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छोटे बच्चों में डिप्रेशन या मानसिक पीड़ा को कैसे पहचानें? फोर्टिस अस्पताल की साइकाइट्रिस्ट ने बताया माता-पिता इन संकेतों को ना करें इग्नोर

Depression Signs In Children: डिप्रेशन एक ऐसी समस्या है जिससे बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी प्रभावित हो सकते हैं. इसी बारे में बता रही हैं फोर्टिस अस्पताल की कंसल्टेंट डॉक्टर रिया गुप्ता. आइए डॉक्टर से ही जानते हैं छोटे बच्चों में डिप्रेशन को किस तरह पहचाना जा सकता है.

कैसे पहचानें बच्चा डिप्रेशन में है?

Depression In Children: डिप्रेशन को हिंदी में अवसाद कहा जाता है. यह सामान्य उदासी या दुख नहीं है बल्कि एक गंभीर मानसिक स्थिति है जो व्यक्ति के सोचने, समझने और महसूस करने के तरीके को प्रभावित करती है. डिप्रेशन के कारण व्यक्ति जीने की इच्छा तक त्यागने लगता है. ऐसे में इस गंभीर मानसिक दिक्कत को समय रहते पहचानना जरूरी होता है. फोर्टिस अस्पताल (Fortis Hospital) की कंसल्टेंट डॉक्टर रिया गुप्ता बच्चों में होने वाले डिप्रेशन के बारे में बता रही हैं. डॉ. रिया गुप्ता का कहना है कि डिप्रेशन या अवसाद को अक्सर ही बड़ों की समस्या माना जाता है लेकिन छोटे बच्चों को भी यह प्रभावित कर सकता है. सबसे ज्यादा प्रभावित आयु वर्ग 15 से 19 वर्ष को माना जाता है. वहीं, छोटे बच्चों की बात करें तो उनमें अवसाद हमेशा बड़ों की तरह लगातार उदासी के रूप में नहीं दिखता है. इसके बजाय यह भावनात्मक और व्यवहारिक बदलावों के रूम में सामने आता है जिन्हें अक्सर बदतमीजी, चिड़चिड़ापान, आलस या मूड स्विंग्स समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. ऐसे में समय रहते इस अवसाद या बच्चों की मानसिक पीड़ा को पहचानकर मेडिकल हेल्प लेना जरूरी होता है. यहां जानिए बच्चों में डिप्रेशन के कौन-कौन से संकेत (Depression Signs In Children) नजर आते हैं.

बच्चों में डिप्रेशन कैसे पहचानें

डॉ. रिया गुप्ता के अनुसार बच्चे में डिप्रेशन के लक्षण या संकेत कुछ इस तरह के नजर आते हैं -

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व्यवहार में बदलाव - छोटे बच्चों की अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने की क्षमता सीमित होती है. इसीलिए वे अपने मानसिक कष्ट को व्यवहार के जरिए दिखाते हैं. लगातार चिड़चिड़ापन, बार-बार रोना, सब से दूरी बनाना, सुस्ती महसूस करना या खेलकूद या अपनी पसंद की पुरानी गतिविधियों में रुचि खो देना अवसाद के लक्षण (Depression Symptoms) हो सकते हैं.

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सेहत पर दिखता है असर - बच्चों की नींद प्रभावित होने लगती है, भूख में बदलाव नजर आता है, अक्सर सिर में दर्द या पेट में दर्द की शिकायत रहती है और अत्यधिक थकान महसूस होती है. किसी तरह की मेडिकल दिक्कत ना होने पर भी ऐसे लक्षण नजर आना अवसाद का संकेत हो सकता है.

पढ़ाई में दिक्कत आने लगती है - अवसाद से ग्रसित बच्चे अचानक ही पढ़ाई में पिछड़ने लगते हैं. बच्चों को ध्यानकेंद्रित करने में दिक्कत होने लगती है, बच्चे स्कूल जाने से कतराने लगते हैं और तनाव से जूझने लगते हैं.

आत्मविश्वास की कमी - बच्चों में आत्मविश्वास की कमी आने लगती है, अपराधबोध होने लगता है, बच्चों को लगता है कि "मैं अच्छा नहीं हूं" या "मुझे कोई पसंद नहीं करता है" आदि. अगर बच्चा इस तरह की बातें करता है तो इन बातों को पैरेंट्स को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए.

बच्चों में डिप्रेशन की क्या वजह है

बच्चों में अवसाद का कारण पारिवारिक तनाव, बुलिंग, पढ़ाई का दवाब या किसी अपने को खोने का अनुभव हो सकता है. डॉक्टर का कहना है कि समय रहते इस डिप्रेशन की पहचान करना जरूरी है. बिना इलाज के अवसाद में बच्चे का भावनात्मक विकास, रिश्तों और लॉन्ग टर्म में मानसिक विकास को प्रभावित करता है. समय पर पहचान करके ट्रीटमेंट शुरू किया जाए तो बच्चे पूरी तरह से डिप्रेशन से निकल सकते हैं और मानसिक रूप से स्वस्थ हो सकते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.


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