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कैसे पता चलेगा अर्थराइटिस हो गया है? AIIMS से जानिए लक्षण, इसके प्रकार और दर्द कम करने का तरीका

Arthritis Ke Lakshan: अर्थराइटिस यानी गठिया में शरीर के अलग-अलग जोड़ों की हड्डियां प्रभावित होती हैं और आमतौर पर यह घुटनों में ज्यादा होता है. AIIMS से जानिए अर्थराइटिस क्या है और यह किन लोगों को प्रभावित करता है.

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कैसे महसूस होते हैं अर्थराइटिस के लक्षण, जानिए यहां. Image Credits - Pexels

Arthritis Symptoms: अक्सर लोग लंबे समय तक जोड़ों में दर्द की शिकायत से दो-चार होते हैं लेकिन इसका कारण समझ नहीं पाते और इसे बढ़ती उम्र की दिक्कत समझ लेते हैं जबकि यह अर्थराइटिस के चलते भी हो सकता है. अर्थराइटिस शरीर की किसी भी हड्डी के किसी भी जोड़ को प्रभावित कर सकता है लेकिन ज्यादातर घुटनों और हाथों की हड्डियों में होता है. ऐसे में AIIMS से जानिए कि अर्थराइटिस क्या है, इसके साधारण प्रकार कौन से हैं और इसके लक्षण (Gathiya Ke Lakshan) कैसे नजर आते हैं. समय रहते अर्थराइटिस की पहचान हो जाए तो बेहतर इलाज लिया जा सकता है और हड्डियों को ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सकता है.

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अर्थराइटिस क्या है

अर्थराइटिस शरीर के एक या उससे ज्यादा जोड़ों की इंफ्लेमेशन और डिजनरेशन है जिसमें सूजन, दर्द और अकड़न होती है और गतिशीलता कम हो जाती है. यह कार्टिलेज के घिसने और टूटने, ओटोइम्यून कंडीशंस या जोड़ों में क्रिस्टल्स के जमने से भी ऐसा होता है.

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अर्थराइटिस के साधारण प्रकार कौन से हैं –

रुमोटॉइड अर्थराइटिस – ओटोइम्यून जॉइंट इंफ्लेमेशन से होता है
गाउट – जोड़ों में यूरिक एसिड बिल्ड-अप के कारण होता है
जुवेनाइल अर्थराइटिस – 16 साल से कम बच्चों में इंफ्लेमेटरी, रुमेटिक डिजीज होती है
सोरायटिक अर्थराइटिस – सोराइसिस के कारण होने वाले ओटोइम्यून डिजीज को सोरायटिक अर्थराइटिस कहते हैं
एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस – इससे रीढ़ और उससे जुड़ी हड्डियों पर असर पड़ता है.

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आर्थराइटिस के क्या लक्षण होते हैं

  • अर्थराइटिस में जोड़ों में दर्द होने लगता है
  • जोड़ों के आस-पास की त्वचा लाल हो जाती है
  • हाथ-पैरों में गर्माहट या जलन महसूस होती है
  • जोड़े सूजने लगते हैं.

अर्थराइटिस के दर्द को कैसे कर सकते हैं मैनेज

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अर्थराइटिस का जितना जल्दी पता लगा लिया जाए और जितनी जल्दी ट्रीटमेंट करवा लिया जाए उतना अच्छा होता है. लो इंपैक्ट फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए जैसे हफ्ते में कम से कम 150 मिनट वॉक करना, इसके अलावा योग करना. हेल्दी डाइट लेना, नॉर्मल बॉडी वेट बनाए रखना और ओरल पिल्स या टैबलेट लेना, जेल और क्रीम लगाना फायदेमंद साबित होता है.

अर्थराइटिस होने का खतरा किन लोगों में ज्यादा होता है

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  • बढ़ती उम्र के वयस्कों में
  • जिन लोगों के परिवार में किसी को अर्थराइटिस रहा हो
  • वे लोग जो ओवरवेट हों या फिर जो मोटापे से परेशान हैं
  • वे लोग जिन्हें किसी तरह की जॉइंट इंजरी या कोई इंफेक्शन हो
  • स्मोक करने वाले लोग जिनके लिए फिजिकली एक्टिव रहना मुश्किल हो
  • फिजिकली डिमांडिंग जॉब जिसमें हैवी लिफ्टिंग, घुटने टिकाने या चढ़ाई करने जैसे काम शामिल हों.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - AIIMS

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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