Ganesh Chaturthi 2024: देश का इकलौता गणेश मंदिर, जहां बिना सूंड वाले गणपति की होती है पूजा

Ganesh Chaturthi 2024: भारत में ऐसे-ऐसे तीर्थ स्थान, देव स्थल और मंदिर हैं, जो अपने आप में न केवल अनूठे हैं, बल्कि इकलौते भी हैं। यहां ऐसी ही एक गणेश मंदिर की चर्चा की गई है, जहां बिना सूंड वाले गणपति विराजते हैं। आइए जानते हैं, कहां है यह मंदिर और इसकी विशेषताएं क्या हैं?

Ganesh-Chaturthi-2024

Ganesh Chaturthi 2024: इस साल गणेश चतुर्थी उत्सव की शुरुआत 7 सितंबर को हुई थी। इस दस दिवसीय गणपति उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी व्रत के दिन 17 सितंबर को हो जाएगा। आइए इस शुभ उत्सव के मौके पर जानते हैं कि देश में कहां पर भगवान गणेश की पूजा मानव रूप में होती है? जी हां, सही पढ़ा आपने, अपने देश में एक ऐसा भी मंदिर है, जहां बिना सूंड वाले गणपति स्थापित हैं यानी यहां विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा मानव रूप में होती है।

विज्ञापन

कहां है यह मंदिर?

भगवान गणेश का नाम लेते ही उनकी लंबी सूंड और बड़े-बड़े कान वाला दिव्य चेहरा नजरों के सामने आ जाता है। ऐसे में कोई उनकी बिना सूंड वाली प्रतिमा या विग्रह की बात करेंगे तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है। बिना सूंड वाली प्रतिमा वाला देश का इकलौता मंदिर गुलाबी नगरी जयपुर में है। कहते हैं, यहां यह मंदिर इस शहर की स्थापना से पहले से है। इस मंदिर को गढ़ गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है, जो जयपुर शहर की उत्तरी दिशा में अरावली पर्वत पर स्थित है।

विज्ञापन

Places to Visit Garh Ganesh Temple | Jaipur Taxi Service

365 सीढ़ियां करती हैं साल प्रतिनिधित्व

अरावली पर्वत पर स्थित यह मंदिर दूर से देखने पर जयपुर के मुकुट की तरह दिखाई देता है। कहा जाता है कि गढ़ गणेश का मंदिर राजस्थान के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 500 मीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसके लिए सीढ़ियों की संख्या 365 है। मान्यता है ये सीढ़ियां साल के 365 दिनों का प्रतिनिधित्व करने के लिए बनाई गई हैं।

विज्ञापन

किसने की थी स्थापना?

अरावली पर्वत पर गढ़ गणेश की स्थापना महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने की थी, जो जयपुर के संस्थापक भी थे। मंदिर की स्थापना जयपुर शहर की नींव रखने से पहले की गई थी। कहते हैं कि इस मंदिर की स्थापना तांत्रिक विधि से की गयी थी। इससे जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस मंदिर में भगवान गणेश का मुंह जयपुर शहर की ओर किया हुआ है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि प्रथम पूज्य गणपति की नजर पूरे शहर पर बनी रहे।

विज्ञापन

गढ़ गणेश मंदिर | Garh Ganesh Temple Jaipur In Hindi.

सवाई जयसिंह द्वितीय ने किया था अश्वमेध यज्ञ

इतिहास के अनुसार, यह मंदिर जिस पहाड़ी पर स्थित है, उसकी तलहटी में ही सवाई जयसिंह द्वितीय ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया था, जिसके बाद इस मंदिर की स्थापना हुई और उसके बाद ही जयपुर शहर की नींव पड़ी।

विज्ञापन

क्यों स्थापित है यहां बिना सूंड वाले गणेश की मूर्ति?

यह सवाल आपके मन में उठ रहा होगा कि यहां बिना सूंड वाले गणेश की मूर्ति क्यों स्थापित है? दरअसल, यहां ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां भगवान गणेश की जो मूर्ति है, वह उनके उस बाल स्वरूप है, जिनका युद्ध अभी भगवान शिव से नहीं हुआ था। भगवान गणेश का शिवजी युद्ध होने से पहले का रूप मानव स्वरूप था।

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ