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CJP Protest: जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस की वर्दी पर लगे ये छोटे कैमरे क्या हैं? अंधेरे में भी करेंगे रिकॉर्डिंग, जानें कैसे करते हैं काम

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी वर्दी पर खास बॉडी कैमरे लगाए नजर आ रहे हैं. आखिर कैसे काम करते हैं ये कैमरे और कैसे पुलिस के साथ आम लोगों की सुरक्षा और जवाबदेही बढ़ा सकते हैं? जानिए पूरी जानकारी.

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CJP के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के जवान बॉडी कैमरा के साथ तैनात है. (Image Credit-ANI/AI)

CJP Protest: आज (10 अक्टूबर 2026) दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े इंतजाम किए हैं. इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए जमीनी स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों को नाइट-विजन बॉडी कैमरों (Body-Worn Cameras) से लैस किया गया है. ये सामान्य कैमरे नहीं, बल्कि बॉडी-वॉर्न कैमरे (Body-Worn Cameras) हैं, इनकी मदद से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सकता है. खास बात यह है कि दिल्ली पुलिस जिन कैमरों का इस्तेमाल कर रही है, वे कम रोशनी और अंधेरे में भी रिकॉर्डिंग करने में सक्षम हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये कैमरे कैसे काम करते हैं, इनमें क्या खासियत होती है.

क्या होते हैं बॉडी-वॉर्न कैमरे?

बॉडी वॉर्न कैमरे छोटे और हल्के डिजिटल कैमरे होते हैं, जिन्हें पुलिसकर्मी अपनी वर्दी पर लगाते हैं. इन्हें आमतौर पर छाती या कंधे के पस लगाया जाता है, ताकि सामने होने वाली गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सके. इन कैमरों में वीडियो के साथ ऑडियो रिकॉर्ड करने की सुविधा भी हो सकती है. यानी किसी घटना के दौरान क्या हुआ और उस समय क्या बातचीत हुई इसका रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है. इनका इस्तेमाल भीड़ को नियंत्रित करने, ट्रैफिक व्यवस्था संभालने और पुलिस की दूसरी ड्यूटी के दौरान भी किया जा सकता है.

एक बटन दबाते ही शुरू हो सकती है रिकॉर्डिंग

बॉडी कैमरों को इस तरह बनाया जाता है कि पुलिसकर्मी जरूरत पड़ने पर आसानी से रिकॉर्डिंग शुरू कर सकें. कैमरे के मॉडल और उसकी सेटिंग के आधार पर रिकॉर्डिंग बटन दबाकर इसे शुरू किया जा सकता है. इसके बाद कैमरा अपने सामने की गतिविधियों को वीडियो के रूप में रिकॉर्ड करता है. अगर उसमें ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी है, तो आसपास हो रही बातचीत भी रिकॉर्ड हो सकती है. इससे किसी घटना के बारे में बाद में जानकारी जुटाने में मदद मिलती है.

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अंधेरे में भी कैसे रिकॉर्ड करते हैं ये कैमरे?

दिल्ली पुलिस के इस्तेमाल में आए कैमरों की खासियत यह बताई गई है कि वे कम रोशनी और अंधेरे में भी काम कर सकते हैं. ऐसे कैमरों में नाइट-विजन या लो-लाइट रिकॉर्डिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इससे रात के समय या कम रोशनी वाली जगहों पर भी वीडियो रिकॉर्ड करना आसान हो सकता है. हालांकि, रिकॉर्डिंग कितनी साफ होगी, यह कैमरे की तकनीक, आसपास की रोशनी और दूसरी परिस्थितियों पर निर्भर करता है. 

रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने में कैसे मदद मिलती है?

बॉडी कैमरे से रिकॉर्ड हुए वीडियो को डिवाइस की मेमोरी या उससे जुड़े सिस्टम में सुरक्षित रखा जा सकता है. कुछ सिस्टम में फुटेज को केंद्रीय सर्वर पर अपलोड करने की सुविधा भी होती है. रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने, उस तक पहुंच सीमित करने और उसमें बदलाव का पता लगाने के लिए अलग-अलग तकनीकी इंतजाम किए जा सकते हैं. हालांकि, यह सुविधा हर कैमरे में एक जैसी नहीं होती. इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि हर बॉडी कैमरे की रिकॉर्डिंग अपने आप सर्वर पर अपलोड हो जाती है या उसे किसी भी स्थिति में बदला नहीं जा सकता.

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पुलिस और आम लोगों, दोनों के लिए कैसे मददगार?

प्रदर्शन या भीड़ के दौरान कभी-कभी पुलिस और लोगों के बीच बहस, धक्का-मुक्की या झड़प की स्थिति बन जाती है. ऐसे में अलग-अलग पक्ष घटना को लेकर अलग दावे कर सकते हैं. बॉडी कैमरे की रिकॉर्डिंग से यह समझने में मदद मिल सकती है कि मौके पर क्या हुआ था. अगर पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगता है या किसी व्यक्ति पर हिंसा करने का आरोप लगाया जाता है, तो फुटेज जांच के लिए उपयोगी साबित हो सकती है. इससे पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने और नागरिकों की शिकायतों की जांच करने में भी मदद मिल सकती है.

बॉडी कैमरे क्यों बन रहे हैं पुलिसिंग का अहम हिस्सा?

बॉडी-वॉर्न कैमरे पुलिस की ड्यूटी के दौरान होने वाली घटनाओं का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद करते हैं. इनसे शिकायतों की जांच, पुलिसकर्मियों की जवाबदेही और विवादों के वास्तविक घटनाक्रम को समझने में सहायता मिल सकती है. दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान नाइट-विजन बॉडी कैमरों का इस्तेमाल इसी तकनीक की उपयोगिता को सामने लाता है. हालांकि, इनका वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि रिकॉर्डिंग कितनी सही तरीके से की जाती है, उसे सुरक्षित कैसे रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर उसकी निष्पक्ष जांच कैसे होती है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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