World Bicycle Day 2025: साइकिल सिर्फ मौज-मस्ती का केंद्र नहीं है। अक्सर जब हम छोटे होते हैं, तो अपने माता-पिता से साइकिल की जिद करते हैं क्योंकि इसकी मदद से हम यहां-वहां अपने दोस्तों के साथ घूम सकते हैं। साइकिल पुराने जमाने में इस्तेमाल किया जाने वाला एक ऐसा साधन था, जिसे लोग दूर जाने के लिए इस्तेमाल करते थे। हालांकि, साइकिल आज भी मौजूद है मगर आधुनिक जीवनशैली में धीमी गति से चलने वाली साइकिल की डिमांड थोड़ी कम हो गई है।
साइकिल सिर्फ यात्रा करने के काम आने वाला साधन तक सीमित नहीं है। दो पहियों वाली यह गाड़ी आपको अनेकों बीमारियों से बचाने में भी मदद करती है। जी हां, बीपी, हार्ट हेल्थ से लेकर स्ट्रेस कम करने के लिए भी साइकलिंग बेस्ट ऑपशन है, जिसे हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर सकते हैं।
वर्ल्ड बाइसाइकिल डे थीम
हर साल 3 जून को वर्ल्ड बाइसाइकिल डे सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिवस को प्रदूषण मुक्त वातावरण को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। मगर साइकिल डे का महत्व हमारे स्वास्थ्य से भी है। इस साल इस दिन की थीम साइकिलिंग के जरिए स्वास्थ्य, समानता और स्थिरता को बढ़ावा देना है।
साइकिल चलाएं, 5 बीमारियां दूर भगाएं
1. हृदय रोग
नियमित रूप से साइकिलिंग करने से दिल की धड़कनों की गतिविधि नियमित रहती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है और दिल की धमनियों को साफ रखने में भी मदद करता है। रोजाना साइकिल चलाने से हार्ट हेल्थ में सुधार होता है और दिल की बीमारियों का खतरा 40-50 % तक कम किया जा सकता है।
ये भी पढ़ें- Covid-19 Alert: सर्दी-खांसी होते ही तुरंत कोरोना टेस्ट के लिए न भागे, कोविड ऑफिसर की लोगों को राय
2. मोटापा
मोटापा या ओबेसिटी भारत में फैलने वाली एक नई महामारी है। पीएम मोदी भी इस बीमारी के भारत में बढ़ने को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। खासतौर पर बच्चों में ओबेसिटी की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में अगर आप रोजाना सिर्फ आधे से 1 घंटे की साइकिलिंग करते हैं, तो शरीर में जमा चर्बी तेजी से घटती है। यह मेटाबॉलिज्म को भी तेज करता है और फैट बर्न करने में मदद करता है।
3. डायबिटीज (Type 2 Diabetes)
साइकिलिंग करने से मांसपेशियों में इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ती है। यह बीमारी भी लोगों में काफी बढ़ने लगी है। मधुमेह या शुगर भी एक लाइफस्टाइल डिजीज है, जो न सिर्फ एक कारण बल्कि कई अनहेल्दी लाइफस्टाइल हैबिट्स की वजह से होती है। ओबेसिटी और शारीरिक गतिविधियों की कमी से भी यह होता है। डेली साइकिलिंग करने से ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है और टाइप-2 डायबिटीज से बचाव किया जा सकता है।
4. हाई बीपी
साइकिल चलाने से तनाव कम होता है, दिल की धड़कन सामान्य होती है। इससे बीपी की समस्या में भी सुधार होता है। ब्लड प्रेशर हाई होना भी लाइफस्टाइल से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम है। इससे आपको हार्ट अटैक की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। गर्मियों में हाई बीपी और भी ज्यादा मुश्किलें पैदा कर सकता है। इसलिए, रोज साइकिल चलाएं।
5. डिप्रेशन और स्ट्रेस
साइकिलिंग एंडोर्फिन (हैप्पी हार्मोन्स) का स्तर बढ़ाती है, जिससे मूड अच्छा रहता है। रोजाना साइकलिंग करने से यह डिप्रेशन, एंग्जायटी और अकेलेपन से लड़ने में मदद करता है। मेंटल हेल्थ को बूस्ट करने के लिए और फोकस को बढ़ाने के लिए भी नियमित तौर पर साइकिल चलानी चाहिए।
ये भी पढे़ें- Covid Alert: कोरोना का बड़ा साइड इफेक्ट आया सामने, लोगों को सुनने में होगी परेशानी!
Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले विशेषज्ञों से राय अवश्य लें। News24 की ओर से जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।
संबंधित खबरें
महीनों से बैठी आवाज को जुकाम समझना पड़ सकता है भारी! हो सकता है कैंसर
11 hrs agoरातभर फोन देखने की आदत, तबाह कर देगी आपकी सेहत
12 hrs agoसर्दियों में मां बनने वाली हैं? डॉक्टर ने बताया कैसे रखें खुद का ख्याल
13 hrs agoधड़ एक, सिर दो… जानें कब पैदा होते हैं ऐसे बच्चे? क्या कहती है रिसर्च
15 hrs agoस्मोकिंग नहीं करते, फिर भी हो सकता है Lung Cancer! इन खतरों से रहें सावधान
1 day ago2 दिन से पेट साफ नहीं हुआ? कहीं कैंसर का ये लक्षण तो नहीं
1 day agoव्रत रखते ही होने लगती है गैस और ब्लोटिंग? अपनाएं ये आसान टिप्स
1 day agoक्या एसिडिटी से हो सकता है कैंसर? डॉक्टर ने बताया खट्टी डकार आने का कारण
1 day agoBP अचानक 150 के पार जाते ही होने लगती है घबराहट? इन बातों का रखें खास ध्यान
2 days agoएक ही महीने में 2 बार पीरियड्स क्यों होते हैं, किसी बीमारी का लक्षण तो नहीं
2 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines