हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Tiger ShroffCJP ProtestGyanesh KumarBigg Boss 20

WhatsApp चलाने के लिए फोन में SIM रखना होगा जरूरी? जानें SIM Binding का पूरा नियम, 1 जनवरी से होगा लागू

WhatsApp और Telegram इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ा बदलाव होने वाला है. सरकार के SIM Binding नियम के बाद फोन से SIM निकालकर WhatsApp चलाना मुश्किल हो सकता है. जानिए कब से लागू हो सकता है यह नियम और किन यूजर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर.

विज्ञापन
1 जनवरी 2027 से SIM Binding के नियम लागू होंगे. (Image Credit-AI)

अगर आप WhatsApp, Telegram या दूसरे मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं और कई बार फोन से SIM निकालने के बाद भी इन ऐप्स को चलाते रहते हैं, तो आने वाले दिनों में आपके लिए नियम बदल सकते हैं. साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बदलाव कर रही है. नए नियम के तहत जिस मोबाइल नंबर से आपका मैसेजिंग ऐप अकाउंट जुड़ा है, उसका सक्रिय SIM उसी फोन में रखना जरूरी हो सकता है. इस व्यवस्था को SIM Binding कहा जा रहा है. इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो बिना SIM के Wi-Fi के जरिए WhatsApp या दूसरे मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करते हैं.

क्या है SIM Binding का नियम?

SIM Binding को आसान भाषा में समझें तो जिस मोबाइल नंबर से आपने किसी मैसेजिंग ऐप पर अकाउंट बनाया है, उससे जुड़ा सक्रिय SIM उसी फोन में मौजूद होना चाहिए, जिस पर आप उस ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी SIM और मैसेजिंग ऐप अकाउंट के बीच सीधा कनेक्शन बनाए रखने की कोशिश की जाएगी.

दूरसंचार विभाग (DoT) ने नवंबर 2025 में WhatsApp, Telegram और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स को SIM Binding लागू करने का निर्देश दिया था. सरकार का मानना है कि इससे मोबाइल नंबर और मैसेजिंग अकाउंट के बीच संबंध को ज्यादा मजबूत किया जा सकेगा और नंबर के गलत इस्तेमाल से होने वाली धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी.

विज्ञापन

अभी कैसे काम करता है WhatsApp और Telegram?

फिलहाल कई मैसेजिंग ऐप्स में मोबाइल नंबर से अकाउंट वेरिफाई करने के बाद फोन से SIM निकाल देने पर भी ऐप चलता रहता है. यानी एक बार नंबर वेरिफाई होने के बाद यूजर Wi-Fi की मदद से बिना SIM के भी चैटिंग कर सकता है.

SIM Binding लागू होने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव हो सकता है. जिस नंबर से अकाउंट जुड़ा है, उसका सक्रिय SIM उसी डिवाइस में मौजूद रखना जरूरी हो सकता है. ऐसे में फोन से SIM निकालकर लंबे समय तक WhatsApp या दूसरे मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करना आसान नहीं रहेगा.

विज्ञापन

कब से लागू हो सकता है यह नियम?

शुरुआत में कंपनियों को SIM Binding से जुड़े बदलाव करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया था. हालांकि, तकनीकी चुनौतियों और ऐप कंपनियों की मांग के बाद इस समयसीमा को आगे बढ़ाया गया. अप्रैल 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, दूरसंचार विभाग ने कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया है. ऐसे में 1 जनवरी 2027 को इसकी अगली समयसीमा के तौर पर देखा जा रहा है.

किन-किन ऐप्स पर पड़ेगा असर?

SIM Binding का असर सिर्फ WhatsApp और Telegram तक सीमित नहीं रहेगा. इसके दायरे में Snapchat, Signal, ShareChat, Arattai, Josh और JioChat जैसे दूसरे मैसेजिंग ऐप्स भी शामिल हैं.

विज्ञापन

किन यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है?

इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो Wi-Fi के जरिए बिना SIM वाले टैबलेट या दूसरे डिवाइस पर मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करते हैं. विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों, बार-बार फोन बदलने वाले यूजर्स और एक ही फोन में कई SIM कार्ड इस्तेमाल करने वालों को भी नए नियम के बाद कुछ बदलावों का सामना करना पड़ सकता है. 

खासकर वे लोग जो फोन से SIM निकालकर सिर्फ Wi-Fi की मदद से WhatsApp चलाते हैं, उन्हें अपना तरीका बदलना पड़ सकता है. नियम लागू होने के बाद सक्रिय SIM को उसी फोन में रखना जरूरी हो सकता है.

विज्ञापन

WhatsApp Web को लेकर क्या बदला है?

WhatsApp Web के इस्तेमाल को लेकर भी नियमों में बदलाव किए गए हैं. पहले हर 6 महीने में  Web Session को लॉग आउट करने की बात सामने आई थी, लेकिन अब ऐसा करना हर स्थिति में अनिवार्य नहीं है.

अब Web Session को लॉग आउट करने का फैसला जोखिम के आधार पर किया जाएगा. यानी हर यूजर को एक तय छह घंटे की अवधि के बाद अपने आप लॉग आउट होने की जरूरत नहीं होगी. इससे कंप्यूटर पर WhatsApp इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को कुछ राहत मिल सकती है.

विज्ञापन

क्या SIM Binding से साइबर फ्रॉड पूरी तरह रुक जाएगा?

SIM Binding से मोबाइल नंबर और मैसेजिंग अकाउंट के बीच कनेक्शन बनाए रखने में मदद मिल सकती है. इससे फर्जी अकाउंट और मोबाइल नंबर के गलत इस्तेमाल से होने वाली साइबर धोखाधड़ी के कुछ मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि सिम बाइंडिग लागू होने के बाद हर तरह का साइबर फ्रॉड खत्म हो जएगा. ठगी से बचने के लिए यूजर्स को भी सावधानी बरतनी होगी. अनजान लिंक पर क्लिक करने, किसी के साथ OTP शेयर करने और संदिग्ध मैसेज का जवाब देने में हमेशा बचना चाहिए.

यूजर्स को अभी क्या करना चाहिए?

फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि अपने मैसेजिंग ऐप से जुड़े मोबाइल नंबर और SIM की जानकारी सही रखें. अगर आप फोन से SIM निकालकर WhatsApp, Telegram या दूसरे ऐप्स चलाते हैं, तो आने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी होगा.

विज्ञापन

नियम लागू होने की तारीख और हर ऐप में होने वाले बदलाव अलग हो सकते हैं. इसलिए ऐप कंपनियों की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक अपडेट को देखते रहें. SIM Binding का मुख्य उद्देश्य मोबाइल नंबर और मैसेजिंग अकाउंट के बीच संबंध को मजबूत करना और साइबर फ्रॉड के कुछ तरीकों पर लगाम लगाना है.

ये भी पढ़ें- एक व्यक्ति कितने SIM कार्ड रख सकता है? जानें भारत में क्या है इसकी लिमिट

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola