Benefits of Hast Mudra: हस्त मुद्राओं के बारे में कितना जानते हैं आप। ये हाथों की उंगलियों की अलग-अलग मूवमेंट्स होती हैं जिसका फायदा हमारी सेहत को होता है। अयोध्या के दशरथ समाधि स्थल पर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कायाकल्प किया जा रहा है। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अश्विनी कुमार पांडे बताते हैं कि अयोध्या में ऐसी 30 मूर्तियों को स्थापित किया जाएगा। इससे यहां पहुंचने वाले टूरिस्टों को हस्त मुद्राओं के बारे में जानने को मिलेगा। हस्त मुद्राएं भारत की पुरानी पद्धति हैं जो योग और ध्यान लगाने जैसी क्रियाओं के लिए की जाती हैं।

क्या है हस्त मुद्रा?

इन मुद्राओं को आयुर्वेद के जरिए इलाज करने में मदद मिलती है। ये ऐसे हाथों के संकेत या हाथ की मुद्राएं होती हैं जिनका उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाकर रखना और उन्हें स्वस्थ रखना है। हर मुद्रा का अलग-अलग लाभ होता है और इन्हें करना भी मुश्किल नहीं होता है। जानिए कुछ मुद्राओं के बारे में।

ये हैं प्रमुख हस्त मुद्राएं

ज्ञान मुद्रा- इस मुद्रा को करने के लिए हमें अपने अंगूठे और तर्जनी उंगली को मिलाना होता है और बाकी उंगलियां सीधे रखनी होती हैं। इसे करने से एकाग्रता और बुद्धि का विकास होता है। वायु मुद्रा- वायु मुद्रा में हमें अपने हाथों के अंगूठे की मदद से तर्जनी उंगली को दबाना होता है। इसे करने से वात दोष कम होता है। अग्नि मुद्रा- इसमें अंगूठे से अनामिका उंगली को दबाया जाता है। इससे पाचन क्रिया में सुधार होता है। जल मुद्रा- इसके लिए आपको अपनी छोटी उंगली को अंगूठे की मदद से दबाना है। इस क्रिया को करने से बॉडी में हाइड्रेशन की कमी दूर होती है। शून्य मुद्रा- अंगूठे और मध्यम उंगली को दबाना होता है। अगर किसी को सुनने या कान की समस्या होती है तो उन्हें इस मुद्रा को जरूर करना चाहिए।

हस्त मुद्राओं से क्या लाभ होते हैं?

आयुर्वेद में हस्त मुद्रा का महत्व बहुत अधिक होता है। धर्मगुरु भी शांति और ध्यान लगाते समय हस्त मुद्रा करते हैं।
  • हस्त मुद्रा करने से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
  • इसकी मदद से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सही ढंग से होता है।
  • हस्त मुद्रा करने से शरीर के सभी चक्रों को सक्रिय किया जाता है।
  • प्राणायम करने में भी हस्त मुद्रा फायदेमंद होती है।

मुद्रा करने का सही समय क्या है?

  • हस्त मुद्राओं को करने का सबसे अच्छा समय सुबह का होता है।
  • हर मुद्रा को 10 से 12 मिनट तक करें।
  • ध्यान और प्राणायाम के साथ करने से ज्यादा लाभ मिलते हैं।
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