Chronic Back Pain Treatment: आज की भागदौड़भरी जिंदगी, खराब खान-पान और लंबे समय तक बैठकर काम करने की वजह से कमर दर्द का शिकार होना लाजमी है। शुरूआत में तेज दर्द का इलाज थोड़ा आसान होता है। इस मामले में अधिकतर लोग स्ट्रेचिंग, मसाज या पैन रिलाफ की मदद से आराम पा लेते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जोकि इस बात पर विचार करते हैं कि आखिर कैसे और कब इस दर्द की शुरूआत हुई।
जो बैक पैन 3 महीने या इससे अधिक अंतराल तक बना रहता है वो क्रॉनिक बैक पैन कहलाता है। क्रॉनिक बैक पैन में मूल वजह के साथ ही साइकोसोशल आस्पेक्ट्स भी सम्मलित होता है। इसलिए इसका इलाज करना चुनौती से भरा होता है। क्रॉनिक पैन एक जटिल बीमारी है जसमें समय के साथ खास देखभाल की आवश्यकता होती है।
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स्पाइन स्पेशलिस्ट से मिलने की सलाह क्रॉनिक बैक पैन में कब दी जाती है?
क्रॉनिक बैक पैन से पीड़ित रहना आपकी लाइफ की क्वालिटी पर गंभीर रूप से प्रभाव डाल सकता है। कमर में लगातार दर्द एक बड़ी परेशानी की ओर इशारा भी हो सकता है। इसलिए गंभीर कमर दर्द को नज़रअंदाज न करें, खासकर जब यह लगातार और तीव्र हो, या आराम की स्थिति या रात में असहनीय हो जाए।
परंपरागत तौर से, नॉन-प्रिस्क्रिप्शन, ओवर द काउंटर (ओटीसी) दर्द की दवाएँ (जैसे- एसिटामिनोफेन) और प्रिस्क्रिप्शन-आधारित ओपिऑइड्स के मीडियम से गंभीर क्रॉनिक पैन के इलाज के लिए बेस्ट माना जाता है। साथ ही अतिरिक्त टेक्निक्स या वैकल्पिक थेरेपीज़, जैसे कि एक्यूपंक्चर, विश्राम, मसाज थेरेपी, एक्सरसाइज़ थेरेपी, फिजिकल थेरेपी, कायरोप्रैक्टिक और हर्बल दवाओं का इस्तेमाल क्रॉनिक पैन को कम करने में किया जा सकता है।
कुछ आधुनिक थेरेपीज़ जैसे स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन भी इस दर्द से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित हो सकती हैं। स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन का इस्तेमाल कई स्थितियों की वजह से गंभीर और क्रॉनिक पैन के रोगियों के इलाज के लिए किया जा सकता है, जिसमें पीठ की असफल सर्जरी, न्यूरोपैथिक पैन, डिजनरेटिव डिस्क डिसीज़ और कॉम्प्लेक्स रीजनल पैन सिंड्रोम आदि शामिल हैं।
डॉ. सचिन कंधारी के अनुसार, “स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन (एससीएस) प्रभावशाली तकनीकों में से एक है, जोकि अन्य दर्द के इलाज की विधियों के विपरीत पुराने न्यूरोपैथिक दर्द से जूझ रहे रोगियों को दीर्घकालिक रिजल्ट प्रदान करती है। डॉ. सचिन कंधारी न्यूरोसर्जन हैं। वह फिलहाल इंस्टिट्यूट ऑफ ब्रेन एंड स्पाइन (आईबीएस) हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. सचिन कंधारी बताते हैं कि स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेटर एक इम्प्लांटेड डिवाइस है, जो दर्द से निजात दिलाने के लिए रीढ़ की हड्डी में निम्न स्तर पर इलेक्ट्रिसिटी प्रेषित करता है। स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन दर्द से राहत प्रदान करते हुए रीढ़ की हड्डी और दिमाग के बीच से गुजरने वाले दर्द संकेतों को रोक देता है। स्टिम्युलेशन को एक न्यूरोस्टिम्युलेटर के अनुसार भेजा जाता है। न्यूरोस्टिम्युलेटर डिवाइस को त्वचा में इम्प्लांट किया जाता है, जोकि आपकी रीढ़ के पास के एरिए में हल्के इलेक्ट्रिकल इम्पल्सेस डिलीवर करता है।”
कितना प्रभावी है स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन?
स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन तकनीक क्रॉनिक पैन को कम करने में बेदह कारगर है, जो आपकी गतिशीलता, कार्य और लाइप क्वालिटी में सुधार कर सकता है। ये क्रॉनिक पैन को मैनेज करने की एक दीर्घकालिक और सिद्ध थेरेपी है। इसके मीडियम से मरीजों को कई लाभ प्राप्त हुए हैं। जिसमें रोजमर्रा में बेहतर कार्य करने की अधिक क्षमता शामिल है।
स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन मुझ पर काम नहीं करेगा तो…?
स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन का एक खास लाभ यह है कि आप पहले थेरेपी को आजमा सकते हैं, ताकि आपको और आपके डॉक्टर को यह तय करने में सहायता मिल सके कि ये आपके लिए सही है या नहीं। क्लिनिक, डे सर्जरी सेंटर या हॉस्पिटल में एक टेम्पररी लीड प्लेसमेंट प्रोसीजर किया जा सकता है।
इन टेम्पररी लीड्स को रीढ़ की हड्डी के पास के एरिए में रखा जाता है। ये लीड्स एक बाहरी न्यूरोस्टिम्युलेटर से जुड़ी हुई होती हैं, जो ट्रायल के दौरान आपकी पीठ पर सेट होते हैं। ये ट्रायल पीरियड 3-10 दिनों का होता है। फिर ट्रायल के बाद आपके डॉक्टर डिसाइड करते हैं कि स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन आपके क्रॉनिक पैन को मैनेज करने में आपकी सहायता करेगी या नहीं और आपको परमानेंट डिवाइस इम्प्लांट के साथ आगे बढ़ना चाहिए या नहीं।
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डॉ. सचिन कंधारी आगे कहते हैं कि, “दर्द जागरूकता माह के अवसर पर, मरीजों को अपने क्रॉनिक बैक पैन को मैनेज करने के प्रभावी तरीकों के बारे में सीखना चाहिए। बहुत से लोग एससीएस प्रक्रिया के बाद पहले की तुलना में काफी कम दर्द का अनुभव करते हैं, जो उन्हें जीवन की उच्च गुणवत्ता और अधिक गतिशीलता का आनंद लेने की अनुमति प्रदान करता है।
स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन अपनाने वाले कुछ मरीज अपने डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद अपनी दर्द दवाओं को कम करने या समाप्त करने में सक्षम हो सकते हैं। सभी मरीजों को अपने पैन स्पेशलिस्ट द्वारा बताई गई दवाओं, एक्सरसाइज़ और अन्य उपचारों की सलाह का पालन करना चाहिए, जो उनके दर्द को और कम करने में कारगर हो सकते हैं।”
लाइफस्टाइल चैंजेस से बैक पैन को मैनेज करने के टिप्स-
• हेल्दी खान-पान को अपने जीवन में शामिल करें।
• अपने घुटनों के नीचे तकिया लगाकर सोएँ।
• कन्वेंशनल एक्सरसाइजेस जैसे-एरोबिक, स्ट्रेंथ, फ्लेक्सिबिलिटी और बैलेंस ट्रेनिंग शामिल हैं।
• धूम्रपान और शराब का सेवन सीमित करें।
• सुबह उठने के बाद थोड़ी देर घूमें और थोड़ा स्ट्रेच करें।
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