Cancer Causes: किस मीट को खाने पर बढ़ सकता है कैंसर का खतरा? WHO की गाइडलाइंस क्या कहती है, यहां जानिए 

Does Processed Meat Cause: अगर आप नॉनवेज लवर हैं तो यह लेख आपके लिए हो सकता है, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जताते हुए गाइडलाइन जारी की है. इसमें बताया गया है कि कैसे मीट हेल्थ को नुकसान पहुंचाने का काम करता है. 

Does Processed Meat Cause

प्रोसेस्ड मीट से परहेज क्यों करना चाहिए? Image Credit- AI

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कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही हर कोई डरता है, क्योंकि यह बीमारी जान लेकर ही दम लेती है. हालांकि, अगर वक्त पर इसके लक्षणों पर ध्यान दिया जाए तो काफी हद तक इसके असर को कम किया जा सकता है. इस बीमारी के होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन अगर अपने खानपान पर दिया जाए तो इस परेशानी को काफी हद तक हल किया जा सकता है. इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खानपान में शामिल चीजों को कैंसर का कारण बताया गया है. अगर उन्हें अपनी डाइट से कम न किया जाए तो कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है. इसलिए अगर आप नॉनवेज खाते हैं तो आपको विश्व स्वास्थ्य संगठन के बताई गई गाइडलाइंस पर जरूर ध्यान देना होगा.  

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प्रोसेस्ड मीट से परहेज क्यों करना चाहिए?

प्रोसेस्ड मीट खाने से कैंसर का खतरा ज्यादा बढ़ सकता है. खास तौर पर प्रोसेस्ड मीट खाने से कोलोरेक्टल कैंसर होने के चांस बढ़ जाते हैं. बता दें कि प्रोसेस्ड मीट वह मीट है जिसे स्वाद बढ़ाने या लंबे समय तक स्टोर करके रखा जाता है. फ्रेश रखने के लिए उसमें नमक मिलाया जाता है या दूसरे प्रोसेस से जोड़ा जाता है जैसे- सॉसेज, हॉट डॉग, हैम, बीफ, बीफ जर्की और कुछ स्टोर की जाने वाली चीजें आदि. 

रोजाना कितना मीट खाने से बढ़ सकता है खतरा?

हर दिन 50 ग्राम प्रोसेस्ड मीट खाने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा लगभग 18% बढ़ जाता है.  हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 50 ग्राम मीट खाने वाले हर इंसान को कैंसर हो जाएगा. किसी इंसान के लिए प्रोसेस्ड मीट से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम भी हो सकता है, लेकिन मीट की मात्रा बढ़ने के साथ साथ खतरा बढ़ सकता है.

क्या इसका मतलब मीट खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?

WHO का कहना है कि लोगों को मीट पूरी तरह छोड़ देना चाहिए. WHO ने साफ तौर पर बताया है कि लोगों को प्रोसेस्ड मीट खाना पूरी तरह बंद करने के लिए नहीं कहती, बल्कि इसकी मात्रा कम करने से कैंसर का खतरा कम हो सकता है. 

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मीट पकाने का तरीका भी है जरूरी 

मीट को बहुत ज्यादा तापमान पर पकाने या सीधे फ्लेश से फर्क पड़ सकता है. इसलिए मीट को हमेशा हल्की आंच पर और हेल्दी तरीके से पकाना चाहिए. आप पहले गोश्त हो स्टीम कर सकते हैं, वरना कुकर में कम तेल में गोश्त पकाना बेस्ट हो सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि कार्सिनोजेनिक PAHs और हेटेरोसाइक्लिक एमाइन (HCA) बनते हैं, जो कैंसर का रिस्क बढ़ाने का काम करते हैं.

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Source- WHO 

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Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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