हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

मलाशय का कैंसर होने के क्या लक्षण हैं? कैंसर सर्जन ने बताया Rectal Cancer का कैसे होता है इलाज

Rectal Cancer Symptoms: रेक्टल कैंसर क्या होता है और इसके लक्षण पहचानने के बाद किस तरह का ट्रीटमेंट करवाया जाता है यह बता रहे हैं कैंसर सर्जन डॉ. प्रवीण कामर. जानिए मलाशय के कैंसर से जुड़ी कुछ जरूरी बातें.

विज्ञापन
Rectal Cancer Treatment: रेक्टल कैंसर कब होता है?

Rectal Cancer: रेक्टम या मलाशय आंतों का आखिरी हिस्सा है. यह शरीर का वह अंग है जहां मल स्टोर भी होता है और जहां से मल बाहर भी निकलता है. मलाशय यानी रेक्टम (Rectum) में होने वाले कैंसर को रेक्टल कैंसर कहते हैं. इस कैंसर में मलाशय से खून बहने लगता है, दर्द होता है और मलत्याग करने से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं. अगर किसी व्यक्ति को रैक्टल कैंसर हो जाता है तो कैंसर वाले ट्यूमर (Tumor) हटाने की सर्जरी से इस कैंसर से बचा जा सकता है. यहां जानिए रैक्टल कैंसर के वॉर्निंग साइन क्या हैं या यह कैंसर होने पर शरीर पर कैसे लक्षण नजर आते हैं. साथ ही जानिए मलाशय के कैंसर का क्या इलाज है या कौन सी सर्जरी इस कैंसर से बचने के लिए करवाई जाती है.

मलाशय के कैंसर के लक्षण | Rectal Cancer Symptoms

  • मलाशय का कैंसर होने पर शरीर में कई तरह के बदलाव नजर आ सकते हैं. इस कैंसर में मलाशय से खून बहने लगता है.
  • दस्त लग जाते हैं.
  • कब्ज की दिक्कत हो सकती है.
  • मलत्याग करने का पैटर्न बदल सकता है.
  • मल पेंसिल की तरह पतला आ सकता है.
  • हर समय शरीर में थकान रहने लगती है.
  • शरीर में कमजोरी आ जाती है.
  • पेट में और पेट के निचले हिस्से में दर्द रहने लगता है.
  • अचानक से वजन कम होने लगता है.

मलाशय के कैंसर का ट्रीटमेंट (Rectal Cancer Treatment)

गाइनेक, स्टमक और कोलोन कैंसर सर्जन डॉ. प्रवीण कामर ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि रेक्टम 12 से 15 सेंटीमीटर लंबा अंग है जो तीन हिस्सों में बंटा होता है – अपर पार्ट, मिडल पार्ट और लोअर रेक्टम. कैंसर जिस हिस्से में होता है सर्जरी उसी पर निर्भर करती है. लोअर रैक्टम एक्सटर्नल स्फिंस्टर मसल्स से कनेक्टेड होती है जोकि बाउल मूवमेंट्स को कंट्रोल करती है. इसीलिए यह सर्जरी आमतौर पर ज्यादा मुश्किल होती है और सर्जरी में इन मसल्स को बचाना जरूरी होता है.

विज्ञापन

एंटीरियर रिसेक्शन – अपर रेक्टम यानी रेक्टम के ऊपरी हिस्से में होने वाले कैंसर में एंटीरियर रिसेक्शन सर्जरी होती है. इसमें कैंसर वाले हिस्से को हटाया जाता है और कोशिश की जाती है कि आस-पास की मसल्स पर असर ना पड़े. इसमें डीप पेल्विक सर्जरी नहीं होती है और स्फिंस्टर कंट्रोल को प्रीजर्व कर लिया जाता है.

लो एंटीरियर रिसेक्शन – मिडल रेक्टम में ट्यूमर हो तो पेल्विस में थोड़ा डीप जाकर सर्जरी करनी पड़ती है. इसमें क्रिटिकल एरियाज में सर्जरी होती है. अगर सर्जरी से पहले कीमोथेरैपी या रेडिएशन हुआ है तो डाइवर्जन स्टोमा की जरूरत होती है ताकि हीलिंग सपोर्ट मिल सके. स्टोमा यानी एक हिस्सा खुला रखा जाता है जिससे मल शरीर से बाहर निकल सके.

विज्ञापन

एक्सटेंडेड या अल्ट्रा लो एंटीरियर रिसेक्शन – इस सर्जरी में एक्सटर्नल स्फिंक्सटर के पास मौजूद ट्यूमर को हटाने की कोशिश की जाती है. इसमें परमानेंट स्टोमा के रिस्क को बचाते हुए स्फिंस्टर को बचाने की कोशिश की जाती है.

एब्डोमिनोपेरिनियल रिसेक्शन – अगर कैंसर ट्यूमर स्फिंस्टर मसल्स में फैल जाता है तो स्फिंस्टर मसल्स को बचाना मुश्किल होता है. इसमें परमानेंट स्टोमा होता है यानी पूरे रेक्टम और स्फिंस्टर मसल्स को हटा दिया जाता है. यह जिंदगी को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली सर्जरी है इसीलिए इस सर्जरी को तब ही किया जाता है जब इसकी बहुत ज्यादा जरूरत होती है.

विज्ञापन

किन लोगों को मलाशय के कैंसर का खतरा रहता है

  • जिन लोगों की डाइट खराब है.
  • मोटापा इस कैंसर की वजह बन सकता है.
  • जो लोग एक्टिव नहीं रहते और किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते.
  • स्मोकिंग या एल्कोहल का सेवन.
  • रेक्टल कैंसर का रिस्क 50 साल की उम्र के बाद ज्यादा देखा जाता है.
  • परिवार में अगर किसी को कैंसर हुआ हो.
  • जेनेटिक्स के चलते भी यह कैंसर हो सकता है.

यह भी पढ़ें – पेट के कैंसर की पहली स्टेज में शरीर देने लगता है ये 5 संकेत, समय रहते पहचानें इस तरह

विज्ञापन

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola