हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

कैंसर, फर्टिलिटी समेत इन रेयर डिजीज की दवाओं को मिली US टैरिफ से छूट, भारत को क्या होगा फायदा?

100 परसेंट अमेरिकी टैरिफ के दायरे में कई फार्मास्युटिकल इम्पोर्ट्स हैं, लेकिन कैंसर, रेयर डिजीज और फर्टिलिटी की दवाओं को इस दायरे से बाहर रखते हुए छूट दी गई है. इसस भारत को क्या फायदा होगा, आइए जानने की कोशिश करते हैं.

विज्ञापन
दवाएं (Photo-PTI)

Specialty Drugs Exempt From New US Tariff: अमेरिका कुछ पेटेंट फार्मास्युटिकल इम्पोर्ट्स पर 100 फीसदी टैरिफ लगा रहा है, लेकिन कई हाइली स्पेशलाइज्ड मेडिसिन को न्यू लेवी से बाहर रखा जाएगा. छूट में रेयर डिजीज, कैंसर, इनफर्टिलिटी और दूसरे क्रिटिकल मेडिकल जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं शामिल हैं.

भारत के लिए भी नियम लागू

भारत उन 20 ज्यूरिडिक्शंस में से एक है, जिनके एलिजिबल स्पेशियलिटी फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स और उससे जुड़े इंग्रेडिएंट्स नए ढांचे के तहत जीरो परसेंट टैरिफ के साथ अमेरिका में एंट्री कर सकती हैं. ये रूल इफेक्टिव हो गए हैं क्योंकि वाशिंगटन 29 सितंबर को अपनी फार्मास्युटिकल टैरिफ पॉलिसी को लागू करना शुरू कर रहा है.

यह भी पढ़ें- रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है US, लिस्ट में चार और देश

विज्ञापन

कौन सी दवाइयों पर छूट है?

टैरिफ सभी दवाओं पर लागू नहीं होता. जेनेरिक फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स और उनसे जुड़ी सामग्रियां धारा 232 फार्मास्युटिकल टैरिफ के बाहर हैं. नई ड्यूटीज खास तौर से स्पेसिफाइड पेटेंट दवाओं औरइंग्रेडिएंट्स पर फोकस्ड हैं.

1 ऑर्फेन ड्रग्स: वो दवाइयां जिनका अप्रूव्ड यूजेज अमेरिकी ऑर्फेन ड्रग्स एक्ट के तहत रेयर डिजीज के लिए डेजिग्नेटेड है, छूट के दायरे में आती हैं.

विज्ञापन

2 न्यूक्लियर मेडिसिन: कैंसर से जुड़े इस्तेमाल सहित मेडिकल डायग्नोसिस या ट्रीटमेंट के लिए रेडियोएक्टिव मैटेरियल वाले क्वालिफाइंग प्रोडक्ट्स भी शामिल हैं

3 प्लाज्मा-डेराइव्ड थेरेपी: ह्यूमन ब्लड प्लाज्मा के कंपोनेंट्स का इस्तेमाल करके तैयार होने वाली दवाएं, जिनमें इम्यून डेफिशिएंसी और ब्लीडिंग डिसऑर्डर के इलाज शामिल हैं, उन्हें टैरिफ से राहत मिलेगी.

विज्ञापन

4 फर्टिलिटी मेडिसिन: फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं को खास तौर से टैरिफ रिलीफ वाले प्रोडक्ट्स में शामिल किया गया है.

5 सेल थेरेपी: इस कैटेगरी में सेल्युलर इम्यूनोथैरेपी, सेल्युलर कैंसर वैक्सीन और कुछ स्टेम-सेल-बेस्ड ट्रीटमेंट शामिल हैं.

विज्ञापन

6 जीन थेरेपी: थेरप्यूटिक जरूरतों के लिए जीन एक्सप्रेशन को मोडिफाई करने या लिविंग सेल को बदलने के लिए डिजाइन किए गए ट्रीटमेंट भी शामिल हैं.

7 एंटीबॉडी ड्रग कॉन्गुलेट: ये टारगेटेड मेडिसिन मोलेक्युल्स के साथ एंटीबॉडी को जोड़ती हैं और ज्यादातर खास कैंसर ट्रीटमेंट में काम आती हैं.

विज्ञापन

8 सीबीआरएन मेडिकल काउंटरमेजर्स: केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल या न्यूक्लियर खतरों से जुड़े कंडीशंस को रोकने, डायग्नोसिस या इलाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ प्रोडक्ट्स को छूट दी गई है.

9 एनिमल हेल्थ मेडिसिन: वेटेनरी फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स को भी इस फ्रेमवर्क के तहत टैरिफ से छूट मिलती है.

विज्ञापन

भारत के लिए इसका फायदा

ये टैरिफ रिलीफ इंडियन फार्मास्युटिकल एक्सपोटर्स को एक बड़ी छूट के बजाय एक टारगेटेड रिलीफ देती है. प्रोडक्ट को प्रेसक्राइब्ड कैटेगरी और एलिजिबिलिटी की जरूरतों को पूरा करना होगा. इस लिस्ट में भारत को शामिल करने का मतलब है कि स्पेशियलिटी मेडिसिन और उनके इंग्रेडिएंट्स नए 100 परसेंट ड्यूटी से बच सकते हैं और उन कंपनियों पर खर्च का एक्सट्रा प्रेशर नहीं पड़ेगा. इस बीच जेनेरिक दवाएं जो अमेरिका को भारत के फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट की एक अहम कंपोनेंट हैं, वो सेक्शन 232 फार्मास्युटिकल टैरिफ के बाहर बनी हुई हैं.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola