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नागौर में 9 साल की बच्ची की हार्ट अटैक से हुई मौत, जानिए कैसे पता चलेगा कि किसी बच्चे को दिल का दौरा पड़ रहा है

Heart Attack In Children: बच्चों में हार्ट अटैक आने से पहले ही कुछ चेतावनी संकेत नजर आने लगते हैं. ऐसे में यहां जानिए बच्चों में हार्ट अटैक आने के क्या कारण होते हैं और इसका किस तरह पता लगाया जा सकता है.

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बच्चों में कैसे दिखते हैं हार्ट अटैक के लक्षण, जानिए यहां.

Heart Attack Symptoms: राजस्थान के नागौर जिले से एक बेहद ही दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है जहां स्कूल में खेलते-खेलते अचानक ही 9 साल की बच्ची गिर पड़ी और कुछ ही मिनटों में उसकी जान चली गई. बताया जा रहा है कि बच्चे को अचानक हार्ट अटैक आने से ऐसा हुआ है. कई बार यह सवाल किया जाता है कि क्या बच्चों को हार्ट अटैक आ सकता है या नहीं. बच्चों में हार्ट अटैक के मामले भी कम ही सुनने में आते हैं, लेकिन बच्चों को भी हार्ट अटैक आ सकता है. यह बच्चों में दिल की दिक्कतों (Heart Problems In Children) का समय पर पता ना लगा पाने के चलते होता है. यहां जानिए बच्चों में हार्ट अटैक आने के क्या संकेत होते हैं और हार्ट अटैक आने पर इसकी पहचान किस तरह से की जाती है.

बच्चों में हार्ट अटैक के चेतावनी संकेत क्या होते हैं | Warning Signs Of Heart Attack In Children

  • शरीर में हर समय थकान रहने लगती है.
  • दिल की धड़कन बहुत तेज या इर्रेग्यूलर हो जाती है.
  • बच्चे नॉर्मल एक्सरसाइज भी ज्यादा देर नहीं कर पाते.
  • सीने में दर्द रहता है, असहजता महसूस होती है.
  • सांस लेने में दिक्कत होती है या सांस फूल जाती है.

बच्चों में हार्ट अटैक आने पर कैसे पता चलता है

एकदम से सांस फूलने लगती है, दिल के आस-पास के हिस्से में दर्द होने लगता है, ठंडा पसीना आने लगता है और अक्सर ही बच्चे खेलते-कूदते हुए गिर जाते हैं.

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बच्चों में हार्ट अटैक आने के क्या कारण होते हैं

खानपान का सही ना होना – बच्चे का खानपान अगर अच्छा ना हो और खाने में जरूरत से ज्यादा तेल या मसाले हों तो बच्चों में कम उम्र से ही दिल की दिक्कतें पनपने लगती हैं. प्रोसेस्ड फूड्स के जरूरत से ज्यादा सेवन से भी बच्चे के शरीर में गंदा कॉलेस्ट्रोल बढ़ने लगता है.

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फिजिकल एक्टिविटी की कमी – अगर बच्चे फिजिकली एक्टिव नहीं हैं, खेलते-कूदते नहीं हैं और एक्सरसाइज नहीं करते हैं तो इससे मोटापा बढ़ने लगता है और अनहेल्दी फैट जमा होकर धमनियों को ब्लॉक करने लगता है.

तनाव लेना – बच्चे को अगर बहुत ज्यादा तनाव होने लगे तो उससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ने लगता है जो हार्ट कंडीशंस की वजह बनता है.

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खराब लाइफस्टाइल – सही समय पर ना सोना, अनहेल्दी आदतें और फैमिली हिस्ट्री भी बच्चों में हार्ट अटैक की वजह बन सकती है.

यह भी पढ़ें – रिश्तेदारों की ये 5 सलाह बच्चे के लिए साबित हो सकती हैं खतरा! डॉक्टर ने कहा कभी ना मानें ये बातें

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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