संसद में ई सिगरेट पर मचा हंगा, जानिए E-cigarette क्या है और यह आम सिगरेट से कैसे अलग है

What Is E Cigarette: क्या ई सिगरेट यानी वेप आम सिगरेट से बेहतर होती है या क्या वेपिंग से सेहत को कम नुकसान होता है? यहां जानिए वेपिंग क्या है, यह शरीर को कैसे प्रभावित करती है और इसकी लत लग सकती है या नहीं.

E Cigarette

ई-सिगरेट के क्या नुकसान हैं?

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Kya vape harmful hai: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान टीएससी सांसद पर आरोप लगा है कि वे सदन में ही कई दिनों से ई सिगरेट पी रहे थे. लेकिन, ई सिगरेट होती क्या है? असल में ई सिगरेट को वेप कहा जाता है. ई सिगरेट का मतलब है एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (E-Cigarette) है जिससे सिगरेट की तरह ही धुआं निकलता है. इसमें निकोटिन और फ्लेवर्ड लिक्विड होता है जिसमें इस लिक्विड का मिस्ट ही मुंह से अंदर लिया जाता है. आम सिगरेट से जलते तंबाकु वाले धुएं की तरह ही इसमें निकोटिन होता है. लेकिन, क्या वेपिंग (Vaping) यानी ई सिगरेट पीना सेहत के लिए अच्छा है या यह आम सिगरेट से बेहतर है? वेपिंग के बढ़ते ट्रेंड के बीच यह समझना जरूरी है कि वेपिंग का सेहत पर क्या असर होता है.

क्या ई सिगरेट आम सिगरेट से बेहतर है?

तंबाकू वाली सिगरेट के मुकाबले ई सिगरेट में कम टॉक्सिक सब्सटेंस होते हैं लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि यह सेहत के लिए अच्छी है या आम सिगरेट से बेहतर है. वेपिंग से शरीर में हैवी मेटल्स जाते हैं जो कैंसर (Cancer) की वजह बन सकते हैं. वेपिंग और स्मोकिंग दोनों से ही सांस की नली और फेफड़ों मे इरिटेशन होती है. स्मोकिंग से ब्रोंकाइटिस और क्रोनिक ओब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज हो सकता है तो वहीं वेपिंग इंफ्लेमेशन और फेफड़ों पर तनाव और दबाव को ट्रिगर करती है. इससे खांसी, व्हीजिंग और सांस फूलने जैसी दिक्कतें होती हैं. वेपिंग से स्मोकिंग की तरह ही फेफड़े डैमेज हो सकते हैं जिससे फेफड़ों को सही तरह से काम करने में दिक्कत होती है.

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दिल की दिक्कतें बढ़ती हैं

वेपिंग से रक्त धमनियां डैमेज होने लगती हैं जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट रेट में इजाफा होता है. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक आने का खतरा बढ़ता है. वेपिंग हार्ट अटैक के खतरे को तो कई ज्यादा बढ़ाती ही है, साथ ही इससे हाई कॉलेस्ट्रोल और ब्लड फ्लो में दिक्कत होने लगी है.

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कैंसर का बढ़ता है खतरा

सिगरेट पीने पर व्यक्ति को कैंसर हो सकता है और वेपिंग यानी ई सिगरेट (E-cigarette) से भी यह खतरा बना रहता है. ई सिगरेट में कार्सिनोजेन्स होते हैं जो इंफ्लेमेशन को बढ़ाते हैं और DNA डैमेज करते हैं. इससे इम्यूनिटी खराब होती है, अस्थमा का अटैक आ सकता है और प्रजनन क्षमता भी कम हो सकती है. पुरुषों में खासतौर से लोअर स्पर्म काउंट देखने को मिल सकता है और महिलाएं अगर वेप करती हैं तो प्रेग्नेंसी में कोम्प्लिकेशंस आ सकती हैं.

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क्या ई सिगरेट की लत लग सकती है

आम सिगरेट और ई सिगरेट दोनों ही एडिक्टिव होते हैं यानी दोनों की ही लत लग सकती है. कई लोगों को लगता है कि वे आम सिगरेट छोड़ने के लिए अगर वेप करने लगें तो इससे धूम्रपान की लत नहीं रहेगी. लेकिन, ऐसा नहीं होता है. ई सिगरेट से निकोटिन पर निर्भरता बढ़ती है, निकोटिन की इच्छा में इजाफा होता है और आम सिगरेट से ज्यादा वेप करने का मन करता रहता है.

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मानसिक दिक्कतें भी हो सकती हैं

ई सिगरेट दिमागी सेहत को भी प्रभावित करती है. इससे एंजाइटी होने लगती है, इरिटेशन बढ़ती है और ध्यानकेंद्रित करने में दिक्कतें आती हैं. वेपिंग मेंटल हेल्थ को खराब करने का काम करती है.

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ऐसे में ई सिगरेट किसी भी तरह से आम सिगरेट से बेहतर नहीं है बल्कि ज्यादा हानिकारक हो सकती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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