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कौन हैं 81 साल के लूला डा सिल्वा, जिन्हें चौथी बार मिली है ब्राजील की सत्ता? जानिए भारत के साथ रिश्तों पर कैसा होगा असर

Brazil: दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की सत्ता पर एक बार फिर लूला डा सिल्वा को हासिल हुई है, लेकिन क्या आप इस लेफ्ट नेता के राजनीतिक करियर के बारे में जानते हैं. इस जीत से भारत और ब्राजील के रिश्तों पर कैसे असर पड़ेगा?

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ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा (Photo-X/@LulaOficial)

Who Is Lula da Silva: लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को आमतौर पर ‘लूला’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने 25 अक्टूबर 2026 को हुए रनऑफ चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर ब्राजील के राष्ट्रपति के तौर पर चौथी बार ऐतिहासिक जीत हासिल की है. ब्राजील के इलेक्शन अथॉरिटी के मुताबिक, लूला को कुल वैध वोटों का 51.79% हिस्सा मिला. 27 अक्टूबर 1945 को जन्मे लूला की जिंदगी उतार-चढ़ाव भरी रही है.

लूला का राजनीतिक करियर

पेरनामबुको राज्य के एक गरीब परिवार में जन्मे लूला एक बड़े ट्रेड यूनियन लीडर बनने से पहले ृमेटलवर्कर के तौर पर काम करते थे. उन्होंने 1980 में ब्राजील की ‘वर्कर्स पार्टी’ (PT) की स्थापना में मदद की और देश में लोकतंत्र की तरफ बढ़ते बदलाव के दौरान एक राष्ट्रीय राजनीतिक हस्ती बन गए. राष्ट्रपति पद के लिए कई नाकाम कोशिशों के बाद वो 2002 में चुनाव जीते और 2006 में फिर से चुने गए, जिसके बाद उन्होंने 2010 तक इस पद पर काम किया. वो 2023 में जायर बोल्सोनारो को हराकर सत्ता में लौटे और अब 2026 में फिर से जीत हासिल की है.

पार्टी की विचारधारा

लूला डा सिल्वा की ‘वर्कर्स पार्टी’ खास तौर से लेफ्ट और प्रोग्रेसिव विचारधारा को फॉलो करती है. ये दल मजदूरों के हक, सामाजिक भलाई, गरीबी कम करने और आर्थिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्र की मजबूत भूमिका पर जोर देती है. इसके अलावा, पार्टी पर्यावरण संरक्षण और असमानता को कम करने वाली नीतियों का भी समर्थन करती है. लूला इन प्रायोरिटीज के साथ-साथ ट्रेड, इंटरनेशनल इंवेस्टमेंट और व्यापारिक साझेदारों के साथ तालमेल बिठाकर चलते हैं.

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अब तक के बड़े काम और नीतियां

अपने पहले 2 कार्यकालों के दौरान, लूला ने सोशल वेलफेयर प्रोग्राम का विस्तार किया, जिसमें ‘बोल्सा फैमिलिया’ भी शामिल है, जो कम इनकम वाले परिवारों को आर्थिक मदद देता है. उनकी सरकारों ने किफायती घर, हायर एजुकेशन तक बेहतर पहुंच, पब्लिक हेल्थकेयर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के कामों को बढ़ावा दिया. उनके मौजूदा प्रशासन में, ‘पे-डे-मेया’ जैसी पहल के जरिए छात्रों को माध्यमिक शिक्षा से जुड़े रहने के लिए फाइनेंशियल हेल्प दिया जा रहा है. भूख की परेशानी से निपटना, रोजगार के मौके बढ़ाना और औद्योगिक विकास को समर्थन देना उनकी बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है.

भारत को क्या फायदे हो सकते हैं?

लूला डा सिल्वा के फिर से राष्ट्रपति चुने जाने से ट्रेड, एनर्जी, खेती, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा और डिजिटल तकनीक के क्षेत्रों में भारत और ब्राजील के बीच सहयोग और मजबूत हो सकता है. 2025 में दोनों देशों के बीच तकरीबन 15.2 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ. साथ ही दोनों सरकारों ने व्यापारिक रिश्तों को बढ़ाने और ‘भारत-मर्कोसुर’ (India-MERCOSUR) व्यापार समझौते पर चर्चा की है. बायो फ्यूल, रिन्यूएबल एनर्जी, अहम खनिजों और कृषि अनुसंधान के क्षेत्रों में सहयोग से भारतीय व्यवसायों के लिए नए मौके पैदा हो सकते हैं. दोनों देश ब्रिक्स , जी20 और इंटरनेशनल सोलर अलायंस के जरिए भी मिलकर काम करते हैं. हालांकि, असल फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौतों को किस तरह लागू किया जाता है और बाजार के हालात कैसे रहते हैं. लूला के चुनाव जीतने पर भारत के प्रधानमंत्री ने भी बधाई दी और और दोनों देशों के बीच रिश्तों के बेहतर होने की उम्मीद जताई है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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