दिल्ली NCR में सर्दियों की शुरुआत होते ही प्रदूषण लोगों की परेशानी बढ़ाने लगता है. हवा में PM2.5, PM10 और दूसरे हानिकारक कणों की मात्रा बढ़ने से सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है. ऐसे में लोग घर के अंदर की हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर खरीदने का विकल्प तलाश रहे हैं. लेकिन बाजार में कई ब्रांड और अलग अलग कीमतों वाले मॉडल मौजूद हैं. ऐसे में सिर्फ कीमत या कंपनी का नाम देखकर एयर प्यूरीफायर खरीदना सही फैसला नहीं है. गलत मशीन खरीदने पर न तो कमरे की हवा ठीक से साफ होगी और न ही आपके पैसे का पूरा फायदा मिलेगा. अगर आप भी घर या ऑफिस के लिए एयर प्यूरीफायर लेने की सोच रहे हैं, तो खरीदने से पहले इन 7 जरूरी बातों को जरूर समझ लें.
एयर प्यूरीफायर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
1. कमरे के साइज के हिसाब से चुनें एयर प्यूरीफायर
एयर प्यूरीफायर खरीदते समय सबसे पहले यह देखें कि आपका कमरा कितना बड़ा है. हर मशीन एक तय एरिया की हवा साफ करने के हिसाब से बनाई जाती है. छोटे कमरे के लिए कम क्षमता वाला एयर प्यूरीफायर काम कर सकता है, लेकिन बड़े हॉल या ऑफिस के लिए ज्यादा क्षमता वाली मशीन की जरूरत होगी.
इसके लिए CADR यानी Clean Air Delivery Rate की जानकारी जरूर लें. यह बताता है कि एयर प्यूरीफायर कितनी तेजी से साफ हवा दे सकता है. 150 से 200 वर्ग फीट के कमरे के लिए कम से कम 250 क्यूबिक मीटर प्रति घंटे का CADR अच्छा माना जाता है.
2. True HEPA फिल्टर वाला मॉडल खरीदें
एयर प्यूरीफायर में फिल्टर सबसे अहम हिस्सा होता है. इसलिए खरीदते समय देखें कि उसमें True HEPA फिल्टर दिया गया है या नहीं. यह हवा में मौजूद धूल, धुएं और पराग जैसे बेहद छोटे कणों को पकड़ने में मदद करता है.
अच्छी क्वालिटी का HEPA फिल्टर 0.3 माइक्रोन तक के 99.97 फीसदी कणों को पकड़ने में सक्षम होता है. ध्यान रखें कि सिर्फ HEPA like या HEPA type लिखा होने का मतलब यह नहीं है कि फिल्टर भी उतना ही प्रभावी होगा. इसलिए इसकी सही स्पेसिफिकेशन जरूर जांचें.
3. ACH रेटिंग को नजरअंदाज न करें
एयर प्यूरीफायर खरीदते समय ACH यानी Air Changes per Hour की जानकारी भी लेनी चाहिए. इससे पता चलता है कि मशीन एक घंटे में कमरे की हवा को कितनी बार फिल्टर कर सकती है. सामान्य घरों के लिए 4 से 5 ACH ठीक माना जाता है.
वहीं, अगर आपके घर में बच्चे या बुजुर्ग हैं, तो 6 से 8 ACH वाला मॉडल बेहतर विकल्प हो सकता है. हालांकि, सही ACH चुनने के लिए कमरे का साइज और एयर प्यूरीफायर की क्षमता दोनों देखना जरूरी है.
4. फिल्टर की कीमत और उसकी लाइफ जरूर जांचें
कई लोग एयर प्यूरीफायर खरीदते समय सिर्फ मशीन की कीमत देखते हैं, लेकिन बाद में फिल्टर बदलने का खर्च उनकी जेब पर भारी पड़ सकता है. इसलिए खरीदने से पहले पता करें कि फिल्टर कितने समय तक चलेगा और नया फिल्टर कितने रुपये में मिलेगा.
प्रदूषण ज्यादा होने पर फिल्टर जल्दी गंदा हो सकता है. दिल्ली जैसे शहरों में इसे 3 से 6 महीने में बदलने की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, फिल्टर की वास्तविक लाइफ इस्तेमाल और आसपास के प्रदूषण के स्तर पर भी निर्भर करती है.
5. एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर भी है जरूरी
सिर्फ HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर खरीदना काफी नहीं है. अगर आप घर के अंदर मौजूद बदबू और कुछ हानिकारक गैसों को भी कम करना चाहते हैं, तो एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर वाला मॉडल चुन सकते हैं.
यह फिल्टर हवा में मौजूद कुछ गैसों और गंध को सोखने में मदद करता है. HEPA और एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर का कॉम्बिनेशन घर के अंदर की हवा को साफ रखने में उपयोगी हो सकता है.
6. आवाज और स्मार्ट फीचर्स पर भी दें ध्यान
अगर आप रात में सोते समय भी एयर प्यूरीफायर चलाना चाहते हैं, तो खरीदने से पहले उसका नॉइज लेवल जरूर चेक करें. ज्यादा आवाज करने वाली मशीन नींद में परेशानी पैदा कर सकती है. ऐसे में 30 डेसिबल से कम आवाज वाला स्लीप मोड आरामदायक हो सकता है.
इसके अलावा ऐप कंट्रोल, AQI डिस्प्ले और टाइमर जैसे फीचर्स भी काम आते हैं. इनकी मदद से आप मशीन की सेटिंग और कमरे की हवा की क्वालिटी पर आसानी से नजर रख सकते हैं.
7. कीमत के साथ मेंटेनेंस का खर्च भी समझें
एयर प्यूरीफायर खरीदते समय सिर्फ यह न देखें कि कौन सा मॉडल सस्ता है या किस ब्रांड की मशीन महंगी है. उसकी फिल्टर क्वालिटी, कमरे की कवरेज, वारंटी और सर्विस सेंटर की जानकारी भी जरूर लें.
कई बार कम कीमत वाला एयर प्यूरीफायर खरीदना बाद में महंगा पड़ सकता है, क्योंकि उसके फिल्टर की कीमत ज्यादा होती है या उन्हें बार बार बदलना पड़ता है. इसलिए मशीन की शुरुआती कीमत के साथ उसके रखरखाव पर आने वाले खर्च का भी हिसाब लगा लें.
हालांकि, एयर प्यूरीफायर बाहरी प्रदूषण से पूरी तरह बचाव नहीं करता, इसलिए कमरे में वेंटिलेशन और दूसरी जरूरी सावधानियों का भी ध्यान रखना चाहिए.