Cancer Myths: कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका समय रहते इलाज ना किया जाए तो मरीज की जान जा सकती है. ऐसे में इस खतरनाक बीमारी के बारे में सही जानकारी होना जरूरी है. भारत में सबसे ज्यादा होंठ या मुंह का कैंसर, पेट का कैंसर, स्तन कैंसर, आंतों का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, ओवेरियन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर देखा जाता है. वहीं, भारत में हर साल 15 से 16 लाख के करीब कैंसर के नए मामले देखने को मिलते हैं. ऐसे में कैंसर के बारे में समाज में निहित मिथकों को दूर करना और सच्चाई जानना जरूरी है ताकि कैंसर के मरीज की समय रहते जान बचाई जा सके. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक्सपर्ट्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कैंसर से जुड़े 10 बड़े मिथक क्या हैं और असल में सच क्या है.
कैंसर से जुड़े मिथक और फैक्ट्स | Cancer Myths And Facts
पहला मिथक – कैंसर संक्रामक होता है
फैक्ट – कैंसर संक्रामक नहीं होता है. हालांकि, कुछ ऐसे कैंसर हैं जो बैक्टीरिया या वायरस से होते हैं, जैसे हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से लिवर कैंसर होता है, ह्यूमन पैपिलोमावायरस से सर्वाइकल कैंसर हो सकता है.
दूसरा मिथक – अगर परिवार में किसी को कैंसर नहीं हुआ है तो आपको भी नहीं होगा
फैक्ट – अगर आपके परिवार में कभी किसी को कैंसर नहीं हुआ है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको भी कैंसर नहीं होगा. इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आपको कैंसर ना हो. केवल 5 से 10% कैंसर ही ऐसे हैं जो परिवार के कारण होते हैं. बाकि कैंसर जेनेटिक्स में बदलाव और व्यक्ति की पूरी जिंदगी, आदतों और पर्यावरण पर निर्भर करते हैं.
तीसरा मिथक – अगर परिवार में किसी को कैंसर हुआ है तो आपको भी पक्का होगा
फैक्ट – फैमिली में किसी को कैंसर हुआ हो तो इससे आप में कैंसर पनपने की संभावना रहती है लेकिन ऐसा नहीं है कि यह होगा ही होगा. 5 से 10% कैंसर ही ऐसे हैं जो माता-पिता से बच्चों में आते हैं.
चौथा मिथक -अगर आपको कैंसर हुआ है तो आप कुछ ही समय में मर सकते हैं
फैक्ट – कैंसर का मतलब यह नहीं है कि आपकी जान जाना तय है. कैंसर की जांच (Cancer Test) और इलाज से ज्यादातर कैंसर में सर्वाइवल रेट्स बढ़े हैं. वहीं, बहुत से लोग कैंसर की पहली जांच के 5 साल या उसके बाद तक भी जीते हैं.
पांचवा मिथक – कैंसर का ट्रीटमेंट बीमारी से ज्यादा खतरनाक होता है
फैक्ट – कैंसर ट्रीटमेंट जैसे कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के कुछ साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं जो असहज होते हैं और कई बार गंभीर भी होते हैं. लेकिन, हालिया समय में कीमोथेरेपी ड्रग्स और रेडिएशन थेरेपी को लेकर बेहतर टोलरेंस देखी गई है. इनसे होने वाले ऐसे कई लक्षण हैं जिन्हें मैनेज किया जा सकता है.
छठा मिथक – कैंसर का इलाज करा रहे लोग रोजमर्रा की एक्टिविटीज नहीं कर सकते हैं
फैक्ट – कैंसर के बहुत से मरीजों का आउटपेशेंट बेसिस पर इलाज किया जाता है. मरीजों को कम समय के लिए ही अस्पताल में रहना पड़ता है और वे अपने रोजमर्रा के काम या एक्टिविटीज कर सकते हैं. वे कैंसर का इलाज कराते हुए चाहे तो पार्ट टाइम या फुल टाइम काम कर सकते हैं, बच्चों का ख्याल रख सकते हैं और सोशल एक्टिविटीज अटेंड कर सकते हैं.
सातवां मिथक – कैंसर हमेशा बेहद दर्दनाक होता है
फैक्ट – कैंसर शुरुआती स्टेज में बिना दर्द वाला हो सकता है. हालांकि, जब कैंसर बढ़ने लगता है और अन्य अंगों तक फैलने लगता है तो दर्द हो सकता है. कैंसर के ज्यादातर मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज होता है और मरीडों को दर्द मैनेज करने की दवाएं दी जाती हैं.
आठवां मिथक – बुजुर्गों का कैंसर ट्रीटमेंट नहीं हो सकता है
फैक्ट – कैंसर के इलाज की कोई एज लिमिट यानी उम्र की सीमा नहीं है. बहुत से वृद्ध मरीज जवान मरीजों की तरह ही कैंसर ट्रीटमेंट (Cancer Treatment) को लेकर रिस्पोंड करते हैं. ऐसे में जिस भी व्यक्ति को कैंसर हुआ है उसे कैंसर का इलाज करवाना चाहिए.
नौंवा मिथक – हर्बल प्रोक्ट्स से कैंसर ठीक हो सकता है
फैक्ट – कुछ स्टडीज इस बात का जिक्र करती हैं कि ऑल्टरनेटिव या कॉम्प्लिमेंटरी थेरेपीज और हर्ब्स कैंसर के मरीजों को कैंसर ट्रीटमेंट के साइड इफेक्ट्स से बचा सकते हैं. लेकिन, कोई हर्बल प्रोडक्ट कैंसर के इलाज में वैज्ञानिक तौर पर असरदार साबित नहीं हुआ है.
दसवां मिथक – मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना और आस-पास फोन के टावर होने पर कैंसर हो सकता है
फैक्ट – अबतक जितनी भी स्टडीज हुई हैं उनमें यह साबित नहीं हुआ है कि फोन कैंसर का कारण बनता है. कैंसर जेनेटिक म्यूटेशंस से होता है और फोन में लो फ्रीक्वेंसी एनर्जी होती है जो जीन्स को डैमेज नहीं करती है. सेलफोन या सेलफोन टावर से कैंसर होता है यह अब भी एक विवादास्पद मुद्दा है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.