Yagya Chikitsa: यज्ञ चिकित्सा प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जिसे आधुनिक विज्ञान में यज्ञोपैथी (Yagyopathy) कहा जाता है. यज्ञ चिकित्सा में विशिष्ट औषधीय जड़ी-बूटियों को हवन सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और इनसे निकला धुआं शरीर तक जाता है जिसे इन्हेलेशन थेरैपी कहते हैं. इस धुएं में सांस लेने भर से ही एक नहीं बल्कि कई समस्याएं दूर हो जाती हैं. पतंजलि संस्थान खासतौर से यज्ञ चिकित्सा पर काम कर रहा है और अनेक परेशानियों से दोचार हो रहे लोगों को यज्ञ चिकित्सा का लाभ लेने में मदद कर रहा है. लेकिन, क्या यज्ञ चिकित्सा या कहें हर्बल धुएं से माइग्रेन (Migraine) ठीक हो सकता है? आइए जानते हैं क्या कहता है शोध और किस तरह हर्बल धुआं माइग्रेन पर प्रभाव डालता है.
क्या माइग्रेन को ठीक कर सकता है हर्बल धुआं
पतंजलि की यज्ञ दर्शन वेबसाइट पर साल 2019 में हुए शोध का जिक्र किया गया है. साल 2019 में बांद्रा और अन्य कुछ रिसर्चर्स ने माइग्रेन पर श्रीलंकाई स्वदेशी हर्बल धूम्र की प्रभावशीलता पर रिसर्च की. ICHD के अनुसार, रोगियों को रैंडमली A और बी ग्रूप में बांटा गया. 14 दिनों के लिए ग्रूप A को दिन में 2 बार हर्बल धुआं दिया गया या कहें हर्बल धुएं से उपचार किया गया. वहीं, ग्रूप B को 14 दिनों के लिए माइग्रेन की QR टैबलेट दी गई.
2 महीने में ग्रूप A और B के बीच तुलना की गई और पाया गया कि ग्रूप A में ग्रूप B की तुलना में माइग्रेन के दर्द और दर्द होने की फ्रीक्वेंसी में कमी देखी गई. ऐसे में इस स्टडी में पाया गया कि श्रीलंकाई स्वदेशी हर्बल धुआं माइग्रेन में प्रभावी है.
माइग्रेन पर कैसे असर दिखाता है हर्बल धुआं
नैनो पार्टिकल्स – यज्ञ चिकित्सा में यज्ञ की आग में जड़ी-बूटियां जलकर अत्यतं सूक्ष्म कणों में बदल जाती हैं. ये तत्व फेफड़ों में पहुंचकर तुरंत ब्लड में मिल जाते हैं.
पल्मोनरी ड्रग डिलीवरी – यज्ञ का धुआं शरीर के अंदर आयुर्वेदिक औषधियों को पहुंचाने का प्राकृतिक और तेज जरिया बनता है. इसके बाद यही औषधियां पाचन तंत्र से गुजरने के बजाय सीधा प्रभावित अंगों तक पहुंचता है.
प्रभावी हवन सामग्री – रोग के अनुसार अलग-अलग जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. माइग्रेन के अनुसार सामग्री चुनने पर धुआं सीधा माइग्रेन पर प्रभावी होता है.
मंत्रोच्चार – यज्ञ चिकित्सा में यज्ञ के दौरान मंत्रोच्चार होता है. मंत्रोच्चार के दौरान मंत्रों की ध्वनि तरंगे मानसिक तनाव को कम करने में मदद करती हैं. इससे एकाग्रता भी बढ़ती है और यह सिरदर्द कम करने में भी कारगर होता है.
यज्ञ की भस्म का भी होता है इस्तेमाल
यज्ञ चिकित्सा में ना सिर्फ यज्ञ से निकला धुआं बल्कि यज्ञ जलकर ठंडा होने पर उससे निकली राख भी औषधि के रूप में इस्तेमाल की जाती है. पतंजलि संस्थान के अनुसार, यज्ञ भेष भस्म एक बहुमूल्य औषधि का कार्य करती है. इसीलिए इस भस्म से तिलक लगाने की परंपरा है.
भस्म में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल समेत कई गुण होते हैं जो त्वचा के कील, मुहांसों से लेकर घाव तक पर असर दिखाते हैं और उन्हें कम करने का काम करते हैं. आयुर्वेद में इस भस्म के सेवन के बारे में भी बताया जाता है. पतंजलि के अनुसार, भस्म को छानकर, 2 से 5 ग्राम लेकर कपड़े की पोटली बनाकर 1 लीटर पानी में डालकर 8 घंटे रखने के बाद पिया जा सकता है. इस पानी में सोंठ भी डाल सकते हैं. यह पानी सेहत के लिए लाभकारी बताया जाता है.
यह भी पढ़ें- मिट्टी की जांच समेत 10 से ज्यादा फीचर्स से लैस है ‘धरती का डॉक्टर’, किसानों को मिलेंगी ये सुविधाएं
संबंधित खबरें
हार्ट अटैक में एक-एक सेकंड है कीमती, डॉक्टर ने बताया कैसे बचाएं जान
16 hrs agoसीने में सुई चुभने जैसा दर्द क्यों होता है? समझें प्लूरिटिक पेन के कारण
21 hrs agoधन्वंतरि धाम में हर साल होगा हर्बल कुंभ, लोगों को मिलेंगी ये सुविधाएं
21 hrs agoकम उम्र में क्यों हो रहा है कैंसर? कहीं ये आदतें तो नहीं जिम्मेदार
1 day agoकाला मोतिया होने का क्या कारण है? AIIMS के नेत्र रोग विशेषज्ञ से जानिए
1 day agoसुबह उठते ही मुंह कड़वा होने की क्या है वजह? रिसर्च में बताया
1 day agoफेफड़ों के मरीजों के लिए जानलेवा हो सकती है प्रदूषित हवा, जरूर करें ये काम
1 day agoशरीर में फंसी हुई गैस को कैसे निकालें? बाबा रामदेव ने बताया नुस्खा
2 days agoहड्डियां ही नहीं, शरीर के कई हिस्सों को चुपचाप नुकसान पहुंचाती है Vitamin D
2 days agoमिलेट्स क्या होते हैं और क्यों खाने चाहिए? FSSAI से जानिए Millets के फायदे
2 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines