क्या है तुर्किये, पाकिस्तान, कतर और इंडोनेशिया की 'बद्र डील', कितना है 'मक्का पैक्ट' से अलग?

पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया ने बद्र रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत चारों देश सैन्य तकनीक, हथियारों के संयुक्त उत्पादन और प्रशिक्षण में सहयोग करेंगे. जानिए भारत के लिए यह समझौता क्यों अहम है.

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अमेरिका-इजरायल के संभावित हमलों की खबरों के बीच ईरान ने कड़ा रुख अपनाया (X/@khalidtararsb )

पाकिस्तान ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने और आधुनिक रक्षा तकनीक हासिल करने की दिशा में एक और कदम उठाया है. पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया ने मिलकर रक्षा सहयोग से जुड़ा एक समझौता किया है. इस समझौते के तहत चारों देश हथियार बनाने, सैन्य तकनीक साझा करने, सैनिकों को प्रशिक्षण देने और रक्षा क्षेत्र में नई तकनीक बनाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं. इस समझौते को ‘बद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (Badr Memorandum of Understanding) नाम दिया गया है. बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में इस पर हस्ताक्षर किए गए. इस नए बदलाव को भारत के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पाकिस्तान को अपनी सैन्य क्षमताएं मजबूत करने के नए अवसर मिल सकते हैं.

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क्या है बद्र रक्षा समझौता?

बद्र समझौते का मुख्य उद्देश्य चारों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है. इसके तहत मिलकर सैन्य उपकरण बनाने, रक्षा तकनीक का आदान-प्रदान करने, सैनिकों को प्रशिक्षण देने और रिसर्च एवं विकास के क्षेत्र में साथ काम करने पर जोर दिया गया है. इस समझौते पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, तुर्किये के रक्षा मंत्री यासर गुलेर, कतर के उपप्रधानमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुलरहमान तथा इंडोनेशिया के उपरक्षा मंत्री यूसुफ जौहरी ने हस्ताक्षर किए.

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तुर्किये ने क्या कहा?

तुर्किये के रक्षा विभाग प्रेसीडेंसी के प्रमुख हलुक गोरगुन ने कहा कि यह समझौता मिलकर मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक के विकास में रणनीतिक सहयोग की शुरुआत करेगा. उनके मुताबिक, रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केवल दूसरे देशों से हथियार खरीदना काफी नहीं है. इसके साथ तकनीक साझा करना, मिलकर नए हथियारों को विकसित करना और अपने देश में मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार बढ़ाना भी जरूरी है. फिलहाल पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से इस समझौते पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

भारत के लिए यह समझौता क्यों अहम है?

इस समझौते को भारत के नजरिए से महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि इससे पाकिस्तान को अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के नए रास्ते मिल सकते हैं. पाकिस्तान रक्षा उपकरणों के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर रहा है. अब तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया के साथ सहयोग बढ़ने से उसे हथियारों और सैन्य तकनीक के दूसरे रास्ते भी खुल सकते हैं. समझौते में साथ में हथियार बनाने, तकनीक शेयर करने और रिसर्च पर जोर दिया गया है. इससे पाकिस्तान को नए जमाने के हाई-टेक रक्षा हथियारों, ड्रोन और दूसरे सैन्य उपकरणों के विकास में मदद मिल सकती है. हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि इस समझौते से पाकिस्तान की सैन्य ताकत में तुरंत कितना बदलाव आएगा. इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि चारों देश आगे कौन-सी परियोजनाएं शुरू करते हैं और उन पर कितना काम होता है.

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क्या चारों देश भारत के खिलाफ एकजुट हुए हैं?

इस मामले में एक बात समझना जरूरी है. बद्र समझौता चारों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए है, लेकिन इसमें ऐसा कोई साफ तौर पर कही गई शर्त नहीं है कि किसी एक देश पर हमला होने पर बाकी देश भी युद्ध में उसका साथ देंगे. यानी यह समझौता अपने आप में किसी सामूहिक सैन्य गठबंधन की घोषणा नहीं करता. इसका मुख्य जोर रक्षा उत्पादन, तकनीक के विकास, सैन्य प्रशिक्षण और रिसर्च पर है. इसलिए इसे पाकिस्तान को भारत के खिलाफ सैन्य मदद देने की बात कहना फिलहाल सही नहीं होगा.

इंडोनेशिया की भागीदारी भी अहम

इस समझौते में इंडोनेशिया की भागीदारी भारत के लिए एक और वजह से महत्वपूर्ण है. भारत भी दक्षिण-पूर्व एशिया के इस देश के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने और अपने हथियारों को बेचने की संभावनाओं पर काम कर रहा है. कुछ महीने पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र हवा मिसाइल की सप्लाई को लेकर चर्चा हुई थी. इन खबरों में संभावित सौदे की कीमत करीब 630 मिलियन डॉलर बताई गई थी. हालांकि, इसे पूरा हो चुका सौदा नहीं माना जाना चाहिए.

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मक्का रक्षा समझौते से कैसे अलग है बद्र समझौता?

पाकिस्तान ने अगस्त में सऊदी अरब और तुर्किये के साथ भी मक्का संयुक्त रक्षा समझौता किया था. उस समझौते के तहत किसी एक भागीदार देश पर हमला बाकी भागीदारों पर हमला माने जाने का प्रावधान बताया गया था. इसके मुकाबले बद्र समझौते में ऐसा कोई तय की गई आपसी रक्षा की शर्त नहीं है. इसका उद्देश्य चारों देशों के बीच रक्षा उद्योग, सैन्य तकनीक और प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाना है. कुल मिलाकर, बद्र समझौता पाकिस्तान को रक्षा तकनीक और सैन्य उपकरणों के क्षेत्र में नए सहयोगियों के साथ काम करने का अवसर दे सकता है. भारत के लिए इस पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन इसे फिलहाल भारत के खिलाफ बने सैन्य गठबंधन के रूप में देखना सही नहीं होगा.

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