कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रमुख अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने प्रिवेंटिव अरेस्ट में ले लिया है. अभिजीत के खिलाफ BNSS की धारा 126/170 के तहत कार्रवाई की गई है और उन्हें आज SEM अदालत में पेश किया जाएगा. वहीं AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक कार्रवाई करने के बाद रिहा कर दिया गया है. नेहा बोरा को देर रात ही उनके वकील से मिलने दिया गया और इसके बाद उनके साथ ही उन्हें भेजा दिया गया. नेहा बोरा अब अपने घर पहुंच गई हैं और अभिजीत दीपके अभी भी पुलिस हिरासत में ही हैं.
दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को मंडी हाउस से हिरासत में लिया था और अभिजीत दीपके को झंडेवालान इलाके से हिरासत में लिया गया था. दोनों के साथ करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया था. दोनों अपने समर्थकों के साथ तिरंगा मार्च के लिए कनॉट प्लेस की ओर जा रहे थे. पुलिस ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को सुचारू रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. तिरंगा मार्च से पहले कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करके चारों तरफ रैपिड एक्शन फोर्स और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे. वहीं सेंट्रल पार्क आज भी आम लोगों के लिए बंद है.
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को दिए थे 2 नोटिस
दिल्ली पुलिस के अनुसार, अभिजीत दीपके के नेतृत्व में CJP को तिरंगा मार्च निकालना था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें अनुमति नहीं दी थी. मार्च से पहले दीपके को 2 नोटिस देकर सेंट्रल पार्क जाने से मना किया गया था, लेकिन वह नहीं माने तो शांति भंग करने के आरोप में उन्हें हिरासत में लेकर प्रिवेंटिव अरेस्ट कर लिया गया. उन्हें स्पेशल एग्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा. मजिस्ट्रेट को बताया जाएगा कि अभिजीत दीपके ने पीस बॉन्ड और कोर्ट निर्देशों का उल्लंघन किया है. पिछली बार प्रिवेंटिव अरेस्ट के बाद उनसे 50000 का पीस बॉन्ड भरवाया गया था. एक साल तक शांति भंग नहीं करने का निर्देश दिया गया था. बाजवूद इसके वे सर्मथकों को लेकर तिरंगा मार्च निकालने के लिए चल पड़े
नेहा बोरा की हिरासत पर AISA ने सवाल उठाए
वहीं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के अनुसार, नेहा बोरा को आरके पुरम थाने में रखा गया था. वकीलों ने देर रात उनसे मुलाकात की. इससे पहले 5 घंटे तक उन्हें अलग-अलग थानों में घुमाते रहे. नेहा की तबियत खराब थी, लेकिन उन्हें दवाई नहीं दी गई. नेहा बोरा को दक्षिण-पश्चिम जिले की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने हिरासत में लिया था, लेकिन इसके बाद कई घंटों तक उनकी लोकेशन नहीं बताई गई. आधी रात को नेहा बोरा को वकीलों से मिलने दिया गया, जबकि महिला को गिरफ्तार करने या हिरासत में लेने के बाद या अन्य किसी काम से थाने आने वाली महिला को अंधेरा होने के बाद थाने में नहीं रखा जाता, बावजूद इसके नेहा बोरा को आधी रात तक थाने में रखा गया.
AISA ने सवाल पूछा है कि एक महिला को देर रात थाने में रखने की जरूरत क्यों पड़ी? नेहा की तबियत पिछले कई दिन से खराब थी और बताने के बावजूद उन्हें दवाई नहीं दी गई. नेहा के साथ वैन में सादे कपड़ों में 2 शख्स थे, आखिर वे कौन थे? नेहा की सुरक्षा को खतरा हो सकता था. AISA के पूर्व अध्यक्ष और CPI(ML) लिबरेशन के नेता एन साई बालाजी ने भी नेहा बोरा की हिरासत और तरीके को लेकर सवाल उठाया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि नेहा बोरा को सादे कपड़ों में आए लोगों ने हिरासत में क्यों लिया? नेहा की लास्ट लोकेशन मंगलापुरी स्थित एंटी-नारकोटिक्स सेल थी. लेकिन जब उनके समर्थका वहां पहुंचे तो वे वहां नहीं थी, बल्कि दूसरी जगह भेज दिया गया, ऐसा क्यों किया गया?
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