पानी पीने में की गई यह गलती बन सकती है Cancer की वजह, यहां जानिए खाने की नली में कैंसर के क्या लक्षण हैं

Esophageal Cancer Symptoms: भोजन नली या आहार नली में हुए कैंसर को एसोफेगस या एसोफेगल कैंसर कहते हैं. यहां जानिए आपकी रोजमर्रा की कौन सी गलती खाने की नली के कैंसर की वजह बन सकती है. साथ ही, जानिए खाने की नली में कैंसर होने के क्या लक्षण होते हैं.

Khane Ki Nali Ka Cancer

खाने की नली में अल्सर होने का क्या कारण है?

Khane Ki Nali Me Cancer: एसोफेगल कैंसर यानी भोजन की नली का कैंसर तब होता है जब कैंसर सेल्स की ग्रोथ भोजन नली में पनपने लगती हैं. भोजन नली एक लंबी ट्यूब है जो गले से होते हुए पेट तक जाती है. निगलने के बाद खाना भोजन नली से होता हुआ ही पेट तक पहुंचता है और पचता है. एसोफेगल कैंसर (Esophageal Cancer) ज्यादातर भोजन नली की अंदरूनी दीवारों पर पनपता है और पुरुषों में ज्यादा होता है. इस कैंसर की वजह आमतौर पर शराब का अत्यधिक सेवन और धूम्रपान बताई जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं पानी पीने में की गई गलती भी भोजन नली (Esophagus) के कैंसर की वजह बन सकती है.

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पानी पीने में की गई गलती और भोजन नली का कैंसर

भोजन नली का कैंसर होने की संभावना आपकी रोजमर्रा की एक आदत बढ़ा सकती है और यह आदत है गर्म पानी पीना. सर्दियों के मौसम में खासतौर से लोग गर्म पानी (Hot Water) पीते हैं. लेकिन, गर्म पानी या किसी भी गर्म पेय का लगातार सेवन किया जाए तो इससे भोजन नली का कैंसर हो सकता है.

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साल 2016 में इंटरनेशन एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था कि 65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान पर पिया गया पेय इंसानो के लिए कार्सिजोनिक हो सकता है यानी कैंसर पैदा करने वाला हो सकता है. कैंसर का खतरा पेय के तामपान पर निर्भर करता है, किस प्रकार की ड्रिंक पी जा रही है उसपर नहीं. इस गर्म पेय से सबसे ज्यादा भोजन की नली में कैंसर का खतरा होता है.

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दिनभर में कितनी गर्म ड्रिंक पीने पर कैंसर हो सकता है?

स्टडीज में पाया गया है कि मिडल ईस्ट, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में लोगों में गर्म पानी पीने के चलते एसोफीगल कैंसर का खतरा ज्यादा देखा गया है क्योंकि ये लोग 70 डिग्री सेल्सियस तक गर्म चाय पीते हैं. वहीं, जो लोग दिनभर में 8 या 8 से ज्यादा कप बहुत गर्म पानी पीते हैं तो उनमें एसोफीगल कैंसर का कैंसर 6 गुना ज्यादा देखा गया है. कुछ मामलों में गर्म ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन नहीं बल्कि नियमित सेवन कैंसर के खतरे को डबल करता है.

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अगर 65 डिग्री सेल्सियस गर्म पेय को ज्यादा मात्रा में एकसाथ पिया जाए तो इससे भोजन नली का तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है जिससे समय के साथ टिशू डैमेज बढ़ता जाता है.

इस बात का रखें खास ध्यान

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जब भी आप कुछ गर्म सर्व करते हैं तो ड्रिंक को कम से कम 5 मिनट तक ठंडा होने दें और उसके बाद फूंक मारते हुए पिएं. पैक्ड ड्रिंक्स का ढक्कन हटाकर पिएं. इसके साथ ही, ड्रिंक्स में ठंडा दूध या पानी मिलाकर पीने पर भोजन नली में थर्मल इंजरी कम होती है.

भोजन नली के कैंसर के क्या लक्षण हैं?

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  • भोजन नली के कैंसर के लक्षणों (Esophageal Cancer Symptoms) में सबसे पहला लक्षण है कि व्यक्ति को कुछ भी निगलने में दिक्कत होने लगती है.
  • सीने में दर्द महसूस होता है, प्रेशर महसूस होता है और जलन होने लगती है.
  • खांसी आती है और आवाज में बदलाव आ जाता है.
  • बिना कोशिश के भी वजन कम होने लगता है.
  • एसिडिटी और सीने में जलन की दिक्कत बढ़ जाती है.

क्या भोजन नली का कैंसर ठीक हो सकता है?

शुरुआती स्टेज में ही भोजन नली के कैंसर की पहचान कर ली जाए तो सही इलाज से इस कैंसर से बचा जा सकता है. अगर आपको भोजन नली के कैंसर का एक भी लक्षण नजर आता है तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं. ट्रीटमेंट में सर्जरी, कीमो और रेडिएशन थेरैपी दी जा सकती है. इसके अलावा कैंसर को कंट्रोल करने पर फोकस होता है. टार्गेटेड दवाइयां दी जाती हैं और कंबाइन थेरैपी का इस्तेमाल हो सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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