फेक अकाउंट्स पर लगाम की तैयारी में सरकार, KYC के बिना नहीं चलेगा Facebook-Instagram!

क्या अब सोशल मीडिया चलाने के लिए भी KYC जरूरी हो जाएगा? सरकार एक बड़े फैसले की तैयारी में है, जिससे फर्जी अकाउंट्स पर लगाम लग सकती है लेकिन आपकी प्राइवेसी पर सवाल भी खड़े हो सकते हैं. अगर ये नियम लागू हुआ तो ऑनलाइन दुनिया पूरी तरह बदल सकती है.

Social Media

सोशल मीडिया पर KYC अनिवार्य करने की तैयारी में सरकार. (Photo-Pexels)

KYC for Social Media Accounts: सोशल मीडिया आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके साथ जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन फ्रॉड और महिलाओं-बच्चों के साथ होने वाले साइबर अपराध अब गंभीर चिंता बन गए हैं. इसी बीच एक बड़ा बदलाव सामने आ सकता है. सरकार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए KYC अनिवार्य करने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा होता है, तो डिजिटल दुनिया पहले जैसी नहीं रहेगी.

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सोशल मीडिया पर KYC की तैयारी

भारत में सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए KYC बेस्ड सिस्टम लागू करने की सिफारिश की गई है. यह सुझाव एक संसदीय समिति ने दिया है, जिसका उद्देश्य ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाना है, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए.

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अकाउंट बनाने से पहले वेरिफिकेशन जरूरी

अगर यह नियम लागू होता है, तो किसी भी प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने या लॉगिन करने से पहले यूजर्स को अपनी पहचान वेरिफाई करनी होगी. इसका मतलब है कि अब गुमनाम रहकर सोशल मीडिया चलाना आसान नहीं होगा.

फर्जी अकाउंट्स पर लगेगी लगाम

रिपोर्ट में बताया गया है कि फेक प्रोफाइल आज सबसे बड़ी समस्या बन चुके हैं. इनका इस्तेमाल धोखाधड़ी, साइबर स्टॉकिंग और पहचान चोरी जैसे अपराधों में हो रहा है. KYC लागू होने से ऐसे मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है.

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उम्र की सख्त जांच का प्रस्ताव

समिति ने यह भी कहा है कि प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की उम्र की सही जांच करनी चाहिए. खासकर डेटिंग और गेमिंग ऐप्स पर नाबालिगों को रोकने के लिए समय-समय पर वेरिफिकेशन जरूरी हो सकता है.

AI से बढ़ रहे खतरे

नई तकनीकों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ने ऑनलाइन खतरे को और बढ़ा दिया है. डीपफेक और बॉट्स के जरिए गलत जानकारी तेजी से फैल रही है, जिससे सख्त नियमों की जरूरत और ज्यादा महसूस हो रही है.

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प्राइवेसी पर भी उठ रहे सवाल

हालांकि KYC से सुरक्षा बढ़ सकती है, लेकिन इससे यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर चिंता भी बढ़ी है. लोगों का निजी डेटा सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है, खासकर छोटे प्लेटफॉर्म्स के लिए. वहीं अगर यह सिस्टम लागू होता है, तो सोशल मीडिया पर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. गुमनाम अकाउंट्स की जगह वेरिफाइड प्रोफाइल बढ़ेंगे, जिससे ऑनलाइन दुनिया ज्यादा सुरक्षित लेकिन कम प्राइवेट हो सकती है.

सरकार की क्या सोच 

सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है. अगर इसे लागू किया जाता है, तो बिना KYC के सोशल मीडिया अकाउंट बनाना या इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है, जिससे पूरे डिजिटल सिस्टम में बड़ा बदलाव आ सकता है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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