AIIMS ने स्टडी में पाया स्कूलों में मोटापे से जूझ रही हैं लड़कियां, इस डिसऑर्डर की समस्या भी देखी गई ज्यादा

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पिछले 3 वर्षों से प्राइवेट और सरकारी स्कूलों की छात्राओं पर स्टडी कर रहा है. स्टडी में पाया गया कि छात्राओं में मोटापे की दर बढ़ी है और साथ ही मोटापे से जुड़ी दिक्कतें भी ज्यादा देखी जा रही हैं.

Obesity In Girls

प्राइवेट और सरकारी स्कूल की छात्राओं में बढ़े मोटापे के मामले. AI Generated Image

Obesity In Girls: किशोरावस्था में लड़कियों के शरीर में कई बदलाव देखे जाते हैं जो ना सिर्फ उनकी फिजिकल हेल्थ बल्कि मेंटल हेल्थ पर भी असर डालते हैं. इसीलिए आमतौर पर यही कोशिश की जाती है कि इस उम्र में लड़कियों की सेहत पर खासा ध्यान दिया जाए जिससे किसी तरह की लॉन्ग टर्म समस्या का सामना ना करना पड़े. इस चलते अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पिछले 3 सालों से स्कूली छात्राओं पर स्टडी कर रहा है और क्लॉज मॉनिटरिंग से देख रहा है कि छात्राओं की सेहत से जुड़ी कौन सी दिक्कतें हैं जिनपर ध्यान देने की आवश्यक्ता है. एम्स ने स्टडी में पाया है कि छात्राओं में मोटापे की दर बढ़ी है जिस चलते हो रही अन्य समस्याओं की दर में भी इजाफा हुआ है.

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छात्राओं में मोटापा, PCOS और पीरियड्स में अनियमितता

एम्स के पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट की, पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी डिवीजन की प्रोफेसर डॉ. रजनी शर्मा ने बताया कि एम्स पिछले 3 वर्षों से सोसाइटी ऑफ एंडोक्राइन हेल्थ इन एलडर्ली, अडोलसेंट एंड चिल्ड्रन नाम के NGO के साथ स्कूलों में यह स्टडी कर रहा है. इस स्टडी में डॉक्टर्स की टीम अलग-अलग स्कूल में जाकर छात्रों पर मेटाबॉलिक प्रॉब्लम्स, न्यूट्रिशनल हेल्थ इशूज और PCOS जैसी कॉम्प्लिकेशंस की स्क्रीनिंग कर रही है. डॉ. रजनी शर्मा ने कहा, “हम इन लड़कियों की स्क्रीनिंग करते हैं, फॉलोअप करते हैं और जिनमें दिक्कतें पाई गई हैं उन्हें AIIMS में आगे की जांच के लिए बुलाते हैं. हम पिछले 3 सालों से यह स्टडी कर हैं और इसे फॉलो-अप स्टडी के तौर पर जारी रखे हुए हैं. हमें मोटापे की समस्या काफी देखने को मिल रही है.”

AIIMS की स्टडी में देखा गया कि प्राइवेट स्कूलों में 40% से 45% लड़कियां मोटापे से परेशान हैं या ओवरवेट (Overweight Girls) हैं. सरकारी स्कूलों में 15% लड़कियां ओरवेट या ओबीज हैं. ये वो आंकड़े हैं जो कुछ सालों पहले तक सुनने में नहीं आते थे.

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PCOS को लेकर बढ़ी चिंता

छात्राओं में PCOS के मामले बढ़ते हुए देखे गए हैं. लाइफस्टाइल अच्छा ना होने के चलते छात्राएं मोटापे का शिकार हो रही हैं, उन्हें पीरियड्स से जुड़ी दिक्कतें होने लगी हैं, अनियमित पीरियड्स या जल्दी पीरियड्स (Early Periods) के अलावा उनमें पीसीओएस की संभावना बढ़ती देखी गई है. छात्राओं का न्यूट्रिशन अच्छा होता था तो पीरियड्स आने की उम्र 12 साल तक थी जोकि अब मोटापे के कारण और कम हो रही है. इसके अलावा, पर्यावरण से जुड़ी दिक्कतें भी इसकी वजह हो सकती हैं.

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क्या होता है PCOS

PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम जिसे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक सिंड्रोम भी कहते हैं एक हार्मोनल डिसऑर्डर है जो लड़कियों में देखा जाता है. PCOS होने पर पीरियड्स से जुड़ी दिक्कतें होती हैं और यह ओवरी में सिस्ट का कारण बनता है. इन सिस्ट के अंदर इम्मेच्योर एग्स होते हैं जिन्हें फॉलिकल्स कहते हैं. यह फॉलिकल्स रेगुलरी एग रिलीज नहीं होने देते हैं. ऐसे में PCOS का पता लगाना और इसे मैनेज करना जरूरी होता है जिससे सेहत को ठीक रखा जा सके.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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