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सोशल मीडिया पर AI क्रिएटर्स का दौर खत्म? सरकार के नए नियम और सख्ती ऐसे बनेंगे आफत

AI से तैयार किए गए कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने नए नियम लागू किए हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया कंपनियां इन्हें जमीन पर कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से लागू करती हैं. लेकिन इतना तय है कि इन बदलावों का सीधा असर AI कंटेंट क्रिएटर्स पर पड़ेगा और कई लोगों के लिए आगे की राह मुश्किल हो सकती है.

AI कंटेंट पर सरकार का सख्त एक्शन. (Photo- News24 Gfx)

New AI Content Rules In India: सोशल मीडिया पर अब कुछ भी पोस्ट करना पहले जैसा आसान नहीं रहने वाला. सरकार ने AI से बने फोटो, वीडियो और ऑडियो को लेकर सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है. 20 फरवरी 2026 से ऐसे हर कंटेंट पर साफ-साफ AI का लेबल लगाना जरूरी होगा. इसका मकसद डीपफेक, फेक वीडियो और भ्रामक जानकारी पर रोक लगाना है, ताकि यूजर्स को असली और नकली के बीच फर्क समझ आ सके.

AI कंटेंट पर लेबल होगा अनिवार्य

नए नियमों के मुताबिक, जो भी फोटो, वीडियो या ऑडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाया जाएगा, उस पर स्पष्ट लेबल दिखाना होगा. सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर सही जानकारी दे रहा है या नहीं. अगर कोई भ्रामक या गैरकानूनी AI कंटेंट मिलता है, तो उसे तीन घंटे के भीतर हटाना भी अनिवार्य होगा.

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए बढ़ी जिम्मेदारी

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इन नियमों के बाद इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स का काम काफी बदल जाएगा. अब सिर्फ यूजर की जानकारी पर भरोसा नहीं किया जा सकता. प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी तरीके से भी जांच करनी होगी कि कंटेंट में AI का कितना इस्तेमाल हुआ है. चुनौती यह है कि आजकल कई डीपफेक इतने असली लगते हैं कि सिस्टम भी उन्हें पहचानने में गलती कर सकता है.

तीन घंटे की डेडलाइन बनी बड़ी चुनौती

सरकार ने आपत्तिजनक AI कंटेंट हटाने के लिए तीन घंटे की समय सीमा तय की है. इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर लाखों पोस्ट हर मिनट अपलोड होते हैं. ऐसे में हर शिकायत पर इतनी तेजी से कार्रवाई करना आसान नहीं होगा. कंपनियों को इसके लिए बेहतर टेक्नोलॉजी और बड़ी मॉडरेशन टीम की जरूरत पड़ेगी.

AI कंटेंट क्रिएटर्स पर पड़ेगा सीधा असर

जो लोग AI से रील्स, फेसस्वैप वीडियो या फेक वॉइस बनाकर लोकप्रिय हो रहे थे, अब उन्हें सावधान रहना होगा. हर AI कंटेंट पर लेबल दिखेगा, जिससे दर्शकों को पता चल जाएगा कि यह असली नहीं है. अगर कोई जानबूझकर AI का इस्तेमाल छिपाता है, तो उसके अकाउंट पर स्ट्राइक या स्थायी बैन भी लगाया जा सकता है.

बिना अनुमति चेहरा या आवाज इस्तेमाल करना पड़ेगा महंगा

नए नियमों के तहत किसी व्यक्ति का चेहरा या आवाज बिना अनुमति AI के जरिए इस्तेमाल करना कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है. जो चीज आज मजाक या ट्रेंड लगती है, वह आगे चलकर गंभीर मामला बन सकती है. इसलिए क्रिएटर्स को अब कंटेंट बनाते समय ज्यादा जिम्मेदारी दिखानी होगी.

ये भी पढ़ें- डीपफेक, AI कंटेंट पर सख्ती… 20 फरवरी से लागू होंगे नए नियम, 3 घंटे में हटाना होगा भ्रामक कंटेंट

यूजर्स का एक्सपीरियंस भी बदलेगा

अब सोशल मीडिया फीड में कई पोस्ट पर AI का टैग दिखाई देगा. इससे यूजर्स को समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सा कंटेंट असली है और कौन-सा मशीन से बनाया गया है. इससे बिना सोचे-समझे शेयर करने की आदत कम हो सकती है, हालांकि यह भी संभव है कि समय के साथ लोग इन लेबल्स को नजरअंदाज करने लगें.

प्लेटफॉर्म्स के बिजनेस पर भी असर

AI कंटेंट आज सोशल मीडिया की ग्रोथ का बड़ा हिस्सा बन चुका है. अगर हर AI पोस्ट पर सख्त जांच और लेबलिंग होगी, तो एंगेजमेंट के पैटर्न बदल सकते हैं. हालांकि इससे ब्रांड्स और विज्ञापनदाताओं का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि फेक और भ्रामक कंटेंट पर नियंत्रण मजबूत होगा.

सोशल मीडिया का माहौल बदलेगा

सरकार का साफ संदेश है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा जिम्मेदारी लेनी होगी. डीपफेक, फर्जी दस्तावेज और बिना सहमति वाली तस्वीरों पर पहले जैसी ढील नहीं मिलेगी. कंपनियों को भारत के लिए अलग सिस्टम और बेहतर निगरानी व्यवस्था तैयार करनी होगी.

इन नियमों को लागू करना तकनीकी रूप से आसान नहीं है. लेबल लगे कंटेंट को डाउनलोड करके दोबारा अपलोड किया जा सकता है. वहीं AI डिटेक्शन सिस्टम भी अभी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं और कई बार असली और नकली में फर्क करने में गलती कर देते हैं. बावजूद इसके, यह कदम सोशल मीडिया को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

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