अचार रखने में की गई यह गलती बन सकती है कैंसर की वजह, डॉक्टर ने कहा ऐसे करें Pickles स्टोर

Achar And Cancer: अचार को बेहद स्वाद लेकर और चटखारे लगाते हुए खाया जाता है, लेकिन यह सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है और इससे कैंसर का रिस्क भी है. यहां जानिए डॉक्टर का इसपर क्या कहना है.

Achar Cancer

Pickles Cause Cancer: अचार से किस तरह हो सकता है कैंसर यह बता रहे हैं डॉक्टर. Image Credit -AI

Foods That Increase Cancer Risk: भारतीय घरों में अचार खूब खाया जाता है. अचार (Achar) तेल और मसालों को मिलाकर बनाया जाता है. यह स्वाद में अच्छा लगता है और अक्सर फीकी दाल के टेस्ट को कई गुना तक बढ़ा देता है. लेकिन, अचार सेहत के लिए बुरा हो सकता है. अचार (Pickles) में सोडियम ज्यादा होता है और फर्मेंटेशन के कारण इसमें कार्सिनॉजेनिक कंपाउंड्स बन सकते हैं. वहीं, कैंसर हीलर सेंटर के डॉ. तरंग कृष्ण का कहना है कि अचार को अगर सही तरह से स्टोर करके ना रखा जाए तो इससे कैंसर हो सकता है.

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क्या अचार से हो सकता है कैंसर

डॉ. तरंग कृष्ण ने बताया, आचार बनाकर अगर उसे प्लास्टिक के डिब्बे में रखा जाए तो इससे कैंसर का खतरा (Cancer Risk) बढ़ता है. आपने अपनी दादी-नानी को तो देखा ही होगा. वे उस अचार को रखने के लिए बड़े चीनी-मिट्टी के बर्तनों या फिर कांच के डिब्बों में रखती थीं. अचार में नमक, तेल और मसाले की ज्यादा मात्रा होती है. जब ये सारे इंग्रीडिएंट्स प्लास्टिक के संपर्क में आते हैं तो प्लास्टिक कुछ हानिकारक केमिकल्स जैसे BPA और PHTHALATES रिलीज करती है. ये केमिकल्स एंडोक्राइन डिसरप्टर्स होते हैं जो आपके हार्मोंस को बिगाड़ते हैं. लॉन्ग टर्म में यह कैंसर की वजह बन सकता है.

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प्लास्टिक से निकले टॉक्सिंस अचार में मिल जाते हैं. डॉक्टर का कहना है कि यह ना सोचें कि ये अचार को बनाकर किसी भी डिब्बे में रख सकते हैं और कोई खास फर्क नहीं पड़ता. प्लास्टिक में रखा गया अचार कैंसर का कारण बन सकता है.

किस डिब्बे में स्टोर करें अचार

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अचार स्टोर करके रखने को लेकर डॉक्टर की सलाह है कि अचार को कांच और सेरामिक के डिब्बे में ही स्टोर करके रखना चाहिए. बिल्कुल वैसे सेरेमिक के जार चुनने चाहिए जैसे आपकी दादी-नानी चुना करती थीं. इससे अचार का स्वाद तो अच्छा आएगा ही आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी.

ये भी हो सकते हैं नुकसान

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अगर अचार को जरूरत से ज्यादा खाया जाए तो इससे गैस्ट्रिक कैंसर (Gastric Cancer) होने का रिस्क 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. साउथ कोरिया में किमची और पिकल्ड वेजीटेबल्स ज्यादा खाए जाते हैं इसीलिए इस देश से गैस्ट्रिक कैंसर के मामले सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं. ऐसे में पेट की सेहत और शरीर की ओवरऑल सेहत अच्छी रहे इसके लिए अचार का सेवन कम किया जाना चाहिए और जैसाकि डॉक्टर का कहना है, अचार को रखने के लिए सही कंटेनर का इस्तेमाल करना चाहिए.

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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