CCTV at Medical Stores: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर मिलने वाली दवाओं की मॉनिटरिंग को मजबूत करने और उनकी गैर-कानूनी बिक्री को रोकने के लिए रिटेल मेडिकल स्टोर पर सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी करने का प्रस्ताव दिया है. इस ड्राफ्ट प्रस्ताव के तहत, शेड्यूल H, H1 और X दवाओं का कारोबार करने वाली फार्मेसियों को सर्विलांस सिस्टम लगाना होगा और 3 महीने तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखनी होगी.
CCTV प्रपोजल के पीछे क्या वजह है?
मंत्रालय का कहना है कि इस कदम का मकसद प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं, खासकर उन दवाओं पर कंट्रोल बढ़ाना है जिनका गलत इस्तेमाल हो सकता है या जिनकी लत लग सकती है. शेड्यूल H, H1 और X दवाओं में कई ऐसी दवाएं शामिल हैं जिन्हें कानूनी तौर पर सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही बेचा जा सकता है. इस प्रस्ताव का मकसद इन दवाओं तक गैर-कानूनी पहुंच और उनकी बिक्री से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है. हालांकि, थोक विक्रेताओं को CCTV लगाने की जरूरत से बाहर रखा गया है.
इस विचार पर कई सालों से चर्चा चल रही है. 2021 में ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी ने फार्मेसियों में निगरानी को एक ऐसे तरीके के तौर पर देखा जिससे बच्चों को बिना सही मेडिकल मंजूरी के प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं मिलने से रोका जा सके. कमेटी ने एक डिजिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम बनाने पर भी चर्चा की, जिसके जरिए फार्मासिस्ट प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री की डिटेल जमा कर सकें. एक और प्रपोज्ल में लत लगाने वाली दवाओं की अलग से पहचान करना शामिल था ताकि ऐसी दवाओं का कारोबार करने वाली फार्मेसियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सके.
बच्चों में नशीली दवाओं से चिंता?
ये मुद्दा बच्चों और किशोरों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़ी चिंताओं से भी जुड़ा है. 2019 में प्रकाशित AIIMS के नेतृत्व वाले एक राष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया कि बच्चों में ओपिओइड का इस्तेमाल लगभग 1.8% था, जबकि भांग (कैनाबिस) का इस्तेमाल लगभग 1.9% पाया गया. शराब का इस्तेमाल 1.3% और इनहेलेंट का इस्तेमाल 1.17% था. इन नतीजों से युवाओं में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के पैटर्न में गैर-कानूनी और फार्मास्युटिकल दोनों तरह के पदार्थों की मौजूदगी का पता चला.
केमिस्ट इस प्लान का विरोध क्यों कर रहे हैं?
1. प्रैक्टिकैलिट वजह
फार्मेसी संघों ने देश भर में CCTV सिस्टम लगाने की लागत और प्रैक्टिकैलिटी को लेकर चिंता जताई है. ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स का तर्क है कि छोटी फार्मेसियों को भारी खर्च का सामना करना पड़ सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि रिकॉर्डिंग को 3 महीने तक स्टोर करके रखना होगा.
2. तकनीकी वजह
ग्रामीण इलाकों में रिटेलर्स को बिजली कटौती, खराब कनेक्टिविटी और तकनीकी खराबी जैसी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है. केमिस्टों को डर है कि ऐसी समस्याओं के कारण नियमों का पालन करना मुश्किल हो सकता है, भले ही स्टोर रुल फॉलो करना चाह रहा हो.
3. प्राइवेसी की फिक्र
प्राइवेसी एक और बड़ी चिंता है. केमिस्ट्स का तर्क है कि CCTV कैमरे उन ग्राहकों को रिकॉर्ड कर सकते हैं जो संवेदनशील मेडिकल स्थितियों से जुड़ी दवाएं या हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं. केमिस्टों का कहना है कि मरीज शायद नहीं चाहेंगे कि सर्विलांस फुटेज से उनके आने-जाने की पहचान हो सके.
अब आगे क्या?
CCTV की ये जरूरत, डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं की बिक्री पर बेहतर निगरानी रखने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है. हालांकि, इस प्रपोजल ने एक बहस छेड़ दी है कि सख्त नियमों को लागू करने और छोटी फार्मेसी की आर्थिक स्थिति, तकनीकी सीमाओं और मरीजों की गोपनीयता के बीच कैसे संतुलन बनाया जाए. किसी भी जरूरी सिस्टम के लागू होने से पहले, अंतिम नियम ये तय करेंगे कि इन चिंताओं का समाधान कैसे किया जाएगा.