दिल्ली में गुलाबी ठंड के साथ क्यों छाने लगता है आलस? जानिए क्या है 'Seasonal Blues' और इससे निपटने के तरीके
क्या सर्दियां शुरू होते ही आपको भी सुस्ती और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है? NHS से जानिए क्या है Seasonal Blues, जो मौसम के बदलते ही आपको परेशान करने लगती है.
सर्दियां शुरू होते ही आलस बढ़ना. (Image: AI/Pexels)
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दिल्ली में मौसम बदलने के साथ जब गुलाबी ठंड दस्तक देती है, तो कई लोगों को ज्यादा नींद आने, थकान महसूस होने और रोजमर्रा के कामों में मन कम लगने जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं. हो सकता है कि आपके परिवार में या फिर आप खुद इस समस्या से हर साल जूझते होंगे. इस समस्या के कारण ऑफिस में काम में मन नहीं लगता है, व्यक्ति परेशान रहता है, घर में चुप-चुप रहता है. लेकिन ये समस्या क्या है और कैसे ठीक हो सकती है, इसके बारे में अक्सर लोगों को जानकारी नहीं होती है. आइए इस स्टोरी में समझते हैं क्या है ये समस्या और कैसे आप इससे बच सकते हैं?
NHS के मुताबिक, Seasonal Affective Disorder (SAD) एक तरह का डिप्रेशन है, जिसके लक्षण साल के किसी खास मौसम में दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, यह आमतौर पर सर्दियों में होता है, लेकिन कुछ लोगों में इसके लक्षण गर्मियों में भी दिखाई दे सकते हैं, लेकिन ऐसा बहुत कम होता है. अब सवाल उठता है कि आखिर ये समस्या होती क्यों है? इसे लेकर NHS बताता है कि SAD यानी सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर का सटीक कारण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसे सर्दियों में धूप और प्राकृतिक रोशनी की कमी से जोड़कर देखा जाता है. यानी कि दिन छोटे होने और धूप कम मिलने के कारण दिमाग में सेरोटोनिन (Serotonin) और मेलाटोनिन (Melatonin) जैसे रसायनों का संतुलन बदलने लगता है. ये रसायन हमारे मूड, नींद के तरीके और बॉडी क्लॉक (Circadian Rhythm) को कंट्रोल करते हैं, जिससे सर्दियों में आलस और उदासी बढ़ जाती है.
सर्दियों में इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
NHS के मुताबिक, इसके लक्षण आमतौर पर सर्दियों में शुरू होते हैं और गर्मियों की शुरुआत के साथ अपने आप ठीक होने लगते हैं. इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
मूड लो रहना
दिलचस्प काम में मन न लगना
ज्यादा नींद और थकान
भूख बढ़ना
ध्यान लगाने में दिक्कत होना
बेचैनी और चिड़चिड़ापन
खुद के बारे में बुरा सोचना या समझना
खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार
सीजनल ब्लूज से निपटने के आसान तरीके
NHS के अनुसार, अपनी डेली-रूटीन में कुछ छोटे बदलाव करके आप इस मौसम में बेहतर महसूस कर सकते हैं और सुस्ती की समस्या से राहत पा सकते हैं.
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प्राकृतिक रोशनी में रहें: दिन के समय जितना संभव हो बाहर निकलें और सूरज की रोशनी लें.
एक्सरसाइज करें: शरीर जितना एक्टिव रहेगा, उतना ज्यादा बेहतर है. कोशिश करें कि रोजाना हल्का एक्सरसाइज जरूर करें.
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सोने का समय तय करें: रोज एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें. (नींद परी लें.)
सामाजिक जुड़ाव बनाए रखें: दोस्तों और परिवार के संपर्क में रहें और अपनी पसंदीदा चीजें करें, जैसे घूमना, खेलना आदि.
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सोने से पहले स्क्रीन से दूरी: रात को सोने से ठीक पहले स्मार्टफोन आदि का इस्तेमाल करने से बचें.
नशे से दूर रहें: शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन करने से बचे.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.