Heart Arrhythmia: असामान्य दिल की धड़कन को अतालता के रूप में जाना जाता है। इसका मतलब है कि हार्ट अपनी सामान्य लय से बाहर है। असामान्य दिल तब होता है जब दिल की धड़कन के संकेत ठीक से काम नहीं करते हैं। हार्ट बहुत धीमी गति से, बहुत तेज धड़क सकता है। व्यायाम और सोने के दौरान किसी व्यक्ति की हार्ट बीट तेज या धीमी होना सामान्य है।
दिल की धड़कन असामान्य हो जाने पर इसे डिस्रिथिमिया भी कहा जाता है। हार्ट धड़कते हुए शरीर में बल्ड फ्लो को सुचारू बनाए रखता है, जिससे हमारा शारीरिक और मानसिक विकास बिना किसी रूकावट के होता रहता है।
दिल की धड़कन असामान्य होने के कई प्रकार होते है और उन्हें लय और गति की असामान्यताओं के आधार पर क्लासिफाइड किया जाता है। अतालता के कुछ सामान्य प्रकार में शामिल हैं।
वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया (Ventricular tachycardia)
यह वेंट्रिकल्स की तेज़ और नियमित धड़कन है जो कुछ सेकंड तक रह सकती है। कुछ धड़कनें अक्सर कोई समस्या पैदा नहीं कर सकतीं। लेकिन अगर यह लंबे समय तक बना रहे तो यह एक गंभीर संकेत दे सकता है।
ब्रैडीकार्डिया (Bradyarrhythmia)
ब्रैडीरिथिमिया धीमी हृदय गति है और उससे कम होती है।
सुप्रावेंट्रिकुलर अतालता (Supraventricular tachycardia)
इस प्रकार की अतालता हृदय के ऊपरी कक्षों में शुरू होती है, जिसे एट्रियम के रूप में जाना जाता है। इन्हें तेज हृदय गति के रूप में भी जाना जाता है और एक मिनट में 100 से अधिक धड़कनें होती हैं।
वेंट्रिकुलर फ़िब्रिलेशन (Ventricular fibrillation)
यह तब होता है जब अव्यवस्थित संकेत सामान्य रूप से पंप करने के बावजूद वेंट्रिकुलर कांपने लगते हैं। इस स्थिति के कारण अचानक मौत या कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।
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हृदय अतालता के लक्षण
स्टेथोस्कोप से दिल की जांच करने पर हूशिंग साउंड सुनाई देना
छाती में दर्द महसूस होना
पेट की सूजन
सामान्य से ज्यादा थकान
सांस की तकलीफ
टखनों और पैरों की सूजन आना
चक्कर आना, बेहोशी आना
दिल की अनियमित धड़कन
बल्ड प्रेशर से जुड़ी समस्या
हृदय अताताला के कारण
दिल की धमनी का रोग
दिल में चिड़चिड़ा ऊतक
हाई बल्ड प्रेशर
हृदय की मांसपेशियों में परिवर्तन
वाल्व विकार (Valve disorders)
बल्ड में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन (Electrolyte imbalances)
दिल का दौरा
असामान्य दिल की धड़कन का इलाज
दिल असामान्य होने पर उसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में, उपचार की कोई जरूरत नहीं होती। अगर इलाज की आवश्यकता पड़ती है तो इसके ऑप्शन में दवाई, खानपान में बदलाव, इलाज, सर्जरी शामिल हैं।
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