS के एक डॉक्टर की मार्गदर्शन में समिति बनाई थी. मन्ना ने बताया कि डॉक्टर ने छात्र की ECG रिपोर्ट में उसके बचने की संभावना का संकेत देखा और स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों की जांच करने के लिए सराहना की.मन्ना के मुताबिक, समिति की जांच के बाद करीब दस दिनों के भीतर रांका और लगभग दस अन्य छात्र उनके पास आए और माफी मांगी. यह पूरा घटनाक्रम पूर्व निदेशक के बयान पर आधारित है.
छात्र आंदोलन से निपटने के लिए क्या बोले पूर्व निदेशक?
मन्ना का कहना है कि शिक्षण संस्थानों को छात्रों की शिकायतें सुननी चाहिए, लेकिन विरोध के दबाव में हर मांग मान लेना जरूरी नहीं है. उनके मुताबिक, प्रशासन को छात्रों की परेशानी समझने और जांच के आधार पर फैसला लेने के बीच संतुलन बनाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान के प्रमुखों को उन शिक्षकों के साथ खड़ा होना चाहिए, जिनके काम को वह परिस्थितियों के आधार पर सही मानते हैं. हालांकि, किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना जरूरी है.
IIT कानपुर से सार्वजनिक जीवन तक आशुतोष रांका का सफर
आशुतोष रांका ने 2013 से 2017 के बीच IIT कानपुर में मटेरियल्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. मार्च 2016 से मार्च 2017 तक वह स्टूडेंट्स जिमखाना के अध्यक्ष रहे. वह संस्थान के ड्रामेटिक्स क्लब से भी जुड़े थे. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मुंबई में मैकिन्जी एंड कंपनी में कंसल्टेंट के रूप में काम किया. बाद में वह दिल्ली विधानसभा में एसोसिएट फेलो रहे और वैक्सीन से जुड़े वैश्विक संगठन Gavi के साथ भी काम किया. उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की. अगस्त 2025 में वह ग्लोबल हेल्थ विजन्स में सीनियर एसोसिएट के रूप में जुड़े. IIT कानपुर में छात्र नेता के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें संस्थान के प्रशासन और छात्रों के बीच सीधे संवाद का अनुभव दिया. पूर्व निदेशक की यादें उसी दौर की एक झलक पेश करती हैं.