पानी गर्म करने के लिए रॉड सही या गीजर? किससे आएगा ज्यादा बिजली बिल, समझ लें हिसाब

सर्दियों में पानी गर्म करने के लिए आप इलेक्ट्रिक रॉड इस्तेमाल करते हैं या गीजर? दोनों में बिजली की खपत को लेकर अक्सर लोगों में कन्फ्यूजन रहता है. आसान हिसाब से समझिए किससे आपका बिजली का बिल ज्यादा बढ़ सकता है और पानी गर्म करते समय कैसे बचाएं बिजली.

Geyser VS Electric Rod

सर्दियां आते ही पानी गर्म करने के लिए घरों में गीजर और इलेक्ट्रिक रॉड का इस्तेमाल शुरू हो जाता है. (Image Credit-AI)

सर्दियों में गर्म पानी के लिए घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल इलेक्ट्रिक रॉड और गीजर का होता है. कुछ लोग बाल्टी में रॉड डालकर पानी गर्म करना पसंद करते हैं, तो कई घरों में गीजर लगा होता है. अक्सर यह सवाल भी उठता है कि इन दोनों में से आखिर कौन ज्यादा बिजली खाता है. कई लोगों को लगता है कि रॉड सस्ती है तो इसका बिजली बिल भी कम आएगा, जबकि गीजर को ज्यादा बिजली खर्च करने वाला माना जाता है. लेकिन असल तस्वीर थोड़ी अलग है. बिजली की खपत सिर्फ रॉड या गीजर पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी क्षमता, पानी की मात्रा और इस्तेमाल के समय पर भी निर्भर करती है.

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पानी गर्म करने वाली रॉड कितनी बिजली लेती है?

इलेक्ट्रिक रॉड को बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. बाजार में आमतौर पर 1,000 वॉट, 1,500 वॉट और 2,000 वॉट की रॉड मिलती हैं. रॉड जितने ज्यादा वॉट की होगी, लगातार चलने पर उतनी ही ज्यादा बिजली खर्च करेगी.

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उदाहरण के लिए,  अगर आपके पास 1,500 वॉट यानी 1.5 किलोवॉट की रॉड है और वह एक घंटे तक चलती है, तो करीब 1.5 यूनिट बिजली खर्च होगी. वहीं, आधे घंटे तक चलाने पर खपत करीब 0.75 यूनिट होगी. हालांकि, पानी गर्म होने में लगने वाला समय उसकी मात्रा और शुरुआती तापमान पर भी निर्भर करता है.

गीजर कितनी बिजली खर्च करता है?

इलेक्ट्रिक गीजर में पानी टैंक के अंदर गर्म होता है. घरों में आमतौर प 1500 से 3000 वॉट तक के गीजर देखने को मिलते है. कई गीजर में थर्मोस्टेट भी दिया जाता है, जो पानी तय तापमान तक पहुंचने के बाद हीटिंग को बंद कर सकता है. इसलिए गीजर की रेटेड क्षमता देखकर ही यह नहीं कहा जा सकता कि हर इस्तेमाल में वह उतनी ही बिजली खर्च करेगा.

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मान लीजिए आपके घर में 2,000 वॉट यानी 2 किलोवॉट का गीजर है. अगर उसका हीटिंग एलिमेंट एक घंटे तक लगातार चलता है, तो करीब 2 यूनिट बिजली खर्च होगी. लेकिन सामान्य इस्तेमाल में हीटिंग एलिमेंट लगातार एक घंटे तक चलता रहे, यह जरूरी नहीं है. पानी तय तापमान तक पहुंचने के बाद थर्मोस्टेट हीटिंग बंद कर सकता है.

रॉड और गीजर में कौन ज्यादा बिजली खाता है?

इसका जवाब सिर्फ यह देखकर नहीं दिया जा सकता कि आपके पास रॉड है या गीजर. असल बिजली खपत उपकरण की वॉट क्षमता और उसके चलने के समय पर निर्भर करती है. उदाहरण के लिए, 1,500 वॉट की रॉड और 2,000 वॉट का गीजर दोनों अगर लगातार एक घंटे चलें, तो गीजर ज्यादा बिजली खर्च करेगा.

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क्या समान पानी गर्म करने पर भी खपत अलग हो सकती है?

अगर रॉड और गीजर से एक जैसी मात्रा में पानी को एक ही तापमान तक गर्म किया जाए, तो पानी को दी जाने वाली गर्मी सामान्य स्थिति में लगभग समान होगी. अंतर उपकरण की क्षमता, हीटिंग की दक्षता, गर्मी के नुकसान और इस्तेमाल के तरीके से आ सकता है. इसलिए यह कहना सही नहीं है कि रॉड हर स्थिति में सस्ती होगी या गीजर हमेशा ज्यादा बिजली खाएगा.

1,500 वॉट की रॉड का एक घंटे का खर्च कितना होगा?

मान लेते हैं कि आपके इलाके में बिजली की कीमत 8 रुपये प्रति यूनिट है. अगर 1,500 वॉट यानी 1.5 किलोवॉट की रॉड लगातार एक घंटे चलती है, तो करीब 1.5 यूनिट बिजली खर्च होगी. इस हिसाब से एक घंटे का खर्च करीब 12 रुपये आएगा.

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2,000 वॉट के गीजर का एक घंटे का खर्च कितना होगा?

2,000 वॉट यानी 2 किलोवॉट का गीजर अगर हीटिंग के दौरान लगातार एक घंटे चलता है, तो करीब 2 यूनिट बिजली खर्च होगी. 8 रुपये प्रति यूनिट की दर से इसका खर्च करीब 16 रुपये होगा.

बिजली का बिल कम करने के लिए क्या करें?

पानी गर्म करते समय जरूरत से ज्यादा पानी गर्म न करें. गीजर में जरूरत से ज्यादा तापमान सेट करने से भी बचें. पानी गर्म होने के बाद अगर तुरंत गर्म पानी की जरूरत नहीं है, तो गीजर बंद कर दें. घर में लोगों की संख्या और रोजाना गर्म पानी की जरूरत के हिसाब से ही गीजर की क्षमता चुनना भी बिजली बचाने में मदद कर सकता है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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