Cyclones: चक्रवात अर्नब 28 अक्तूबर 2026 को तकरीबन 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराने वाला है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बंगाल की खाड़ी में अरब सागर की तुलना में ज्यादा उष्णकटिबंधीय चक्रवात क्यों आते हैं. इसका कारण समंदर की सतह के तापमान, वायुमंडलीय स्थितियों, नमी की मौजूदी और ओशन सर्कुलेशन में फर्क है. ये दोनों जल क्षेत्र उत्तरी हिंद महासागर का हिस्सा हैं, लेकिन बंगाल की खाड़ी में आमतौर पर चक्रवातों के बनने और उनके तेज होने के लिए ज्यादा अनुकूल स्थितियां होती हैं.
बंगाल की खाड़ी में ज्यादा तूफान आने की वजह
1. समंदर की सतह का गर्म तापमान
ट्रॉपिकल साइक्लोन गर्म समुद्री जल से एनर्जी हासिल करते हैं. बंगाल की खाड़ी में समुद्र की सतह का तापमान अक्सर गर्म रहता है, जिससे तूफानों के बनने के लिए आवश्यक गर्मी और नमी मिलती है. जब समुद्री जल वाष्पित होता है, तो ये वायुमंडल में नमी पहुंचाता है. इस नमी के कंडेंसेशनसे लेटेंट हीट निकलती है, जो बन रहे चक्रवात को और मजबूत करने में मदद करती है. अरब सागर भी इतना गर्म हो सकता है कि वहां ताकतवर चक्रवात बन सकें, खासकर मानसून से पहले और मानसून के बाद के मौसम में.
2. मीठे पानी का आना और ओशन स्ट्रेटिफिकेशन
बंगाल की खाड़ी में गंगा, ब्रह्मपुत्र और इरावदी जैसी नदियों से भारी मात्रा में मीठा पानी आता है, और साथ ही यहां काफी बारिश भी होती है. इससे समुद्र की सतह पर खारापन कम हो जाता है और पानी की एक स्थिर ऊपरी परत बन जाती है. चक्रवात के दौरान, ये परत गहरे पानी से ठंडे पानी को ऊपर आने और मिलने से रोक सकती है. नतीजतन, समुद्र की सतह का तापमान इतना ज्यादा बना रह सकता है कि तूफान को ऊर्जा मिलती रहे. हालांकि, ये असर स्थानीय महासागरीय स्थितियों पर निर्भर करता है और चक्रवातों की ज्यादा संख्या का यही इकलौता कारण नहीं है.
3. अनुकूल वायुमंडलीय हालात
चक्रवात का बनना कई एनवायरनमेंटल फैक्टर्स पर निर्भर करता है, जिनमें ह्यूमिडिटी, विंड शियर और पहले से मौजूद मौसमी हलचल शामिल हैं. जब वर्टिकल विंड शियर कमजोर होता है, तो तूफान ज्यादा असरदार ढंग से एक विकसित हो रही प्रणाली के चारों तरफ जमा हो सकते हैं. मौसमी हवाओं के पैटर्न और मानसून का सर्कुलेशन दोनों एरिया में चक्रवातों के बनने को प्रभावित करते हैं. बंगाल की खाड़ी में अक्सर ऐसी स्थितियां एक साथ बनती हैं जो ट्रॉपिकल साइक्लोन के लिए बहुत अनुकूल होती हैं.
4. भूगोल और तटीय प्रभाव
उत्तरी बंगाल की खाड़ी थोड़ी उथली है और इसका आकार एक कीप जैसा है. इसके तटीय इलाकों में पूर्वी भारत और बांग्लादेश के घनी आबादी वाले क्षेत्र आते हैं. जब चक्रवात जमीन के करीब आते हैं, तो समुद्री पानी तट के अंदर तक आ सकता है, जिससे भीषण बाढ़ आ सकती है. अरब सागर ज्यादा खुला हुआ है, हालांकि यहां भी विनाशकारी चक्रवात आते हैं जो भारत, पाकिस्तान, ओमान और यमन को प्रभावित करते हैं.
क्या अरब सागर में चक्रवातों का खतरा बढ़ रहा है?
हाल के दशकों में अरब सागर में ताकतवर चक्रवातों की संख्या में इजाफा देखा गया है. जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के बढ़ते तापमान का इसमें योगदान हो सकता है, हालांकि कुदरती जलवायु परिवर्तनशीलता की भी इसमें भूमिका होती है. भले ही बंगाल की खाड़ी में तूफान ज्यादा आते हों, लेकिन अरब सागर को सेफ नहीं मान लेना चाहिए.